भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखंड का योगदान शौर्य, बलिदान और सामाजिक चेतना का एक अद्वितीय संगम है। इस हिमालयी क्षेत्र ने न केवल ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी, बल्कि टिहरी जैसी रियासतों में राजशाही के विरुद्ध भी बिगुल फूंका।
- डांडी मार्च में सहभागिता: महात्मा गांधी की ऐतिहासिक 1930 की डांडी यात्रा में उत्तराखंड के तीन सत्याग्रहियों—ज्योतिराम कांडपाल, भैरव दत्त जोशी और खड़ग बहादुर—ने भाग लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की उपस्थिति दर्ज कराई।
- नमक सत्याग्रह का नेतृत्व: राज्य में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान कुमाऊँ में गोविंद बल्लभ पंत और गढ़वाल में प्रताप सिंह नेगी ने नमक कानून तोड़ने के अभियान का सफल नेतृत्व किया।
- झंडा सत्याग्रह: 1930 में अल्मोड़ा के नंदादेवी प्रांगण में मोहन जोशी और पौड़ी के जहरीखाल में जयानंद भारती ने ब्रिटिश निषेधाज्ञा के बावजूद तिरंगा फहराकर जनता में साहस का संचार किया।
- कुमाऊँ का बारदोली (सल्ट): अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र की क्रांतिकारी गतिविधियों से प्रभावित होकर गांधी जी ने इसे ‘कुमाऊँ का बारदोली‘ की संज्ञा दी। यहाँ के खुमाड़ में 5 सितंबर 1942 को हुए गोलीकांड में गंगाराम और खीमादेव शहीद हुए थे।
- गढ़वाल का बारदोली (गुजडू): पौड़ी गढ़वाल के गुजडू क्षेत्र को वहां के किसानों के अदम्य साहस और लगान-बंदी आंदोलन के कारण ‘गढ़वाल का बारदोली‘ कहा जाता है।
- क्रांतिकारी संगठन (HSRA): पौड़ी के भवानी सिंह रावत प्रसिद्ध क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के निकटतम साथी थे और उन्होंने 1929 के ‘वायसराय बम कांड’ में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
- मद्रास एवं ऊंटी बैंक कांड: टिहरी के इंद्र सिंह गढ़वाली ने 1933 के मद्रास बम कांड और बच्चूलाल भट्ट ने ऊंटी बैंक डकैती में भाग लेकर क्रांतिकारी राष्ट्रवाद को धार दी।
- अशोक का उत्तराधिकारी – वीर चंद्र सिंह गढ़वाली: पेशावर कांड (1930) के नायक चंद्र सिंह गढ़वाली ने निहत्थे पठानों पर गोली चलाने से मना कर दिया था। इस घटना के बाद मोतीलाल नेहरू ने पूरे देश में ‘गढ़वाल दिवस‘ मनाने की घोषणा की।
- पर्वतीय राजनीतिक सम्मेलन: 1930 में दुगड्डा में गढ़वाल का प्रथम राजनीतिक सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसने पहाड़ी क्षेत्रों में कांग्रेस की विचारधारा को घर-घर पहुँचाया।
- व्यक्तिगत सत्याग्रह: उत्तराखंड के पहले व्यक्तिगत सत्याग्रही जगमोहन सिंह नेगी थे, जबकि महिलाओं में भागीरथी देवी ने सर्वप्रथम स्वयं को सत्याग्रही घोषित किया।
- देघाट एवं सालम की घटनाएँ: 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देघाट में हरिकृष्ण व हीरामणि शहीद हुए। सालम के राम सिंह आजाद को उनकी वीरता के लिए ‘सालम का शेर’ कहा गया।
- शांति लाल त्रिवेदी का गांधी आश्रम: 1937 में अल्मोड़ा के चनौदा में स्थापित गांधी आश्रम स्वतंत्रता सेनानियों का प्रमुख अड्डा और खादी प्रचार का केंद्र बना।
- आजाद हिन्द फौज (INA) में योगदान: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की फौज में लगभग 12% सैनिक (2500) उत्तराखंड से थे। कर्नल पी.सी. रतूड़ी और मेजर देव सिंह दानू जैसे वीरों ने इसमें उच्च पदों पर सेवा दी।
- वीर केसरी चंद का बलिदान: जौनसार बावर के वीर केसरी चंद को आजाद हिन्द फौज में रहते हुए इम्फाल मोर्चे पर अदम्य साहस दिखाने के लिए 3 मई 1945 को फांसी दी गई।
- महिला शक्ति का शौर्य: बिशनी देवी शाह कुमाऊँ की पहली महिला थीं जिन्होंने नमक सत्याग्रह के दौरान अल्मोड़ा नगर पालिका पर झंडा फहराया। कुंती वर्मा जैसी महिलाओं ने जिंदा या मुर्दा पकड़ने के आदेशों की भी परवाह नहीं की।
- सरला और मीरा बहन का योगदान: गांधी जी की विदेशी शिष्याओं ने कौसानी में लक्ष्मी आश्रम और ऋषिकेश में पशुलोक के माध्यम से महिलाओं में स्वावलंबन और देशभक्ति की अलख जगाई।
- तिलाड़ी कांड (1930): टिहरी रियासत में वन अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे किसानों पर हुई गोलीबारी को ‘टिहरी का जलियांवाला बाग‘ कहा जाता है। इसने राजशाही के अंत की शुरुआत की।
- श्रीदेव सुमन की शहादत: टिहरी प्रजामंडल के प्रणेता श्रीदेव सुमन ने जेल में अमानवीय यातनाओं के विरुद्ध 84 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल की और 25 जुलाई 1944 को प्राणों की आहुति दी।
- टिहरी रियासत का विलय: लंबे जन-आंदोलन और नागेन्द्र सकलानी जैसे वीरों के बलिदान के बाद, 1 अगस्त 1949 को टिहरी रियासत का भारत संघ में विलय हुआ।
- निष्कर्ष: उत्तराखंड के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल ब्रिटिश मुक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह यहाँ के निवासियों के स्वाभिमान, पर्यावरण चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत का भी प्रतीक है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. डांडी मार्च (1930) और नमक सत्याग्रह में उत्तराखंड की भागीदारी के संदर्भ में क्या सही है?
- गांधी जी की डांडी यात्रा में उत्तराखंड के तीन सत्याग्रहियों—ज्योतिराम कांडपाल, भैरव दत्त जोशी और खड़ग बहादुर ने भाग लिया।
- कुमाऊँ में गोविंद बल्लभ पंत और गढ़वाल में प्रताप सिंह नेगी ने नमक कानून तोड़ने का सफल नेतृत्व किया।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई गई।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. उत्तराखंड के ‘बारदोली‘ कहे जाने वाले क्षेत्रों के बारे में कौन से तथ्य सत्य हैं?
- क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण गांधी जी ने अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र को ‘कुमाऊँ का बारदोली’ कहा।
- पौड़ी गढ़वाल के गुजडू क्षेत्र को लगान-बंदी आंदोलन के कारण ‘गढ़वाल का बारदोली’ कहा जाता है।
- सल्ट के खुमाड़ में 5 सितंबर 1942 को हुए गोलीकांड में गंगाराम और खीमादेव शहीद हुए थे।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. क्रांतिकारी गतिविधियों और संगठनों (HSRA) में उत्तराखंड के योगदान के विषय में क्या सही है?
- भवानी सिंह रावत चंद्रशेखर आजाद के साथी थे और 1929 के ‘वायसराय बम कांड’ में सक्रिय थे।
- इंद्र सिंह गढ़वाली ने 1933 के मद्रास बम कांड और बच्चूलाल भट्ट ने ऊंटी बैंक डकैती में भाग लिया।
- इन सेनानियों ने क्रांतिकारी राष्ट्रवाद को पर्वतीय क्षेत्रों में धार दी।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. ‘पेशावर कांड‘ (1930) और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के संदर्भ में कौन से विकल्प सही हैं?
- चंद्र सिंह गढ़वाली ने पेशावर में निहत्थे अफगान पठानों पर गोली चलाने के ब्रिटिश आदेश को मानने से इनकार कर दिया।
- इस ऐतिहासिक घटना के बाद मोतीलाल नेहरू ने पूरे देश में ‘गढ़वाल दिवस’ मनाने की घोषणा की।
- वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को उनकी वीरता के कारण ‘अशोक का उत्तराधिकारी’ भी कहा जाता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. व्यक्तिगत सत्याग्रह और गांधीवादी विचारधारा के प्रसार के बारे में क्या सत्य है?
- उत्तराखंड के पहले व्यक्तिगत सत्याग्रही जगमोहन सिंह नेगी थे।
- महिलाओं में भागीरथी देवी ने सर्वप्रथम स्वयं को सत्याग्रही घोषित किया।
- 1937 में अल्मोड़ा के चनौदा में स्थापित गांधी आश्रम खादी प्रचार और सेनानियों का प्रमुख केंद्र था।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और महत्वपूर्ण बलिदानों के बारे में कौन सी जानकारी सही है?
- देघाट में हुए संघर्ष के दौरान हरिकृष्ण और हीरामणि शहीद हुए।
- सालम के राम सिंह आजाद को उनकी वीरता के लिए ‘सालम का शेर’ कहा गया।
- सालम और देघाट की घटनाओं ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध जन-आक्रोश को चरम पर पहुँचाया।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7. आजाद हिन्द फौज (INA) में उत्तराखंड के योगदान के संदर्भ में क्या सही है?
- नेताजी की फौज में लगभग 12% सैनिक (2500) उत्तराखंड से थे।
- कर्नल पी.सी. रतूड़ी और मेजर देव सिंह दानू जैसे वीरों ने INA में उच्च पदों पर सेवा दी।
- वीर केसरी चंद को इम्फाल मोर्चे पर अदम्य साहस दिखाने के लिए 3 मई 1945 को फांसी दी गई।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं और विदेशी शिष्याओं के योगदान के बारे में क्या सत्य है?
- बिशनी देवी शाह ने नमक सत्याग्रह के दौरान अल्मोड़ा नगर पालिका पर तिरंगा फहराया।
- सरला बहन ने कौसानी में ‘लक्ष्मी आश्रम’ और मीरा बहन ने ऋषिकेश में ‘पशुलोक’ की स्थापना की।
- कुंती वर्मा जैसी महिलाओं ने ‘जिंदा या मुर्दा’ पकड़ने के आदेशों के बावजूद आंदोलन जारी रखा।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. टिहरी रियासत के संघर्ष और राजशाही के विरुद्ध आंदोलनों के विषय में क्या सही है?
- 1930 के ‘तिलाड़ी कांड’ को ‘टिहरी का जलियांवाला बाग’ कहा जाता है।
- श्रीदेव सुमन ने जेल की अमानवीय यातनाओं के विरुद्ध 84 दिनों की भूख हड़ताल कर शहादत दी।
- नागेन्द्र सकलानी जैसे वीरों के बलिदान के बाद 1 अगस्त 1949 को टिहरी रियासत का भारत में विलय हुआ।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10. उत्तराखंड के स्वतंत्रता संग्राम के समग्र प्रभाव और ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में क्या सही है?
- यह इतिहास केवल ब्रिटिश मुक्ति नहीं, बल्कि स्वाभिमान और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत का प्रतीक है।
- 1930 में दुगड्डा में गढ़वाल का प्रथम राजनीतिक सम्मेलन आयोजित हुआ था।
- झंडा सत्याग्रह के दौरान नंदादेवी (अल्मोड़ा) और जहरीखाल (पौड़ी) में तिरंगा फहराया गया।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी