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भारत में संघ और राज्यों के बीच संबंध

प्रस्तावना:

भारतीय संविधान ने एक संघीय ढांचा प्रदान किया है, जिसमें सत्ता और दायित्वों का बंटवारा केंद्र और राज्यों के बीच किया गया है। किन्तु यह संघीय व्यवस्था विशुद्ध संघीय न होकर “संघीय प्रणाली के साथ एकात्मक झुकाव” वाली मानी जाती है। संविधान का उद्देश्य न तो केंद्र को पूर्णत: शक्तिशाली बनाना था और न ही राज्यों को पूर्ण स्वायत्तता देना, बल्कि दोनों के बीच ऐसा संतुलन स्थापित करना था, जिससे राष्ट्रीय एकता भी बनी रहे और राज्यों का स्वतंत्र अस्तित्व भी।

  1. विधायी संबंध
  • संविधान ने विधायी शक्तियों का बंटवारा सातवीं अनुसूची के अंतर्गत किया है।
  • संघ सूची (Union List): इसमें रक्षा, विदेश नीति, संचार, मुद्रा आदि विषय शामिल हैं। इन विषयों पर केवल संसद कानून बना सकती है।
  • राज्य सूची (State List): इसमें पुलिस, स्वास्थ्य, कृषि, स्थानीय शासन आदि विषय हैं, जिन पर राज्य विधानमंडल कानून बनाता है।
  • समवर्ती सूची (Concurrent List): इसमें शिक्षा, विवाह, वन, श्रम कल्याण जैसे विषय हैं, जिन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन टकराव की स्थिति में केंद्र का कानून प्रभावी होता है।
  • अवशिष्ट (Residuary) शक्तियाँ केंद्र के पास हैं, अर्थात ऐसे नए विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र को प्राप्त है।
  1. प्रशासनिक संबंध
  • सामान्यतः कानूनों को लागू करने का उत्तरदायित्व राज्यों पर होता है।
  • लेकिन केंद्र आवश्यक परिस्थितियों में राज्यों को दिशा-निर्देश दे सकता है।
  • चाहे तो केंद्र कुछ प्रशासनिक कार्य सीधे अपने हाथ में भी ले सकता है।
  • अंतर्राज्यीय विवादों का निपटारा केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।
  1. वित्तीय संबंध
  • प्रमुख कर जैसे आयकर, सीमा शुल्क, कंपनी कर, उत्पाद शुल्क आदि वसूलने का अधिकार केंद्र के पास है।
  • राज्यों को वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • वित्त आयोग (Finance Commission) केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे की सिफारिश करता है।
  • केंद्र से राज्यों को अनुदान और सहायता भी दी जाती है, जिससे वित्तीय निर्भरता और स्पष्ट होती है।
  1. आपातकालीन संबंध
  • संविधान ने आपातकालीन स्थितियों में केंद्र को व्यापक अधिकार दिए हैं।
  • राष्ट्रीय आपातकाल (अनु. 352) में राज्यों की विधायी शक्तियाँ केंद्र में निहित हो जाती हैं।
  • राज्य आपातकाल (अनु. 356) में संबंधित राज्य की कार्यपालिका और विधानमंडल की शक्तियाँ राज्यपाल और संसद को प्राप्त होती हैं।
  • वित्तीय आपातकाल (अनु. 360) में राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता समाप्त हो जाती है और केंद्र का नियंत्रण स्थापित हो जाता है।
  1. संघीयता और एकात्मक झुकाव
  • संविधान ने संघीय ढांचा अपनाते हुए भी केंद्र को अधिक अधिकार प्रदान किए हैं।
  • केंद्र की यही मजबूत स्थिति राष्ट्रीय एकता, राजनीतिक स्थिरता और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक समझी गई है।

निष्कर्ष:

भारत में संघ और राज्यों के संबंध सहयोग और नियंत्रण दोनों पर आधारित हैं। विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय क्षेत्रों में राज्यों को पर्याप्त स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन केंद्र को अधिक शक्तियाँ प्रदान करके देश की एकता और अखंडता सुनिश्चित की गई है। इस प्रकार भारतीय संविधान ने संघीय ढांचे में एकात्मक प्रवृत्ति को बनाए रखते हुए राज्यों और केंद्र के बीच संतुलित संबंध स्थापित किए हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर (MCQs)

प्रश्न 1: भारत में विधायी शक्तियों का बंटवारा किसके अंतर्गत किया गया है?
(a) पाँचवीं अनुसूची
(b) सातवीं अनुसूची
(c) तीसरी अनुसूची
(d) दसवीं अनुसूची

उत्तर: (b) सातवीं अनुसूची
व्याख्या: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में विधायी शक्तियों का बंटवारा तीन सूचियों – संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची – में किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि कौन-से विषयों पर केंद्र कानून बनाएगा और कौन-से राज्य के अधिकार क्षेत्र में होंगे। यह भारतीय संघीय ढांचे की मूल विशेषता है, जहाँ केंद्र और राज्यों के अधिकार क्षेत्र स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं।

प्रश्न 2: यदि समवर्ती सूची में बने राज्य और केंद्र के कानूनों में टकराव हो तो कौन सा कानून मान्य होगा?
(a) राज्य का कानून
(b) केंद्र का कानून
(c) दोनों कानून समान रूप से लागू होंगे
(d) राष्ट्रपति का आदेश

उत्तर: (b) केंद्र का कानून
व्याख्या: समवर्ती सूची में शिक्षा, वन, विवाह आदि विषय आते हैं जिन पर दोनों ही कानून बना सकते हैं। लेकिन यदि केंद्र और राज्य द्वारा बनाए गए कानूनों में टकराव हो तो संविधान के अनुसार केंद्र का कानून प्रभावी होता है। यह व्यवस्था भारत के संघीय ढांचे में एकात्मक प्रवृत्ति को दर्शाती है, जिससे राष्ट्रीय एकता बनी रहती है।

प्रश्न 3: वित्तीय संबंधों में राज्यों को अधिकतर क्यों केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है?
(a) राज्यपाल के पास वित्तीय अधिकार हैं
(b) प्रमुख कर संग्रहण का अधिकार केवल केंद्र के पास है
(c) राज्य अपनी मदद खुद कर लेते हैं
(d) केंद्र करों में हिस्सा नहीं देता

उत्तर: (b) प्रमुख कर संग्रहण का अधिकार केवल केंद्र के पास है
व्याख्या: आयकर, कंपनी कर, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क जैसे प्रमुख करों का संग्रहण केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आता है। राज्यों को केंद्र से अनुदान, हिस्सेदारी और वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर संसाधन मिलते हैं। यही कारण है कि राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता सीमित है और उन्हें वित्तीय स्थिरता के लिए केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है।

प्रश्न 4: संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्य आपातकाल (राष्ट्रपति शासन) से संबंधित है?
(a) अनुच्छेद 352
(b) अनुच्छेद 356
(c) अनुच्छेद 360
(d) अनुच्छेद 370

उत्तर: (b) अनुच्छेद 356
व्याख्या: अनुच्छेद 356 के तहत यदि किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार काम करने में विफल हो जाती है, तो वहाँ राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है। इस स्थिति में राज्य की कार्यपालिका और विधायिका की शक्तियाँ केंद्र व राज्यपाल के अधीन आ जाती हैं। यह प्रावधान प्रशासनिक संकट और अस्थिरता की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है।

प्रश्न 5: भारत की संघीय व्यवस्था को किस रूप में समझा जाता है?
(a) शुद्ध संघीय
(b) शुद्ध एकात्मक
(c) संघीय व्यवस्था के साथ एकात्मक झुकाव वाली
(d) विकेन्द्रित पूर्ण राज्य व्यवस्था

उत्तर: (c) संघीय व्यवस्था के साथ एकात्मक झुकाव वाली
व्याख्या: भारत संघीय ढांचे पर आधारित है जहाँ केंद्र और राज्यों के अधिकार स्पष्ट रूप से विभाजित हैं। लेकिन संविधान ने केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाया है, जैसे अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना, आपातकालीन परिस्थितियों में राज्यों की शक्तियों का केंद्र में विलय आदि। इसलिए भारतीय व्यवस्था को “संघीय प्रणाली के साथ एकात्मक झुकाव” वाली कहा जाता है।

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