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उत्तराखंड: जल विद्युत परियोजनाएँ

उत्तराखंड अपनी प्रचुर जल राशि और तीव्र वेग वाली नदियों के कारण भारत के ‘ऊर्जा प्रदेश’ के रूप में उभर रहा है। यहाँ की जल विद्युत क्षमता राज्य की आर्थिकी का मुख्य स्तंभ है।

  1. अपार क्षमता: उत्तराखंड की अनुमानित जलविद्युत क्षमता 25,000 मेगावाट से अधिक है, जो इसे देश के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक राज्यों में खड़ा करती है।
  2. ऊर्जा प्रदेश की संकल्पना: प्रचुर जल संसाधनों के कारण राज्य को “ऊर्जा प्रदेश” बनाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि बिजली निर्यात से राज्य की आय बढ़ सके।
  3. प्रमुख नियामक संस्था (UJVNL): 12 फरवरी 2001 को स्थापित ‘उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड’ राज्य में जलविद्युत उत्पादन और विकास के लिए जिम्मेदार मुख्य इकाई है।
  4. परियोजनाओं का वर्गीकरण: राज्य में 2 मेगावाट तक की सूक्ष्म, 2-25 मेगावाट तक की लघु और 25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली बड़ी परियोजनाएँ संचालित हैं।
  5. रॉयल्टी का लाभ: उत्तराखंड को उसके क्षेत्र में केंद्र या अन्य राज्यों द्वारा विकसित परियोजनाओं से 12% बिजली रॉयल्टी के रूप में निःशुल्क प्राप्त होती है।
  6. टिहरी बाँध परियोजना: यह भागीरथी और भिलंगना के संगम पर स्थित है। 2400 मेगावाट की कुल क्षमता के साथ यह राज्य की सबसे बड़ी परियोजना है।
  7. एशिया का गौरव: 260.5 मीटर ऊँचा टिहरी बाँध एशिया का सबसे ऊँचा और दुनिया का चौथा सबसे ऊँचा मिट्टी-पत्थर पूरित (Earth-fill) बाँध है।
  8. स्वामी रामतीर्थ सागर: टिहरी बाँध के विशाल जलाशय को ‘स्वामी रामतीर्थ सागर’ के नाम से जाना जाता है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 42 वर्ग किमी है।
  9. ग्लोगी परियोजना (ऐतिहासिक महत्व): मसूरी के पास 1909 में शुरू हुई यह परियोजना उत्तर भारत की पहली और देश की दूसरी सबसे पुरानी जलविद्युत परियोजना है।
  10. मनेरी भाली परियोजना: उत्तरकाशी में भागीरथी नदी पर स्थित यह परियोजना दो चरणों (तिलोथ और धरासू) में कुल 394 मेगावाट बिजली पैदा करती है।
  11. विष्णुप्रयाग परियोजना: चमोली में अलकनंदा नदी पर स्थित यह 400 मेगावाट की परियोजना निजी क्षेत्र (जेपी समूह) द्वारा संचालित एक प्रमुख ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट है।
  12. धौलीगंगा चरण-I: पिथौरागढ़ के धारचूला में स्थित यह 280 मेगावाट की परियोजना NHPC द्वारा संचालित है, जिसे 2021 की आपदा में भारी क्षति पहुँची थी।
  13. लखवाड़-व्यासी परियोजना: यमुना नदी पर स्थित यह एक बहुउद्देशीय राष्ट्रीय परियोजना है, जिससे उत्तराखंड सहित 6 राज्यों को लाभ मिलता है।
  14. किशाऊ बाँध: टोंस नदी पर प्रस्तावित यह 660 मेगावाट की परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की एक महत्वपूर्ण संयुक्त राष्ट्रीय परियोजना है।
  15. उत्तरकाशी के अन्य प्रोजेक्ट: पाला मनेरी और नटवाड़ मोरी जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ उत्तरकाशी जिला जलविद्युत उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है।
  16. चमोली की परियोजनाएँ: तपोवन विष्णुगाड (520 MW) और विष्णुगाड-पीपलकोटी (444 MW) अलकनंदा और धौलीगंगा घाटियों की महत्वपूर्ण इकाइयाँ हैं।
  17. यमुना घाटी (देहरादून): ढालीपुर, ढकरानी और छिबरो जैसी पुरानी और स्थिर परियोजनाएँ देहरादून जिले के औद्योगिक विकास में सहायक हैं।
  18. पर्यावरणीय चुनौतियाँ: हिमालय की संवेदनशीलता के कारण वनों का कटाव, जैव विविधता का ह्रास और गाद (Silt) का जमाव इन परियोजनाओं के लिए बड़ी चुनौती है।
  19. भूवैज्ञानिक जोखिम: राज्य के ‘सिस्मिक ज़ोन’ (भूकंपीय क्षेत्र) में होने के कारण बड़े बाँधों की सुरक्षा और आपदा जोखिम (जैसे 2013 की बाढ़) हमेशा चिंता का विषय रहे हैं।
  20. सतत विकास की आवश्यकता: भविष्य में “ऊर्जा प्रदेश” के लक्ष्य को पाने के लिए पर्यावरणीय स्थिरता और स्थानीय समुदायों के पुनर्वास को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1: उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेशके रूप में देखे जाने के क्या कारण हैं?

  1. राज्य की अनुमानित जलविद्युत क्षमता 25,000 मेगावाट से अधिक है।
  2. यहाँ प्रचुर जल राशि और तीव्र वेग वाली नदियाँ उपलब्ध हैं।
  3. बिजली निर्यात के माध्यम से राज्य की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 2: उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) और परियोजनाओं के वर्गीकरण के बारे में क्या सही है?

  1. UJVNL की स्थापना 12 फरवरी 2001 को हुई थी।
  2. 2 मेगावाट तक की परियोजनाओं को सूक्ष्म (Micro) श्रेणी में रखा जाता है।
  3. 25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली परियोजनाओं को ‘बड़ी परियोजना’ माना जाता है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 3: टिहरी बाँध परियोजना के संबंध में कौन से तथ्य सत्य हैं?

  1. यह भागीरथी और भिलंगना नदी के संगम पर स्थित है।
  2. इसकी कुल स्थापित क्षमता 2400 मेगावाट है।
  3. यह उत्तराखंड की सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 4: टिहरी बाँध की संरचना और जलाशय के विषय में क्या सही है?

  1. यह 5 मीटर ऊँचा, एशिया का सबसे ऊँचा बाँध है।
  2. यह दुनिया का चौथा सबसे ऊँचा मिट्टी-पत्थर पूरित (Earth-fill) बाँध है।
  3. इसके विशाल जलाशय को ‘स्वामी रामतीर्थ सागर’ के नाम से जाना जाता है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 5: उत्तराखंड की ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण परियोजनाओं के बारे में क्या सत्य है?

  1. ग्लोगी परियोजना (1909) उत्तर भारत की पहली जलविद्युत परियोजना है।
  2. मनेरी भाली परियोजना उत्तरकाशी में भागीरथी नदी पर स्थित है।
  3. उत्तराखंड को अन्य राज्यों की परियोजनाओं से 12% बिजली रॉयल्टी के रूप में निःशुल्क मिलती है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 6: चमोली और पिथौरागढ़ की प्रमुख परियोजनाओं के संदर्भ में कौन से कथन सही हैं?

  1. विष्णुप्रयाग परियोजना (400 MW) अलकनंदा नदी पर निजी क्षेत्र द्वारा संचालित है।
  2. धौलीगंगा चरण-I (280 MW) पिथौरागढ़ के धारचूला में स्थित है।
  3. तपोवन विष्णुगाड और विष्णुगाड-पीपलकोटी चमोली जिले की महत्वपूर्ण इकाइयाँ हैं।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 7: यमुना और टोंस नदी घाटी की परियोजनाओं के बारे में क्या सही है?

  1. लखवाड़-व्यासी परियोजना यमुना नदी पर स्थित एक बहुउद्देशीय राष्ट्रीय परियोजना है।
  2. किशाऊ बाँध (660 MW) टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल की संयुक्त परियोजना है।
  3. देहरादून जिले में ढालीपुर, ढकरानी और छिबरो जैसी पुरानी परियोजनाएँ कार्यरत हैं।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 8: उत्तराखंड में जल विद्युत विकास के मार्ग में मुख्य पर्यावरणीय चुनौतियाँ क्या हैं?

  1. हिमालयी क्षेत्रों में वनों का कटाव और जैव विविधता का ह्रास।
  2. जलाशयों में गाद (Silt) का जमा होना।
  3. नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव और पारिस्थितिक असंतुलन।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 9: जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े भूवैज्ञानिक जोखिमों के संदर्भ में क्या सत्य है?

  1. राज्य का अधिकांश भाग संवेदनशील ‘सिस्मिक ज़ोन’ (भूकंपीय क्षेत्र) में आता है।
  2. बादल फटने या आपदा (जैसे 2013 की बाढ़) के समय बाँधों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता है।
  3. भूवैज्ञानिक अस्थिरता के कारण बड़ी परियोजनाओं का निर्माण जोखिम भरा होता है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 10: भविष्य में “ऊर्जा प्रदेश” के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु क्या आवश्यक है?

  1. परियोजनाओं के विकास के साथ पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना।
  2. प्रभावित स्थानीय समुदायों का उचित पुनर्वास और कल्याण।
  3. आपदा-सहने योग्य (Resilient) बुनियादी ढाँचे का निर्माण करना।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

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