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भारतीय संसद में विधायी प्रक्रिया

प्रस्तावना:

भारतीय लोकतंत्र में संसद सर्वोच्च विधायी संस्था है। कानून निर्माण का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि उसी पर शासन और प्रशासन की दिशा निर्भर करती है। संसद में विधेयकों को एक संगठित और क्रमबद्ध प्रक्रिया से पारित किया जाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि प्रस्तावित कानून पर विस्तृत विचार-विमर्श और संशोधन के अवसर मिलें, जिससे कानून अधिक परिपक्व और प्रभावी बने।

  1. विधेयक की प्रस्तुति (प्रथम पाठ)
  • किसी भी विधेयक को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है, किंतु धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत होता है।
  • पहली बार प्रस्तुत होने को प्रथम पाठ कहा जाता है। इस चरण में केवल विधेयक का शीर्षक और उद्देश्य पढ़ा जाता है, कोई विस्तृत बहस नहीं होती।
  1. समिति चरण (Committee Stage)
  • विधेयक को विस्तृत परीक्षण और विचार हेतु चयनित समिति या स्थायी समिति को भेजा जाता है।
  • समिति विधेयक की प्रत्येक धारा का गहन अध्ययन करती है, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों की राय लेती है, और आवश्यक सुधारों का सुझाव देती है।
  • समिति की रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत की जाती है।
  1. द्वितीय पाठ (Second Reading)
  • इस चरण में विधेयक पर गहन विचार-विमर्श होता है।
  • पहले हिस्से में सिद्धांत और उद्देश्य पर बहस होती है, जबकि दूसरे हिस्से में प्रत्येक धारा और उपबंध पर अलग-अलग चर्चा और संशोधन किए जाते हैं।
  • यह चरण विधायी प्रक्रिया का सबसे विस्तृत और महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  1. तृतीय पाठ (Third Reading)
  • इस चरण में केवल विधेयक के अंतिम रूप पर चर्चा होती है।
  • अब बहस बहुत सीमित होती है और मुख्य रूप से विधेयक के समर्थन या विरोध पर केंद्रित रहती है।
  • अंत में साधारण बहुमत से मतदान कर विधेयक पारित किया जाता है।
  1. दूसरे सदन में प्रेषण
  • एक सदन से पारित होने के बाद विधेयक दूसरे सदन में भेजा जाता है।
  • दूसरा सदन इसे स्वीकार कर सकता है, संशोधन प्रस्तावित कर सकता है या अस्वीकार कर सकता है।
  • असहमति की स्थिति में विधेयक को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में विचार हेतु प्रस्तुत किया जाता है।
  • धन विधेयक के मामले में राज्यसभा केवल सुझाव दे सकती है, अंतिम निर्णय लोकसभा का होता है।
  1. राष्ट्रपति की स्वीकृति
  • दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति को भेजा जाता है।
  • राष्ट्रपति की स्वीकृति (Assent) के पश्चात ही विधेयक को कानून का रूप प्राप्त होता है।
  • राष्ट्रपति साधारण विधेयकों पर एक बार पुनर्विचार के लिए सदनों को लौटा सकते हैं, किंतु इसे दोबारा पारित किए जाने पर उन्हें स्वीकृति देनी अनिवार्य होती है।

निष्कर्ष:

भारतीय संसद में विधायी प्रक्रिया बहुस्तरीय और लोकतांत्रिक है। यह सुनिश्चित करती है कि प्रस्तावित विधेयक पर अनेक स्तरों पर विचार-विमर्श और संशोधन हों। प्रथम पाठ से लेकर राष्ट्रपति की स्वीकृति तक की यह यात्रा लोकतंत्र की परिपक्वता और जनता की सहभागिता को प्रतिबिंबित करती है। यही कारण है कि हमारी संसद में बनने वाले कानून व्यापक बहस और अध्ययन के पश्चात स्वीकार किए जाते हैं, जिससे वे अधिक न्यायसंगत और प्रभावी बनते हैं।

भारतीय संसद में विधायी प्रक्रिया पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: धन विधेयक (Money Bill) कहाँ प्रस्तुत किया जा सकता है?
(a) केवल राज्यसभा
(b) लोकसभा या राज्यसभा दोनों में
(c) केवल लोकसभा
(d) राष्ट्रपति के पास सीधे

उत्तर: (c) केवल लोकसभा
व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुसार धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। राज्यसभा सिर्फ इसमें सुझाव दे सकती है, परन्तु निर्णय लेने का अधिकार केवल लोकसभा का होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोकसभा जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुनी जाती है और वित्तीय मामलों में जनता की राय सर्वोपरि मानी गई है।

प्रश्न 2: विधेयक को विस्तृत परीक्षण और सुधार के लिए किस चरण में भेजा जाता है?
(a) प्रथम पाठ
(b) समिति चरण
(c) द्वितीय पाठ
(d) तृतीय पाठ

उत्तर: (b) समिति चरण
व्याख्या: समिति चरण में विधेयक का गहन परीक्षण किया जाता है। समिति प्रत्येक धारा का अध्ययन करती है, विशेषज्ञों की राय लेती है और आवश्यक संशोधनों का सुझाव देती है। इस चरण का उद्देश्य विधेयक को अधिक परिपक्व और व्यावहारिक बनाना होता है, ताकि यह कार्यान्वयन के दृष्टिकोण से न्यायसंगत और प्रभावी कानून का रूप ले सके।

प्रश्न 3: विधायी प्रक्रिया का सबसे विस्तृत और महत्वपूर्ण चरण कौन-सा है?
(a) प्रथम पाठ
(b) समिति चरण
(c) द्वितीय पाठ
(d) तृतीय पाठ

उत्तर: (c) द्वितीय पाठ
व्याख्या: द्वितीय पाठ को विधायी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है क्योंकि इसमें विधेयक के सिद्धांतों, उद्देश्यों और प्रत्येक धारा पर गहन बहस होती है। संशोधनों पर विचार किया जाता है और सरकार विपक्ष दोनों को अपनी राय प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। इस चरण में ही विधेयक का वास्तविक रूप सामने आता है।

प्रश्न 4: विधेयक को कानून का रूप कब प्राप्त होता है?
(a) जब राज्यसभा इसे पारित कर दे
(b) जब लोकसभा इसे पारित कर दे
(c) जब संसद की संयुक्त बैठक हो
(d) जब राष्ट्रपति स्वीकृति दे दें

उत्तर: (d) जब राष्ट्रपति स्वीकृति दे दें
व्याख्या: संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति को भेजा जाता है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के पश्चात ही वह विधेयक कानून का रूप लेता है। हालाँकि साधारण विधेयक को राष्ट्रपति एक बार पुनर्विचार हेतु लौटा सकते हैं, परंतु यदि संसद दोबारा इसे पारित करती है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से स्वीकृति देनी ही पड़ती है।

प्रश्न 5: यदि दोनों सदनों के बीच किसी विधेयक पर असहमति हो तो क्या किया जाता है?
(a) राष्ट्रपति उसे रद्द कर देते हैं
(b) लोकसभा का निर्णय अंतिम होता है
(c) संयुक्त बैठक में निर्णय लिया जाता है
(d) राज्यसभा का निर्णय अंतिम होता है

उत्तर: (c) संयुक्त बैठक में निर्णय लिया जाता है
व्याख्या: यदि लोकसभा और राज्यसभा किसी साधारण विधेयक पर सहमत नहीं हो पाते तो उसकी स्थिति को हल करने के लिए राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकते हैं। इस बैठक में मतों के बहुमत से अंतिम निर्णय होता है। लेकिन ध्यान रहे, धन विधेयक पर राज्यसभा को केवल सुझाव देने का अधिकार है, और अंतिम शक्ति लोकसभा की होती है।

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