उत्तर: c) व्यक्ति को जाति या रूप से नहीं, उसके आंतरिक गुणों से परखना चाहिए
"हिडिंबा और भीम की कथा" यह दर्शाती है कि हिडिंबा, एक राक्षसी होते हुए भी, दयालु और सहयोगी थी। यह कहानी यह सिखाती है कि व्यक्ति की जाति, वंश या बाहरी रूप के बजाय उसके आंतरिक गुण जैसे करुणा, दया, साहस और निष्ठा को महत्व देना चाहिए।
"हिडिंबा और भीम की कथा" यह दर्शाती है कि हिडिंबा, एक राक्षसी होते हुए भी, दयालु और सहयोगी थी। यह कहानी यह सिखाती है कि व्यक्ति की जाति, वंश या बाहरी रूप के बजाय उसके आंतरिक गुण जैसे करुणा, दया, साहस और निष्ठा को महत्व देना चाहिए।