प्रस्तावना:
भारतीय संविधान का भाग- IV राज्य के नीति निदेशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) से संबंधित है। ये तत्व संविधान की आत्मा माने जाते हैं क्योंकि इनका उद्देश्य भारत में एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है, जहाँ न्याय, समानता और गरिमा पर आधारित समाज का निर्माण हो। यद्यपि ये तत्व न्यायालय द्वारा लागू योग्य (non-justiciable) नहीं हैं, लेकिन वे शासन करने वाली सरकार को नीति निर्धारण में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
राज्य के नीति निदेशक तत्वों की प्रकृति और उद्देश्य
- कल्याणकारी राज्य की स्थापना
नीति निदेशक तत्व सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय पर बल देकर भारत को एक कल्याणकारी राज्य बनाने की दिशा में कार्य करते हैं। इनका मूल उद्देश्य समाज में असमानताओं को कम करना है। - सामाजिक-आर्थिक अधिकारों पर बल
इन प्रावधानों में नागरिकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, और पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक-आर्थिक अधिकार शामिल हैं। उदाहरण के लिए – नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार और समान जीवन स्तर की गारंटी। - सरकार के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत
नीति निदेशक तत्व सरकार के लिए दिशा-निर्देश का काम करते हैं। यद्यपि ये न्यायालय में लागू नहीं किए जा सकते, लेकिन शासन की नीतियों और कानूनों के निर्माण में ये नैतिक और राजनीतिक आधार प्रदान करते हैं।
समकालीन भारत में प्रासंगिकता
- सामाजिक और आर्थिक न्याय की प्राप्ति
आज के भारत में विकास और समानता का लक्ष्य नीति निदेशक तत्वों के अनुरूप ही है। रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), शिक्षा का अधिकार और सार्वजनिक वितरण प्रणाली इसी दिशा के उदाहरण हैं। - शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार
संविधान के अनुच्छेद 45 के अंतर्गत दी गई शिक्षा का प्रावधान आगे चलकर शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21A) के रूप में लागू हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हेतु विभिन्न राष्ट्रीय योजनाएँ भी नीति निदेशक तत्वों की प्रेरणा से संचालित हो रही हैं। - पर्यावरण संरक्षण
नीति निदेशक तत्वों ने पर्यावरण और वन्य जीवों की सुरक्षा पर बल दिया है। इसी के आधार पर पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कई कानून पारित किए गए हैं। - लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाना
मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं। अधिकार जहाँ नागरिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करते हैं, वहीं नीति निदेशक तत्व सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की ओर ले जाते हैं। - नैतिक और राजनैतिक महत्व
भले ही इनका उल्लंघन करने पर अदालत में मामला नहीं चलाया जा सकता, लेकिन जनता और संसद के समक्ष सरकार की जवाबदेही बनी रहती है। इस प्रकार, वे राजनीतिक दबाव और जनमत के द्वारा लागू किए जाते हैं।
निष्कर्ष:
राज्य के नीति निदेशक तत्व भारतीय संविधान की एक अनूठी विशेषता हैं। ये केवल कानूनी पक्ष तक सीमित नहीं, बल्कि जनजीवन की गुणवत्ता सुधारने तथा समानता, न्याय व गरिमा पर आधारित समाज बनाने की नींव रखते हैं। समकालीन भारत में मनरेगा, शिक्षा का अधिकार, पर्यावरण संरक्षण कानून जैसी योजनाएँ इन्हीं से प्रेरित हैं। अतः नीति निदेशक तत्व आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने संविधान निर्माण के समय थे, और वे भारत को सामाजिक न्याय आधारित लोकतंत्र की ओर अग्रसर करते हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर (MCQs)
प्रश्न 1: भारतीय संविधान के किस भाग में राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy) का उल्लेख है?
A) भाग-II
B) भाग-III
C) भाग-IV
D) भाग-V
सही उत्तर: C) भाग-IV
स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान का भाग-IV राज्य के नीति निदेशक तत्वों से संबंधित है। इनका उद्देश्य भारत में कल्याणकारी राज्य स्थापित करना है। ये तत्व न्यायालय द्वारा लागू नहीं किए जा सकते, परंतु शासन की नीतियों और कानूनों के लिए दिशा-निर्देशक सिद्धांत प्रदान करते हैं। ये सामाजिक-आर्थिक न्याय पर बल देते हैं और जनता के जीवन स्तर सुधारने हेतु सरकार को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
प्रश्न 2: राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles) किस प्रकार के राज्य की स्थापना की ओर उन्मुख हैं?
A) धार्मिक राज्य
B) कल्याणकारी राज्य
C) राजतंत्रीय राज्य
D) पूंजीवादी राज्य
सही उत्तर: B) कल्याणकारी राज्य
स्पष्टीकरण:
इन तत्वों का मूल उद्देश्य कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है। इनके माध्यम से समाज में समानता, न्याय और गरिमा सुनिश्चित की जाती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और पर्यावरण संरक्षण जैसे प्रावधान नीति निदेशक तत्वों में निहित हैं। ये सामाजिक और आर्थिक विषमताओं को कम करने पर जोर देते हैं। इस प्रकार, ये भारत को लोकतांत्रिक होने के साथ ही लोक-कल्याण परक राष्ट्र बनाने का आधार तैयार करते हैं।
प्रश्न 3: भारत में “शिक्षा का अधिकार” (अनुच्छेद 21A) किस नीति निदेशक प्रावधान से प्रेरित होकर जोड़ा गया?
A) अनुच्छेद 39
B) अनुच्छेद 45
C) अनुच्छेद 47
D) अनुच्छेद 50
सही उत्तर: B) अनुच्छेद 45
स्पष्टीकरण:
संविधान का अनुच्छेद 45 राज्य को यह प्रेरणा देता है कि वह बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराए। इसी आधार पर 2002 में 86वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 21A जोड़ा गया, जिसने 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा मौलिक अधिकार के रूप में प्रदान किया। यह नीति निदेशक तत्व का व्यावहारिक रूप है, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार की नींव रखी।
प्रश्न 4: समकालीन भारत में “मनरेगा” (रोज़गार गारंटी योजना) और “सार्वजनिक वितरण प्रणाली” किस संवैधानिक प्रावधान की भावना के अनुरूप हैं?
A) मौलिक अधिकार
B) नीति निदेशक तत्व
C) संघीय ढाँचा
D) न्यायिक पुनर्वीक्षण
सही उत्तर: B) नीति निदेशक तत्व
स्पष्टीकरण:
“मनरेगा” और “सार्वजनिक वितरण प्रणाली” जैसी योजनाएँ नीति निदेशक तत्वों की भावना का परिणाम हैं। इन तत्वों का उद्देश्य नागरिकों को आजीविका, खाद्य सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना है। हालांकि ये न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन इनकी प्रेरणा से सरकार सामाजिक-आर्थिक नीतियाँ बनाती है। इस प्रकार, नीति निदेशक तत्व आज भी विकास और समानता सुनिश्चित करने में अत्यधिक प्रासंगिक बने हुए हैं।
प्रश्न 5: राज्य के नीति निदेशक तत्वों (Directive Principles) की एक प्रमुख विशेषता क्या है?
A) ये धार्मिक आधार पर शासन तय करते हैं
B) ये न्यायालय द्वारा लागू किए जा सकते हैं
C) ये न्यायालय द्वारा लागू योग्य नहीं हैं लेकिन सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं
D) ये केवल मौलिक अधिकारों का विकल्प हैं
सही उत्तर: C) ये न्यायालय द्वारा लागू योग्य नहीं हैं लेकिन सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं
स्पष्टीकरण:
राज्य के नीति निदेशक तत्व न्यायालय द्वारा लागू योग्य नहीं (non-justiciable) हैं, परंतु वे नीति और कानून बनाने में सरकार को दिशा देते हैं। इन्हें संविधान की आत्मा कहा जाता है, क्योंकि ये सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय आधारित राज्य की परिकल्पना प्रस्तुत करते हैं। भले ही इनका उल्लंघन अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती, लेकिन जनता व संसद के समक्ष सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित रहती है।