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उत्तराखंड का मध्यकालीन इतिहास

उत्तराखंड का मध्यकालीन इतिहास कार्तिकेयपुर (कत्यूरी), चंद और पंवार राजवंशों के उत्थान और पतन की एक रोमांचक गाथा है, जिसका समापन गोरखा शासन और ब्रिटिश आगमन के साथ होता है।

  1. कार्तिकेयपुर राजवंश (700-1050 ई.): इसे उत्तराखंड का प्रथम ऐतिहासिक राजवंश माना जाता है। इसकी स्थापना बसन्तदेव ने की थी और इसकी प्रारंभिक राजधानी जोशीमठ के समीप कार्तिकेयपुर में थी।
  2. सांस्कृतिक स्वर्णकाल: कत्यूरी काल को स्थापत्य और मूर्तिकला की दृष्टि से उत्तराखंड का स्वर्णकाल कहा जाता है। इन्होंने जागेश्वर और बैजनाथ जैसे भव्य मंदिरों का निर्माण कराया।
  3. शंकराचार्य का आगमन: कार्तिकेयपुर राजवंश के समय ही आदिगुरु शंकराचार्य उत्तराखंड आए थे। उन्होंने बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों का पुनरुद्धार किया और 820 ई. में केदारनाथ में देह त्याग दी।
  4. कत्यूरी प्रशासन: इस काल में प्रशासन अत्यंत व्यवस्थित था। प्रमवातार (भूमि मापA. और दोषापराधिक (अपराध पकड़ने वाला) जैसे अधिकारी नियुक्त थे। राजभाषा संस्कृत और लोकभाषा पाली थी।
  5. चंद राजवंश (कुमाऊँ): कत्यूरियों के पतन के बाद कुमाऊँ में चंद वंश का उदय हुआ। इसके संस्थापक सोमचंद थे, जिन्होंने चंपावत में ‘राजबुंगा किला’ बनवाया और शासन की नींव रखी।
  6. गरुड़ ज्ञानचंद: दिल्ली दरबार जाने वाले यह पहले चंद शासक थे। सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने उन्हें गरुड़ की उपाधि दी थी।
  7. रेशम व्यापार: चंद शासक इंद्रचंद ने नेपाल के मार्ग से चीन के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित किए और कुमाऊँ में रेशम उत्पादन व वस्त्र उद्योग की शुरुआत की।
  8. अल्मोड़ा का विकास: राजा कल्याण चंद और रुद्रचंद के समय अल्मोड़ा चंद वंश की मुख्य राजधानी बना। रुद्रचंद ने यहाँ मल्ला महल बनवाया और तराई में रुद्रपुर नगर की स्थापना की।
  9. चंद काल का स्वर्ण युग: जगतचंद (1708-1720 ई.) के शासनकाल को कुमाऊँ का स्वर्ण काल माना जाता है। उनके समय में प्रजा समृद्ध थी और उन्होंने अनेक जनकल्याणकारी कार्य किए।
  10. पंवार/परमार राजवंश (गढ़वाल): गढ़वाल के 52 गढ़ों को जीतकर अजयपाल ने परमार वंश को सुदृढ़ किया। उन्हें गढ़वाल का ‘अशोक’ और ‘बिस्मार्क’ भी कहा जाता है।
  11. गढ़वाल की राजधानी: अजयपाल ने राजधानी को चाँदपुर गढ़ से देवलगढ़ और फिर 1517 ई. में श्रीनगर स्थानांतरित किया, जो सदियों तक गढ़वाल का केंद्र रहा।
  12. शाह की उपाधि: बलभद्र शाह पहले परमार शासक थे जिन्होंने अपने नाम के आगे ‘शाह’ की उपाधि धारण की, जो मुगल दरबार के प्रभाव को दर्शाता है।
  13. रानी कर्णावती (नाक कटनी रानी): महिपति शाह की पत्नी रानी कर्णावती ने 1635 ई. में शाहजहाँ के सेनापति नवाजत खाँ के सैनिकों के नाक कटवा दिए थे, जिससे वे इतिहास में नाक कटनी रानी के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
  14. गढ़वाल का नवरत्न: फतेह शाह के दरबार में ‘नवरत्न’ रहते थे। उन्हें गढ़वाल का शिवाजी कहा जाता है। उन्होंने गुरु रामराय को देहरादून में गुरुद्वारा बनाने हेतु भूमि प्रदान की थी।
  15. प्रद्युम्न शाह: ये उत्तराखंड के एकमात्र ऐसे शासक थे जिन्होंने गढ़वाल और कुमाऊँ दोनों की गद्दी पर शासन किया। 1804 ई. में खुड़बुड़ा के युद्ध में वे गोरखाओं के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
  16. गोरखा आक्रमण (1790-1815 ई.): गोरखाओं ने 1790 में कुमाऊँ और 1804 में गढ़वाल पर पूर्ण अधिकार कर लिया। उनके कठोर शासन को स्थानीय लोकगाथाओं में गोरख्याली कहा जाता है।
  17. कठोर न्याय प्रणाली: गोरखा शासन में ‘दिव्य परीक्षा’ (अग्नि परीक्षा) के माध्यम से न्याय किया जाता था, जिसमें गोला दीप और कढ़ाई दीप जैसी कठोर प्रथाएँ शामिल थीं।
  18. आंग्ल-नेपाल युद्ध: गोरखाओं के विस्तारवादी रवैये के कारण 1814 में ब्रिटिश सेना और गोरखाओं के बीच युद्ध हुआ। नालापानी (देहरादून) का युद्ध इसमें ऐतिहासिक महत्व रखता है।
  19. सुगौली की संधि (1815-16 ई.): इस संधि के साथ उत्तराखंड में गोरखा शासन का अंत हुआ। गढ़वाल का एक हिस्सा टिहरी रियासत के रूप में राजा सुदर्शन शाह को मिला और शेष ब्रिटिश भारत का हिस्सा बना।
  20. निष्कर्ष: मध्यकाल में उत्तराखंड ने जहाँ एक ओर अजयपाल और जगतचंद जैसे प्रतापी राजा देखे, वहीं गोरखाओं के अत्याचार भी सहे। इसी काल ने राज्य की वर्तमान प्रशासनिक सीमाओं और सांस्कृतिक धरोहरों का निर्माण किया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1. कार्तिकेयपुर (कत्यूरी) राजवंश के संदर्भ में कौन से तथ्य सही हैं?

  1. इसे उत्तराखंड का प्रथम ऐतिहासिक राजवंश माना जाता है, जिसकी स्थापना बसन्तदेव ने की थी।
  2. इस काल में स्थापत्य कला का विकास हुआ और जागेश्वर व बैजनाथ जैसे भव्य मंदिर बने।
  3. आदिगुरु शंकराचार्य ने इसी काल में उत्तराखंड आकर बद्रीनाथ व केदारनाथ का पुनरुद्धार किया।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 2. कत्यूरी प्रशासन और शब्दावली के विषय में क्या सत्य है?

  1. भूमि मापने वाले अधिकारी को ‘प्रमवातार’ कहा जाता था।
  2. अपराध पकड़ने वाले अधिकारी को ‘दोषापराधिक’ के नाम से जाना जाता था।
  3. इस काल की राजभाषा संस्कृत और लोकभाषा पाली थी।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 3. कुमाऊँ के चंद राजवंश की स्थापना और प्रारंभिक शासकों के बारे में क्या सही है?

  1. सोमचंद ने चंपावत में ‘राजबुंगा किला’ बनवाकर चंद वंश की नींव रखी थी।
  2. गरुड़ ज्ञानचंद पहले शासक थे जिन्हें फिरोजशाह तुगलक ने ‘गरुड़’ की उपाधि दी थी।
  3. राजा इंद्रचंद ने चीन के साथ रेशम व्यापार के संबंध स्थापित किए थे।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 4. चंद काल के विकास और स्वर्ण युगके संदर्भ में कौन से विकल्प सही हैं?

  1. राजा रुद्रचंद ने अल्मोड़ा में मल्ला महल बनवाया और तराई में रुद्रपुर नगर बसाया।
  2. राजा जगतचंद (1708-1720 ई.) के शासनकाल को कुमाऊँ का स्वर्ण काल कहा जाता है।
  3. अल्मोड़ा चंद शासकों की मुख्य राजधानी बना।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 5. पंवार (परमार) राजवंश के शासक अजयपाल के संबंध में क्या सत्य है?

  1. उन्होंने गढ़वाल के 52 गढ़ों को जीतकर एक सुदृढ़ साम्राज्य की स्थापना की।
  2. उन्हें गढ़वाल का ‘अशोक’ और ‘बिस्मार्क’ भी कहा जाता है।
  3. उन्होंने राजधानी को चाँदपुर गढ़ से श्रीनगर (1517 ई.) स्थानांतरित किया था।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 6. गढ़वाल के अन्य प्रमुख पंवार शासकों और उनकी उपलब्धियों के बारे में क्या सही है?

  1. बलभद्र शाह पहले शासक थे जिन्होंने अपने नाम के आगे ‘शाह’ की उपाधि धारण की।
  2. फतेह शाह के दरबार में नवरत्न रहते थे और उन्हें गढ़वाल का शिवाजी कहा जाता है।
  3. प्रद्युम्न शाह गढ़वाल और कुमाऊँ दोनों की गद्दी पर शासन करने वाले एकमात्र राजा थे।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 7. ‘नाक कटनी रानीके रूप में प्रसिद्ध रानी कर्णावती के बारे में कौन से तथ्य सही हैं?

  1. वे गढ़वाल शासक महिपति शाह की पत्नी थीं।
  2. उन्होंने 1635 ई. में मुगल सेनापति नवाजत खाँ के सैनिकों के नाक कटवा दिए थे।
  3. उनका यह साहस मुगल आक्रमणकारियों के विरुद्ध प्रतिरोध का प्रतीक बना।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 8. उत्तराखंड में गोरखा शासन (1790-1815 ई.) की विशेषताओं के संदर्भ में क्या सत्य है?

  1. उनके कठोर शासन को स्थानीय लोकगाथाओं में ‘गोरख्याली’ कहा जाता है।
  2. न्याय के लिए ‘दिव्य परीक्षा’ (जैसे गोला दीप और कढ़ाई दीप) का प्रयोग होता था।
  3. 1790 में कुमाऊँ और 1804 (खुड़बुड़ा युद्ध) के बाद गढ़वाल पर उनका पूर्ण अधिकार हुआ।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 9. आंग्ल-नेपाल युद्ध और सुगौली की संधि के बारे में क्या सही है?

  1. 1814 में नालापानी (देहरादून) का ऐतिहासिक युद्ध ब्रिटिश और गोरखाओं के बीच हुआ।
  2. 1815-16 की सुगौली की संधि द्वारा उत्तराखंड में गोरखा शासन का अंत हुआ।
  3. संधि के बाद सुदर्शन शाह को टिहरी रियासत मिली और शेष भाग ब्रिटिश भारत का हिस्सा बना।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

प्रश्न 10. उत्तराखंड के मध्यकालीन इतिहास के समग्र प्रभाव के बारे में कौन से तथ्य सही हैं?

  1. इसी काल में राज्य की वर्तमान प्रशासनिक सीमाओं का आधार तैयार हुआ।
  2. यह काल पराक्रम (अजयपाल/जगतचंद) और बाहरी संघर्ष (गोरखा/मुगल) दोनों का गवाह रहा।
  3. कत्यूरी, चंद और पंवार वंशों ने राज्य की सांस्कृतिक और मंदिर धरोहरों का निर्माण किया।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

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