उत्तराखंड की प्रशासनिक इकाइयाँ
- द्वि-स्तरीय मंडल संरचना: प्रशासनिक सुगमता के लिए उत्तराखंड को दो मुख्य मंडलों (Divisions) में विभाजित किया गया है: गढ़वाल मंडल और कुमाऊं मंडल।
- मंडलीय मुख्यालय: गढ़वाल मंडल का मुख्यालय पौड़ी में स्थित है, जबकि कुमाऊं मंडल का प्रशासनिक केंद्र नैनीताल है।
- कुल जनपदीय संख्या: राज्य में वर्तमान में कुल 13 जिले हैं। गढ़वाल मंडल के अंतर्गत 7 जिले आते हैं, जबकि कुमाऊं मंडल में 6 जिले सम्मिलित हैं।
- गढ़वाल के प्रमुख जिले: इस मंडल में देहरादून (राजधानी), हरिद्वार (धार्मिक केंद्र), पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण जनपद शामिल हैं।
- कुमाऊं के प्रमुख जिले: इसमें नैनीताल, अल्मोड़ा (सांस्कृतिक राजधानी), पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत और ऊधम सिंह नगर (मैदानी औद्योगिक क्षेत्र) शामिल हैं।
- क्षेत्रफल की दृष्टि से विशेषता: चंपावत को उत्तराखंड का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा जिला माना जाता है, जबकि चमोली और उत्तरकाशी सबसे बड़े पहाड़ी जिलों में शुमार हैं।
- तहसील और उप-जिले: प्रशासनिक विकेंद्रीकरण के लिए राज्य में लगभग 110 तहसीलें हैं, जो जमीनी स्तर पर राजस्व और कानून व्यवस्था का प्रबंधन करती हैं।
- विकास खंड (ब्लॉक): ग्रामीण विकास की योजनाओं को लागू करने के लिए राज्य में कुल 95 विकास खंड क्रियाशील हैं।
- ग्राम पंचायतें: ग्रामीण प्रशासन की सबसे बुनियादी इकाई ग्राम पंचायतें हैं, जिनकी संख्या लगभग 7,791 है, जो स्थानीय विकास के लिए उत्तरदायी हैं।
- दोहरी राजधानी प्रणाली: उत्तराखंड में दो राजधानियाँ हैं। देहरादून को शीतकालीन व कार्यकारी राजधानी, जबकि गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को 4 मार्च, 2020 को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया।
- विधायी संरचना: राज्य में एकसदनीय (Unicameral) विधानमंडल है। यहाँ केवल विधानसभा है, विधान परिषद का प्रावधान नहीं है।
- विधानसभा सीटें: उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 निर्वाचित सदस्य होते हैं। पूर्व में एक एंग्लो-इंडियन सदस्य के मनोनयन का प्रावधान था, जो अब प्रभावी नहीं है।
- उच्च न्यायालय: राज्य का सर्वोच्च न्यायिक निकाय उत्तराखंड उच्च न्यायालय है, जो नैनीताल में स्थित है। इसकी स्थापना राज्य गठन के साथ ही 9 नवंबर, 2000 को हुई थी।
- त्रिस्तरीय पंचायती राज: 73वें संविधान संशोधन के तहत राज्य में ग्रामीण स्वशासन के लिए तीन स्तर हैं: ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर), क्षेत्र पंचायत (ब्लॉक स्तर) और जिला पंचायत (जिला स्तर)।
- शहरी स्थानीय निकाय: 74वें संविधान संशोधन के आधार पर शहरों को नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में उनकी जनसंख्या के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।
- नगर निगमों की स्थिति: राज्य में वर्तमान में 11 नगर निगम हैं, जो बड़े शहरी क्षेत्रों जैसे देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार और ऋषिकेश आदि का प्रबंधन करते हैं।
- नगर पालिका और पंचायतें: मध्यम और संक्रमणकालीन क्षेत्रों के लिए राज्य में क्रमशः 49 नगर पालिका परिषदें और 47 नगर पंचायतें कार्यरत हैं।
- छावनी बोर्ड (Cantonment Boards): सैन्य क्षेत्रों के प्रशासनिक कार्यों के लिए राज्य में लंढौर, नैनीताल, रानीखेत और देहरादून जैसे स्थानों पर विशेष छावनी बोर्ड गठित हैं।
- प्रशासनिक उद्देश्य: इस बहुस्तरीय ढांचे का मुख्य लक्ष्य उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों और मैदानी जिलों के बीच विकास की खाई को पाटना और सुशासन सुनिश्चित करना है।
- निष्कर्ष: उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था विकेंद्रीकरण के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ राज्य मुख्यालय से लेकर ग्राम सभा तक शक्तियों का स्पष्ट विभाजन है, जो पीसीएस जैसी परीक्षाओं के लिए एक अनिवार्य विषय है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. उत्तराखंड की मंडलीय प्रशासनिक संरचना के विषय में कौन से तथ्य सही हैं?
- राज्य को दो मुख्य मंडलों—गढ़वाल और कुमाऊं में विभाजित किया गया है।
- गढ़वाल मंडल का मुख्यालय पौड़ी में स्थित है।
- कुमाऊं मंडल का प्रशासनिक केंद्र नैनीताल है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. राज्य के जनपदों के विभाजन और उनकी संख्या के संदर्भ में क्या सत्य है?
- उत्तराखंड में वर्तमान में कुल 13 जिले हैं।
- गढ़वाल मंडल के अंतर्गत कुल 7 जनपद आते हैं।
- कुमाऊं मंडल में कुल 6 जिले सम्मिलित हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. गढ़वाल मंडल के प्रमुख जिलों और उनकी विशेषताओं के बारे में क्या सही है?
- देहरादून राज्य की राजधानी और प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है।
- हरिद्वार राज्य का प्रमुख धार्मिक और मैदानी केंद्र है।
- उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग इस मंडल के महत्वपूर्ण पहाड़ी जिले हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. कुमाऊं मंडल की जनपदीय संरचना के संबंध में कौन से विकल्प सही हैं?
- अल्मोड़ा को राज्य की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता है।
- ऊधम सिंह नगर एक प्रमुख मैदानी औद्योगिक जनपद है।
- नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत इस मंडल के हिस्से हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की इकाइयों (तहसील और ब्लॉA. के बारे में क्या सत्य है?
- राज्य में जमीनी स्तर पर राजस्व प्रबंधन के लिए लगभग 110 तहसीलें हैं।
- ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु राज्य में 95 विकास खंड (ब्लॉA. हैं।
- चंपावत क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य का सबसे छोटा जिला है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. उत्तराखंड की राजधानी व्यवस्था और विधायी स्वरूप के बारे में क्या सही है?
- देहरादून राज्य की शीतकालीन व कार्यकारी राजधानी है।
- गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को 4 मार्च, 2020 को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया।
- राज्य में एकसदनीय (Unicameral) विधानमंडल है, जहाँ केवल विधानसभा है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7. उत्तराखंड विधानसभा और उच्च न्यायालय के संदर्भ में कौन से तथ्य सत्य हैं?
- विधानसभा में कुल 70 निर्वाचित सदस्य होते हैं।
- उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल में स्थित है।
- उच्च न्यायालय की स्थापना राज्य गठन के साथ 9 नवंबर, 2000 को हुई थी।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. राज्य में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत कौन से स्तर शामिल हैं?
- ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायतें (लगभग 7,791)।
- ब्लॉक स्तर पर क्षेत्र पंचायतें।
- जिला स्तर पर जिला पंचायतें।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. उत्तराखंड के शहरी स्थानीय निकायों और उनके वर्गीकरण के बारे में क्या सही है?
- बड़े शहरी क्षेत्रों के प्रबंधन के लिए राज्य में वर्तमान में 11 नगर निगम हैं।
- मध्यम क्षेत्रों के लिए 49 नगर पालिका परिषदें कार्यरत हैं।
- संक्रमणकालीन क्षेत्रों के लिए राज्य में 47 नगर पंचायतें हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10. उत्तराखंड की विशेष प्रशासनिक इकाइयों और उद्देश्यों के बारे में क्या सत्य है?
- सैन्य क्षेत्रों के प्रशासन के लिए रानीखेत और देहरादून जैसे स्थानों पर छावनी बोर्ड गठित हैं।
- इस ढांचे का लक्ष्य दूरस्थ पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के बीच विकास की खाई को पाटना है।
- ग्रामीण प्रशासन की सबसे बुनियादी इकाई ग्राम पंचायत है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी