उत्तराखंड की जनजातियाँ राज्य की सांस्कृतिक पहचान का आधार स्तंभ हैं। यहाँ की पाँच प्रमुख जनजातियाँ—थारू, जौनसारी, भोटिया, बुक्सा और राजी—अपनी विशिष्ट जीवनशैली और परंपराओं के लिए जानी जाती हैं।
- संवैधानिक दर्जा: उत्तराखंड की पाँच जनजातियों (थारू, जौनसारी, भोटिया, बुक्सा और राजी) को 1967 में अनुसूचित जनजाति (ST) घोषित किया गया। 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल आबादी में इनका हिस्सा लगभग 2.9% है।
- जनसंख्या वितरण: सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या ऊधम सिंह नगर जिले में निवास करती है, जबकि सबसे कम जनजातीय आबादी रुद्रप्रयाग जिले में है।
- थारू (सबसे बड़ी जनजाति): थारू उत्तराखंड और कुमाऊँ क्षेत्र का सबसे बड़ा जनजातीय समुदाय है। ये मुख्य रूप से ऊधम सिंह नगर के खटीमा, सितारगंज और किच्छा क्षेत्रों में बसे हैं।
- थारू समाज और विवाह: थारू समाज में पहले ‘बदला विवाह’ प्रथा थी, जो अब ‘तीन टिकठी’ प्रथा में बदल गई है। ये दीपावली को ऐतिहासिक रूप से ‘शोक पर्व’ के रूप में मनाते थे, हालांकि अब यह परंपरा कम हो रही है।
- जौनसारी (गढ़वाल की सबसे बड़ी जनजाति): जौनसारी देहरादून के चकराता, कालसी और त्यूनी क्षेत्रों में रहते हैं। ये स्वयं को पांडवों का वंशज मानते हैं और इनकी संस्कृति में पांडव गाथाओं का विशेष महत्व है।
- जौनसारी सामाजिक व्यवस्था: इनके समाज में ग्राम पंचायत को ‘खुमरी‘ कहा जाता है, जिसका मुखिया ‘ग्राम सयाणा’ होता है। महासू देवता (शिव का रूप) इनके सबसे बड़े आराध्य देव हैं।
- बहुपति विवाह परंपरा: जौनसारी समुदाय में पहले पांडवों की तरह ‘बहुपति विवाह’ प्रथा प्रचलित थी, जो आधुनिक शिक्षा और सामाजिक बदलाव के कारण अब लगभग समाप्त हो चुकी है।
- भोटिया (अर्ध-घुमंतू जनजाति): उच्च हिमालयी क्षेत्रों (पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी) में रहने वाली यह जनजाति व्यापार और ऊनी हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। ये ऋतु प्रवास (Transhumance) करते हैं।
- भोटिया उपजातियाँ: चमोली में इन्हें मारछा व तोलछा, पिथौरागढ़ में शौका व जोहारी और उत्तरकाशी में ‘जाड़‘ कहा जाता है। जाड़ भोटिया बौद्ध धर्म के अनुयायी होते हैं।
- कंडाली उत्सव: पिथौरागढ़ के भोटिया (शौका) समुदाय द्वारा प्रत्येक 12 वर्ष में ‘कंडाली’ नामक प्रसिद्ध उत्सव मनाया जाता है, जो उनकी वीरता और शौर्य का प्रतीक है।
- बुक्सा जनजाति: ये मुख्य रूप से ऊधम सिंह नगर के बाजपुर और काशीपुर क्षेत्रों में रहते हैं। ये स्वयं को धारानगरी के पंवार राजपूतों का वंशज मानते हैं।
- चामुंडा देवी की पूजा: बुक्सा जनजाति की सबसे बड़ी आराध्य देवी ‘चामुंडा देवी’ हैं। इनका मुख्य मंदिर काशीपुर में स्थित है, जहाँ ‘चैती मेला’ हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
- राजी (सबसे छोटी जनजाति): राजी या ‘वनरावत’ राज्य की सबसे कम जनसंख्या वाली और पिछड़ी जनजाति है। ये मुख्य रूप से पिथौरागढ़ के जंगलों में निवास करते हैं।
- मूक विनिमय (Silent Trade): राजी जनजाति ऐतिहासिक रूप से ‘मूक विनिमय’ के लिए प्रसिद्ध थी, जहाँ वे रात में लकड़ी के बर्तन दूसरों के घरों के पास छोड़ देते थे और बदले में अनाज प्राप्त करते थे।
- राजी आवास और भाषा: राजी जनजाति के आवासों को ‘रौत्युड़ा‘ कहा जाता है। इनकी विशिष्ट बोली ‘मुण्डा’ है, जिसमें तिब्बती और संस्कृत शब्दों का प्रभाव पाया जाता है।
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व: राज्य विधानसभा में जनजातियों के लिए 2 सीटें आरक्षित हैं—चकराता (देहरादून) और नानकमत्ता (ऊधम सिंह नगर)।
- सांस्कृतिक नृत्य: जौनसारी ‘हारुल’ नृत्य के लिए, थारू होली पर किए जाने वाले खिचड़ी नृत्य के लिए और भोटिया ‘पौणा’ (युद्ध नृत्य) के लिए जाने जाते हैं।
- आर्थिक आधार: थारू और बुक्सा मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं, जबकि भोटिया ऊनी वस्त्रों और जड़ी-बूटियों के व्यापार में निपुण हैं। राजी अब शिकार से कृषि की ओर बढ़ रहे हैं।
- धार्मिक विश्वास: अधिकांश जनजातियाँ हिंदू धर्म को मानती हैं, लेकिन वे प्रकृति पूजक भी हैं। वे अपने स्थानीय भूम्याल, पछावन और नागरेयाही देवी-देवताओं की विशेष पूजा करते हैं।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड की जनजातियाँ राज्य की जैव-विविधता और सांस्कृतिक संपन्नता की रक्षक हैं। उनकी विशिष्ट भाषाएँ, जैसे भोटिया की बोलियाँ और राजी की मुण्डा, भाषाई विविधता का अनमोल हिस्सा हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1: उत्तराखंड की जनजातियों को संवैधानिक दर्जा मिलने के संबंध में क्या सही है?
- राज्य की पाँच प्रमुख जनजातियों को 1967 में अनुसूचित जनजाति (ST) घोषित किया गया।
- इन पाँच जनजातियों में थारू, जौनसारी, भोटिया, बुक्सा और राजी शामिल हैं।
- 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल आबादी में इनका हिस्सा लगभग 9% है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2: थारू जनजाति के विषय में कौन से तथ्य सत्य हैं?
- यह उत्तराखंड और कुमाऊँ क्षेत्र का सबसे बड़ा जनजातीय समुदाय है।
- ये मुख्य रूप से ऊधम सिंह नगर के खटीमा, सितारगंज और किच्छा क्षेत्रों में निवास करते हैं।
- इनके समाज में ‘बदला विवाह’ और ‘तीन टिकठी’ जैसी विवाह प्रथाएं प्रचलित रही हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3: गढ़वाल की सबसे बड़ी जनजाति ‘जौनसारी‘ के बारे में क्या सही है?
- ये मुख्य रूप से देहरादून के चकराता, कालसी और त्यूनी क्षेत्रों में निवास करते हैं।
- जौनसारी समुदाय स्वयं को पांडवों का वंशज मानता है।
- महासू देवता (शिव का रूप) इनके सबसे बड़े आराध्य देव हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4: जौनसारी सामाजिक व्यवस्था और परंपराओं के संदर्भ में कौन से कथन सही हैं?
- इनकी पारंपरिक ग्राम पंचायत को ‘खुमरी’ और इसके मुखिया को ‘ग्राम सयाणा’ कहा जाता है।
- ऐतिहासिक रूप से इनमें ‘बहुपति विवाह’ प्रथा प्रचलित थी।
- ‘हारुल’ इस समुदाय का एक प्रमुख सांस्कृतिक नृत्य है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5: भोटिया जनजाति की विशेषताओं के संबंध में सही तथ्यों का चयन करें:
- यह एक अर्ध-घुमंतू जनजाति है जो ऋतु प्रवास (Transhumance) करती है।
- ये मुख्य रूप से उच्च हिमालयी क्षेत्रों (पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी) में रहते हैं।
- ये अपने ऊनी हस्तशिल्प, जड़ी-बूटियों के व्यापार और ‘पौणा’ नृत्य के लिए प्रसिद्ध हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6: भोटिया जनजाति की उपजातियों और उत्सवों के बारे में क्या सत्य है?
- चमोली में इन्हें मारछा व तोलछा और पिथौरागढ़ में शौका व जोहारी कहा जाता है।
- उत्तरकाशी के ‘जाड़’ भोटिया मुख्य रूप से बौद्ध धर्म के अनुयायी होते हैं।
- पिथौरागढ़ के शौका समुदाय द्वारा प्रत्येक 12 वर्ष में ‘कंडाली’ उत्सव मनाया जाता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7: बुक्सा जनजाति के संदर्भ में कौन से तथ्य सही हैं?
- ये मुख्य रूप से ऊधम सिंह नगर के बाजपुर और काशीपुर क्षेत्रों में निवास करते हैं।
- ये स्वयं को धारानगरी के पंवार राजपूतों का वंशज मानते हैं।
- चामुंडा देवी इनकी सबसे बड़ी आराध्य देवी हैं और काशीपुर में इनका मुख्य मंदिर है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8: राज्य की सबसे छोटी जनजाति ‘राजी‘ (वनरावत) के विषय में क्या सही है?
- ये राज्य की सबसे कम जनसंख्या वाली जनजाति है जो मुख्य रूप से पिथौरागढ़ में रहती है।
- ये ऐतिहासिक रूप से ‘मूक विनिमय’ (Silent Trade) के लिए प्रसिद्ध रहे हैं।
- इनके आवासों को ‘रौत्युड़ा’ कहा जाता है और इनकी बोली ‘मुण्डा’ है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9: उत्तराखंड में जनजातियों के राजनीतिक और भौगोलिक वितरण के बारे में क्या सत्य है?
- सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या ऊधम सिंह नगर में और सबसे कम रुद्रप्रयाग में है।
- राज्य विधानसभा में जनजातियों के लिए 2 सीटें (चकराता और नानकमत्ता) आरक्षित हैं।
- थारू और बुक्सा मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10: जनजातीय संस्कृति और धार्मिक विश्वास के संबंध में कौन से बिंदु सही हैं?
- अधिकांश जनजातियाँ हिंदू धर्म के साथ-साथ प्रकृति की पूजा भी करती हैं।
- थारू जनजाति में होली के अवसर पर ‘खिचड़ी नृत्य’ किया जाता है।
- ये अपने स्थानीय देवताओं जैसे भूम्याल, पछावन और नागरेयाही की पूजा करते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी