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स्वतंत्रता संग्राम के नायक अनुसूया प्रसाद बहुगुणा

प्रस्तावना: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र का योगदान अविस्मरणीय है, और इस योगदान को संभव बनाने में प्रमुख भूमिका निभाने वालों में से एक अनुसूया प्रसाद बहुगुणा थे। उन्हें गढ़वाल का एक महत्वपूर्ण नेता माना जाता है, जिन्होंने अपनी दूरदर्शिता और समर्पण से इस क्षेत्र के लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा। … Read more

उत्तराखंड के स्वतंत्रता संग्राम के नायक बद्रीदत्त पांडे

प्रस्तावना: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखंड का योगदान अविस्मरणीय है, और इस योगदान को संभव बनाने में अग्रणी भूमिका बद्रीदत्त पांडे ने निभाई। जिन्हें सम्मानपूर्वक ‘कुमाऊँ केसरी’ के नाम से जाना जाता है, वे केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि एक कुशल पत्रकार और दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में ब्रिटिश … Read more

पेशावर कांड और गढ़वाली सैनिकों का योगदान

प्रस्तावना: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 23 अप्रैल 1930 को हुई ‘पेशावर कांड’ की घटना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह घटना केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं थी, बल्कि यह भारतीय सैनिकों के भीतर देशभक्ति की भावना और उनके मानवीय मूल्यों का भी प्रमाण थी। इस ऐतिहासिक घटना के केंद्र में गढ़वाल राइफल्स … Read more

कुली बेगार आंदोलन: शोषण के विरुद्ध एक ऐतिहासिक संघर्ष

प्रस्तावना: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में, केवल बड़े आंदोलनों ने ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर चले संघर्षों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तराखंड में, ऐसा ही एक आंदोलन था ‘कुली बेगार आंदोलन’, जो 1921 में कुमाऊँ क्षेत्र में ब्रिटिश शोषण के खिलाफ एक बड़ा जन-आंदोलन बन गया। यह आंदोलन इस बात का प्रतीक था … Read more

स्वतंत्रता संग्राम और गढ़वाल क्षेत्र का गौरवशाली इतिहास

प्रस्तावना: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र का योगदान अविस्मरणीय है। जहाँ कुमाऊँ ने अपने अहिंसक प्रतिरोधों और बौद्धिक जागरण के लिए पहचान बनाई, वहीं गढ़वाल ने नागरिक अवज्ञा और सैन्य विद्रोह दोनों के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपना प्रतिरोध दर्ज कराया। इस क्षेत्र के लोगों ने, अपने साहस, दृढ़ता और … Read more

स्वतंत्रता संग्राम में कुमाऊँ का गौरवशाली अध्याय

प्रस्तावना: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई केवल भारत के बड़े शहरों और मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसकी लहर हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में बसे उत्तराखंड के कुमाऊँ तक भी पहुँची। इस क्षेत्र ने अपनी भौगोलिक बाधाओं के बावजूद, ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक मजबूत और संगठित प्रतिरोध खड़ा किया। कुमाऊँ के नेताओं, बुद्धिजीवियों … Read more

उत्तराखंड की क्रांतिकारी महिलाएँ: स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा

प्रस्तावना: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई केवल पुरुषों तक सीमित नहीं थी; इसमें महिलाओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया। उत्तराखंड की महिलाओं ने भी इस राष्ट्रीय आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने न केवल अपने घरों की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में भी सक्रिय रूप से शामिल … Read more

टिहरी राज्य में स्वतंत्रता संग्राम और श्रीदेव सुमन का बलिदान

प्रस्तावना: जब भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम अपनी चरम सीमा पर था, तब कुछ भारतीय रियासतें भी इस संघर्ष का हिस्सा बन रही थीं। इनमें से एक थी टिहरी गढ़वाल रियासत, जहाँ ब्रिटिश शासन का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं था, लेकिन राजा अंग्रेजों के सहयोगी थे और जनता पर मनमाने ढंग से शासन … Read more

देघाट क्रांति: भारत छोड़ो आंदोलन का प्रतीक

प्रस्तावना: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (1942) एक निर्णायक क्षण था। इस आंदोलन ने देश भर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक व्यापक और अंतिम संघर्ष की शुरुआत की। उत्तराखंड का देघाट क्षेत्र, जो अल्मोड़ा जिले में स्थित है, भी इस आंदोलन से अछूता नहीं रहा। यहाँ की जनता ने अंग्रेजों के … Read more

कुमाऊँ की बारदोली : सल्ट क्रांति

प्रस्तावना: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (1942) एक निर्णायक चरण था, जिसने देश के हर कोने में लोगों को संगठित किया। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित सल्ट क्षेत्र भी इस आंदोलन से अछूता नहीं रहा। यहाँ की जनता ने अंग्रेजों के खिलाफ एक अभूतपूर्व विद्रोह किया, जिसे इतिहास में ‘सल्ट क्रांति’ के … Read more