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मुगल साम्राज्य का इतिहास

प्रस्तावना: मुगल साम्राज्य, जिसकी स्थापना बाबर ने 1526 ईस्वी में पानीपत की पहली लड़ाई के बाद की, भारतीय इतिहास का सबसे प्रभावशाली साम्राज्य माना जाता है। आगरा और बाद में दिल्ली को राजधानी बनाकर इस साम्राज्य ने उत्तर से दक्षिण तक व्यापक क्षेत्र पर शासन किया। अकबर महान के समय यह स्वर्ण युग पर पहुँचा … Read more

दिल्ली सल्तनत का इतिहास

प्रस्तावना: दिल्ली सल्तनत (1206–1526 ई.) भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण कालखंड था, जिसने संगठित मुस्लिम शासन की नींव रखी। इसमें पाँच प्रमुख वंश—मामलुक, खिलजी, तुगलक, सैय्यद और लोदी—ने शासन किया। दिल्ली को राजधानी बनाकर सल्तनत ने उत्तरी भारत और कुछ समय के लिए दक्षिण तक क्षेत्र फैलाया। स्थापत्य कला, प्रशासनिक सुधार और मंगोल आक्रमणों के … Read more

राष्ट्रकूट राजवंश का इतिहास

प्रस्तावना: राष्ट्रकूट राजवंश, जिसकी स्थापना दंतिदुर्ग ने 735 ईस्वी में की, दक्कन क्षेत्र का एक शक्तिशाली साम्राज्य था जो 8वीं से 10वीं शताब्दी तक प्रभावी रहा। राजधानी मान्यखेत थी और साम्राज्य का विस्तार कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात से मध्य भारत तक था। इस वंश ने कला, संस्कृति और स्थापत्य में उल्लेखनीय योगदान दिया तथा प्रतिहार और … Read more

प्रतिहार राजवंश का इतिहास

प्रस्तावना: प्रतिहार राजवंश, जिसे गुर्जर-प्रतिहार वंश भी कहा जाता है, की स्थापना नागभट्ट प्रथम ने लगभग 725 ईस्वी में की। यह वंश 8वीं से 11वीं शताब्दी तक उत्तर भारत का एक शक्तिशाली साम्राज्य रहा, जिसकी राजधानी कन्नौज थी। अरब आक्रमणों का सफलतापूर्वक प्रतिकार करने और उत्तर भारत में स्थिर शासन स्थापित करने में इसकी भूमिका … Read more

पाल वंश का इतिहास

प्रस्तावना: पाल राजवंश, जिसकी स्थापना 750 ईस्वी में गोपाल ने की, बंगाल और बिहार के महत्वपूर्ण बौद्ध शासकों में गिना जाता है। लगभग चार शताब्दियों तक (750–1174 ई.) यह राजवंश पूर्वी भारत का प्रमुख शक्ति केंद्र रहा। धर्मपाल और देवपाल जैसे शासकों के नेतृत्व में साम्राज्य ने विस्तार पाया। शिक्षा, बौद्ध धर्म और संस्कृति के … Read more

कुषाण वंश का इतिहास

प्रस्तावना: कुषाण वंश की स्थापना कुजुल कडफिसेस या कडफिसेस प्रथम ने लगभग 30 ईस्वी में की और यह 375 ईस्वी तक भारत व मध्य एशिया के बड़े हिस्से पर शासन करता रहा। इसकी राजधानी पुरुषपुर (काबुल) और मथुरा थी। कनिष्क के शासन में साम्राज्य अपने चरम पर पहुँचा, जहाँ बौद्ध धर्म, कला, संस्कृति और सिल्क … Read more

पाण्ड्य राजवंश का इतिहास

प्रस्तावना: पाण्ड्य राजवंश, दक्षिण भारत के तीन प्रमुख तमिल राजवंशों में से एक, लगभग 560 ई. से 1300 ई. तक राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से सक्रिय रहा। इसकी राजधानी मदुरै थी और साम्राज्य तमिलनाडु के दक्षिणी भाग में फैला था। जटावर्मन् कुलशेखर और मारवर्मन् सुंदर पाण्ड्य जैसे शासकों ने इसे पुनर्जीवित कर विस्तृत बनाया। कला, … Read more

चोल राजवंश का इतिहास

प्रस्तावना: चोल राजवंश, जिसकी स्थापना विजयालय चोल ने 9वीं शताब्दी (लगभग 850 ईस्वी) में की, दक्षिण भारत के सबसे शक्तिशाली और दीर्घकालीन राजवंशों में से एक था। इसकी राजधानी तंजावुर थी और साम्राज्य का विस्तार श्रीलंका, मालदीव और बंगाल की खाड़ी तक फैला। स्थापत्य कला, समुद्री व्यापार और नौसैनिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध यह वंश … Read more

गुप्त राजवंश का इतिहास

प्रस्तावना: गुप्त राजवंश, जिसकी स्थापना लगभग 320 ईस्वी में श्रीगुप्त ने की, प्राचीन भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। यह वंश लगभग 230 वर्षों तक शासन करता रहा और इसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी। चन्द्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त और विक्रमादित्य जैसे शासकों के नेतृत्व में गुप्त साम्राज्य राजनीतिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक उन्नति का प्रतीक बना, … Read more

मौर्य साम्राज्य का इतिहास

प्रस्तावना: मौर्य साम्राज्य प्राचीन भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा और प्रभावशाली साम्राज्य था, जिसकी स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 ई.पू. में नंद वंश के अंत के बाद की। राजधानी पाटलिपुत्र से शासित यह साम्राज्य उत्तर-पश्चिमी काबुल से लेकर दक्षिण भारत तक विस्तृत था। सुव्यवस्थित प्रशासन, विशाल सेना और सांस्कृतिक योगदानों के साथ यह साम्राज्य भारतीय … Read more

नंद वंश का इतिहास

प्रस्तावना: नंद वंश प्राचीन भारत का एक प्रभावशाली राजवंश था जिसकी स्थापना महापद्म नंद ने लगभग 345 ई.पू. में की। इस वंश ने पाटलिपुत्र को राजधानी बनाकर गंगा नदी की घाटी से लेकर विंध्य पर्वतों के दक्षिण और लगभग पूरे उत्तर भारत तक शासन का विस्तार किया। नंद शासकों ने मजबूत प्रशासन, विशाल सेना और … Read more

हर्यक वंश का इतिहास

प्रस्तावना: हर्यक वंश प्राचीन भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसने मगध को उत्तर भारत की प्रमुख शक्ति बनाने की नींव रखी। इसकी स्थापना लगभग 544 ई.पू. में बिम्बिसार ने की और यह 413 ई.पू. तक कायम रहा। इस वंश ने पाटलिपुत्र को राजनीतिक केंद्र बनाया, और बौद्ध तथा जैन धर्म को प्रोत्साहन दिया … Read more