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भारत की संसद की संरचना और शक्तियाँ

प्रस्तावना:

भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक गणराज्य में संसद सर्वोच्च विधायी संस्था है। यह राष्ट्रीय नीतियों का निर्धारण, कानून निर्माण और जनप्रतिनिधित्व का प्रमुख मंच है। भारतीय संविधान ने संसद को द्विसदनीय (Bicameral) बनाया है, जिसमें राष्ट्रपति भी एक अंग माना जाता है। संसद की भूमिका केवल कानून निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्यपालिका पर नियंत्रण रखने और जनता की आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने का भी प्रमुख साधन है।

  1. संसद की संरचना
  • भारतीय संसद तीन अंगों से मिलकर बनी है—राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा।
  • लोकसभा (जनप्रतिनिधि सभा): इसमें जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं। वर्तमान समय में इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 552 है।
  • राज्यसभा (राज्यों की परिषद्): यह स्थायी सदन है, जिसे भंग नहीं किया जा सकता। इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 250 है।
  • राष्ट्रपति संसद का एक अभिन्न अंग है, क्योंकि किसी भी विधेयक को कानून का रूप देने के लिए उसकी स्वीकृति आवश्यक होती है।
  1. विधायी शक्तियाँ
  • संसद के पास संघ सूची (Union List) और समवर्ती सूची (Concurrent List) से संबंधित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है।
  • राज्यों की सहमति से या राष्ट्रीय हित में संसद को राज्य सूची पर भी कानून बनाने का अधिकार प्राप्त हो सकता है।
  • आपातकाल की स्थिति में पूरे देश पर कानून लागू करने का विशेषाधिकार भी संसद के पास होता है।
  1. वित्तीय शक्तियाँ
  • संसद केंद्र सरकार के बजट को पारित करती है तथा सरकारी आय-व्यय पर नियंत्रण रखती है।
  • धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है और इसके पारित होने के बिना सरकार एक भी रुपया खर्च नहीं कर सकती।
  • वित्तीय मामलों में संसद की स्वीकृति अनिवार्य है, इससे यह सरकार की वित्तीय नीतियों पर सर्वोच्च नियंत्रण रखती है।
  1. कार्यपालिका पर नियंत्रण
  • संसद प्रश्नकाल, शून्यकाल, चर्चा, बहस और अविश्वास प्रस्ताव जैसे साधनों के माध्यम से कार्यपालिका पर निगरानी रखती है।
  • अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर मंत्री परिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।
  • इस प्रकार संसद जनता के प्रति उत्तरदायी शासन सुनिश्चित करती है।
  1. न्यायिक शक्तियाँ
  • संसद राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया चला सकती है।
  • उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को पद से हटाने का अधिकार भी संसद के पास है।
  • इसके अतिरिक्त उपराष्ट्रपति को हटाने का कार्य भी संसद द्वारा किया जाता है।
  1. वाद-विवाद और प्रतिनिधित्व का मंच
  • संसद राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर चर्चा और वाद-विवाद का सबसे बड़ा मंच है।
  • लोकसभा और राज्यसभा में विभिन्न विचारधाराओं और राज्यों का प्रतिनिधित्व होता है, जिससे लोकतंत्र की वास्तविक भावना अभिव्यक्त होती है।

निष्कर्ष:

भारतीय संसद राष्ट्र का विधायी और नीतिगत केंद्र है। यह कानून बनाती है, वित्तीय मामलों पर नियंत्रण रखती है, कार्यपालिका का उत्तरदायित्व सुनिश्चित करती है और न्यायिक शक्तियों का प्रयोग करती है। साथ ही यह जनता की आवाज़ बनकर राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को मजबूत करती है। इसलिए संसद को भारतीय लोकतंत्र का मेरुदंड (Backbone) कहा जाता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर (MCQs)

भारतीय संसद पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: भारतीय संसद के तीन अंग कौन-से हैं?
(a) लोकसभा, राज्यसभा और प्रधानमंत्री
(b) लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति
(c) लोकसभा, राज्यसभा और सर्वोच्च न्यायालय
(d) लोकसभा, राज्यसभा और उपराष्ट्रपति

उत्तर: (b) लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति
व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुसार संसद तीन अंगों से मिलकर बनी है—राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा। लोकसभा जनता द्वारा चुनी जाती है, राज्यसभा स्थायी सदन है तथा राष्ट्रपति की स्वीकृति बिना कोई विधेयक कानून का रूप नहीं ले सकता। इसलिए राष्ट्रपति को भी संसद का अभिन्न अंग माना गया है। यह विशेषता भारतीय संसद की संरचना को अद्वितीय बनाती है।

प्रश्न 2: धन विधेयक (Money Bill) केवल कहाँ प्रस्तुत किया जा सकता है?
(a) राज्यसभा में
(b) राष्ट्रपति के पास
(c) लोकसभा में
(d) उच्चतम न्यायालय में

उत्तर: (c) लोकसभा में
व्याख्या: संविधान के अनुसार धन विधेयक हमेशा लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है क्योंकि लोकसभा प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा चुनी जाती है और वित्तीय मामलों में जनता की राय सर्वोच्च मानी जाती है। राज्यसभा इस विधेयक पर केवल सुझाव दे सकती है, किंतु अंतिम निर्णय लोकसभा का होता है। इससे लोकसभा का वित्तीय मामलों में विशेष महत्व सिद्ध होता है।

प्रश्न 3: राज्यसभा को किस नाम से जाना जाता है और उसकी अधिकतम सदस्य संख्या कितनी है?
(a) जनप्रतिनिधि सभा, 552
(b) राज्यों की परिषद्, 250
(c) ऊपरी सदन, 300
(d) विधानमंडल सदन, 200

उत्तर: (b) राज्यों की परिषद्, 250
व्याख्या: राज्यसभा को “राज्यों की परिषद्” कहा जाता है। यह भारतीय संसद का स्थायी सदन है और इसे भंग नहीं किया जा सकता। राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व होता है। इसकी स्थायी प्रकृति संसद को निरंतरता और स्थिरता प्रदान करती है।

प्रश्न 4: संसद कार्यपालिका पर कैसे नियंत्रण रखती है?
(a) राष्ट्रपति की नियुक्ति द्वारा
(b) न्यायिक पुनरीक्षण द्वारा
(c) प्रश्नकाल, शून्यकाल और अविश्वास प्रस्ताव द्वारा
(d) अध्यादेश जारी करके

उत्तर: (c) प्रश्नकाल, शून्यकाल और अविश्वास प्रस्ताव द्वारा
व्याख्या: संसद लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यपालिका को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाए रखती है। इसके लिए प्रश्नकाल, शून्यकाल, चर्चाएँ और विशेषकर अविश्वास प्रस्ताव जैसे संसदीय उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है। यह संसद द्वारा कार्यपालिका पर स्थापित किया गया प्रभावी नियंत्रण है।

प्रश्न 5: भारतीय संसद को लोकतंत्र का मेरुदंड (Backbone) क्यों कहा जाता है?
(a) क्योंकि यह न्यायपालिका की निगरानी करती है
(b) क्योंकि यह केवल वित्तीय मामलों को देखती है
(c) क्योंकि यह कानून बनाती है, कार्यपालिका को नियंत्रित करती है और जनता की आवाज़ बनती है
(d) क्योंकि इसमें राष्ट्रपति शामिल होता है

उत्तर: (c) क्योंकि यह कानून बनाती है, कार्यपालिका को नियंत्रित करती है और जनता की आवाज़ बनती है
व्याख्या: संसद भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। यह कानून निर्माण करती है, वित्तीय नियंत्रण रखती है, कार्यपालिका को जवाबदेह बनाती है और न्यायिक शक्तियों का भी प्रयोग करती है। साथ ही यह जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है और राष्ट्रीय विमर्श का प्रमुख मंच है। इस बहुआयामी भूमिका के कारण संसद को लोकतंत्र का मेरुदंड कहा जाता है।

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