उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनरेखा हैं। यहाँ की भौगोलिक जटिलताओं के बीच सड़क तंत्र का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- विकास का आधार: विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में आर्थिक प्रगति, सामाजिक संपर्क और दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाएँ पहुँचाने के लिए सड़क परिवहन सबसे प्रमुख साधन है।
- सड़क घनत्व की चुनौती: पर्वतीय क्षेत्रों की कठिन बनावट के कारण राज्य में सड़क घनत्व राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी कम है।
- प्रमुख कार्यदायी संस्थाएँ: राज्य में सड़कों का जाल बिछाने और उनके रखरखाव का उत्तरदायित्व मुख्य रूप से लोक निर्माण विभाग (PWD), सीमा सड़क संगठन (BRO) और NHAI पर है।
- सड़कों का वर्गीकरण: राज्य के सड़क तंत्र को चार मुख्य श्रेणियों में बाँटा गया है: राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, जिला सड़कें और ग्रामीण सड़कें।
- राष्ट्रीय राजमार्ग (NH): ये राज्य को देश के अन्य हिस्सों और प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से जोड़ते हैं। मार्च 2021 तक इनकी कुल लंबाई लगभग 2950 किमी थी।
- NH-7 (सबसे लंबा मार्ग): यह राज्य का सबसे महत्वपूर्ण राजमार्ग है, जो देहरादून से शुरू होकर ऋषिकेश, श्रीनगर और चमोली होते हुए बद्रीनाथ (माणा गाँव) तक जाता है।
- गंगोत्री व यमुनोत्री संपर्क: NH-34 गंगोत्री धाम को जोड़ता है, जबकि NH-134 बड़कोट के रास्ते यमुनोत्री धाम तक पहुँच सुनिश्चित करता है।
- केदारनाथ मार्ग: NH-107 रुद्रप्रयाग से सोनप्रयाग तक जाता है, जो केदारनाथ यात्रा का मुख्य सड़क मार्ग है।
- कुमाऊँ की जीवनरेखा (NH-9): यह राजमार्ग कुमाऊँ मंडल के प्रमुख शहरों जैसे सितारगंज, टनकपुर, चम्पावत और पिथौरागढ़ को आपस में जोड़ता है।
- पड़ोसी राज्यों से जुड़ाव: NH-307 देहरादून को सहारनपुर से और NH-734 काशीपुर को नगीना (उत्तर प्रदेश) से जोड़कर अंतरराज्यीय परिवहन को सुगम बनाते हैं।
- राज्य राजमार्ग (SH): इनका रखरखाव राज्य सरकार (PWD. द्वारा किया जाता है। ये जिला मुख्यालयों को मुख्य राजमार्गों से जोड़ते हैं, जैसे अल्मोड़ा-बागेश्वर मार्ग।
- सीमा सड़क संगठन (BRO) की भूमिका: सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में BRO सड़कों का निर्माण करता है। इसके दो प्रमुख प्रोजेक्ट शिवालिक (गढ़वाल) और हीरक (कुमाऊँ) कार्यरत हैं।
- चारधाम ऑल वेदर रोड: यह केंद्र सरकार की एक महात्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका लक्ष्य चारों मुख्य धामों को हर मौसम में सुरक्षित सड़क संपर्क से जोड़ना है।
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY): इस योजना ने उत्तराखंड के सुदूर गाँवों को मुख्यधारा से जोड़ने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है।
- उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC): इसकी स्थापना 31 अक्टूबर 2003 को हुई थी। यह राज्य की आधिकारिक सार्वजनिक बस सेवा प्रदाता है।
- UTC का परिचालन: निगम का मुख्यालय देहरादून में है और इसके तीन मंडल कार्यालय—देहरादून, नैनीताल और टनकपुर में स्थित हैं।
- बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएँ: राज्य राजमार्गों के सुदृढ़ीकरण के लिए एशियाई विकास बैंक (ADB. और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं से भी वित्तीय सहायता ली जा रही है।
- प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव: मानसून के दौरान भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं से सड़कें अक्सर बाधित हो जाती हैं, जो यहाँ के परिवहन की सबसे बड़ी चुनौती है।
- पर्यावरणीय संतुलन: सड़क निर्माण के दौरान वनों की सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना एक अनिवार्य अनिवार्यता है, जिसके लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
- भविष्य की आवश्यकता: राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए टिकाऊ, सुरक्षित और आपदा-सहने योग्य (Resilient) सड़क नेटवर्क का विस्तार करना सरकार की प्राथमिकता है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1: उत्तराखंड में सड़क परिवहन के महत्व और विकास के संबंध में क्या सही है?
- विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहाँ सड़क परिवहन ही आवागमन का सबसे प्रमुख साधन है।
- राज्य में सड़कों के निर्माण और रखरखाव का कार्य PWD, BRO और NHAI द्वारा किया जाता है।
- सड़कें राज्य की आर्थिक प्रगति और दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाएँ पहुँचाने के लिए जीवनरेखा हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2: राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) के बारे में कौन से तथ्य सत्य हैं?
- मार्च 2021 तक राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 2950 किमी थी।
- NH-7 राज्य का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है, जो देहरादून से बद्रीनाथ (माणा) तक जाता है।
- ये मार्ग राज्य को देश के अन्य हिस्सों और औद्योगिक केंद्रों से जोड़ते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3: चारधामों को जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का सही मिलान क्या है?
- NH-34 गंगोत्री धाम को जोड़ता है।
- NH-134 बड़कोट के रास्ते यमुनोत्री धाम तक पहुँच सुनिश्चित करता है।
- NH-107 रुद्रप्रयाग से सोनप्रयाग (केदारनाथ मार्ग) तक जाता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4: कुमाऊँ मंडल और अंतरराज्यीय परिवहन के संदर्भ में कौन से कथन सही हैं?
- NH-9 कुमाऊँ के प्रमुख शहरों जैसे सितारगंज, टनकपुर और पिथौरागढ़ को जोड़ता है।
- NH-307 देहरादून को सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) से जोड़ता है।
- NH-734 काशीपुर को नगीना (उत्तर प्रदेश) से जोड़कर परिवहन सुगम बनाता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5: सीमा सड़क संगठन (BRO) और उसकी परियोजनाओं के बारे में क्या सत्य है?
- BRO सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण करता है।
- गढ़वाल क्षेत्र के लिए BRO का ‘प्रोजेक्ट शिवालिक’ कार्यरत है।
- कुमाऊँ क्षेत्र के लिए BRO का ‘प्रोजेक्ट हीरक’ कार्य करता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6: उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC. के संबंध में सही तथ्यों का चयन करें:
- उत्तराखंड परिवहन निगम की स्थापना 31 अक्टूबर 2003 को हुई थी।
- निगम का मुख्यालय राज्य की राजधानी देहरादून में स्थित है।
- इसके तीन मंडल कार्यालय देहरादून, नैनीताल और टनकपुर में हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7: राज्य में सड़कों के वर्गीकरण और रखरखाव के बारे में क्या सही है?
- सड़क तंत्र को राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, जिला और ग्रामीण श्रेणियों में बाँटा गया है।
- राज्य राजमार्गों (SH) का रखरखाव मुख्य रूप से राज्य लोक निर्माण विभाग ( करता है।
- जिला सड़कें जिला मुख्यालयों को मुख्य मार्गों और तहसीलों से जोड़ती हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8: ग्रामीण कनेक्टिविटी और विशेष सड़क परियोजनाओं के संदर्भ में क्या सत्य है?
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) ने सुदूर गाँवों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद की है।
- ‘चारधाम ऑल वेदर रोड’ परियोजना का लक्ष्य चारों धामों को हर मौसम में सड़क से जोड़ना है।
- राज्य राजमार्गों के सुदृढ़ीकरण हेतु ADB और विश्व बैंक से वित्तीय सहायता ली जा रही है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9: उत्तराखंड में सड़क परिवहन के सामने मुख्य चुनौतियाँ कौन सी हैं?
- मानसून के दौरान होने वाले भूस्खलन और बादल फटने से सड़कों का बाधित होना।
- पर्वतीय बनावट के कारण सड़क घनत्व का राष्ट्रीय औसत से कम होना।
- सड़क निर्माण के दौरान पर्यावरणीय संतुलन और वनों की सुरक्षा बनाए रखना।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10: भविष्य की सड़क परिवहन आवश्यकताओं के बारे में कौन से बिंदु सही हैं?
- आपदा-सहने योग्य (Resilient) सड़क नेटवर्क का विस्तार करना सरकार की प्राथमिकता है।
- आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर टिकाऊ और सुरक्षित सड़कों का निर्माण करना अनिवार्य है।
- परिवहन क्षेत्र में ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन आवश्यक है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी