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भारतीय संविधान के स्रोत

प्रस्तावना:

भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें विविध प्रावधानों का समावेश किया गया है। संविधान निर्माताओं ने न केवल भारत की ऐतिहासिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा, बल्कि विभिन्न देशों के संवैधानिक अनुभवों से भी प्रेरणा ली। इसी कारण भारतीय संविधान को “उधार का बुना हुआ वस्त्र” कहा जाता है। आइए इसके प्रमुख स्रोतों पर दृष्टि डालते हैं।

भारतीय संविधान के प्रमुख स्रोत

  1. भारत सरकार अधिनियम, 1935
    भारतीय संविधान ने अनेक प्रावधान सीधे भारत सरकार अधिनियम, 1935 से लिए।
    • संघीय ढाँचे की परिकल्पना
    • आपातकालीन प्रावधान
    • लोक सेवा आयोग की स्थापना
    • राज्यपाल का पद
      यह अधिनियम स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक व्यवस्था की मूलभूत नींव बना।
  2. ब्रिटिश संविधान
    भारत ने ब्रिटेन की संसदीय लोकतांत्रिक परंपरा से सबसे अधिक प्रेरणा ली।
    • संसदीय शासन प्रणाली
    • कानून का शासन (Rule of Law)
    • मंत्रिमंडल की सामूहिक उत्तरदायित्व की व्यवस्था
    • एकल नागरिकता की अवधारणा
    • संसद की सर्वोच्चता से संबंधित परंपराएँ
      इससे भारतीय लोकतंत्र को स्थिरता और व्यावहारिक स्वरूप प्राप्त हुआ।
  3. अमेरिकी संविधान
    भारतीय संविधान ने अमेरिका से नागरिक स्वतंत्रता और न्यायपालिका से संबंधित कई प्रावधान अपनाए।
    • मौलिक अधिकार
    • न्यायिक पुनर्वीक्षण का अधिकार
    • न्यायपालिका की स्वतंत्रता
    • राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति से प्रेरणा
      इससे भारतीय संविधान नागरिक अधिकारों के संरक्षण और संतुलित शासन संरचना पर केंद्रित हुआ।
  4. आयरलैंड का संविधान
    • नीति निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy)
    • राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया
    • उच्च सदन (राज्यसभा) के चुनाव से संबंधित अवधारणाएँ
      इन प्रावधानों ने सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  5. कनाडा का संविधान
    भारत ने कनाडा से संघीय शासन की व्यवस्था अपनाई, लेकिन केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाया।
    • केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन
    • आपातकालीन स्थिति में केंद्र की सर्वोच्चता
    • राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र द्वारा
      इससे भारत में “एकात्मक झुकाव वाला संघीय ढाँचा” अस्तित्व में आया।
  6. सोवियत संघ (USSR)
    • मौलिक कर्तव्यों का विचार
    • न्याय के समाजवादी आदर्श – सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय
      इससे भारतीय संविधान को समाजवादी स्वरूप और नागरिक कर्तव्यों की दिशा मिली।

निष्कर्ष:

भारतीय संविधान के निर्माण में विभिन्न देशों की श्रेष्ठ संवैधानिक विशेषताओं को आत्मसात किया गया है। यह केवल अनुकरण मात्र नहीं, बल्कि भारतीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार उनका संशोधन एवं समायोजन भी है। इस बहुआयामी दृष्टिकोण ने भारतीय संविधान को एक अनूठा, व्यापक और लचीला स्वरूप प्रदान किया है। अतः इसके स्रोत न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं, बल्कि आज भी भारतीय लोकतंत्र की मज़बूती और स्थायित्व के आधार बने हुए हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर (MCQs)

प्रश्न 1: भारतीय संविधान के किस स्रोत से “संघीय ढाँचे की परिकल्पना” तथा “राज्यपाल का पद” लिया गया है?
A) ब्रिटिश संविधान
B) भारत सरकार अधिनियम, 1935
C) अमेरिकी संविधान
D) कनाडा का संविधान

सही उत्तर: B) भारत सरकार अधिनियम, 1935

स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान में अनेक प्रावधान सीधे भारत सरकार अधिनियम, 1935 से लिए गए हैं। इसमें संघीय ढाँचे की परिकल्पना, आपातकालीन प्रावधान, लोक सेवा आयोग और राज्यपाल का पद शामिल है। यह अधिनियम स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक प्रणाली का आधार बना और संविधान की कई व्यवस्थाओं की नींव तैयार की। इस प्रकार, भारतीय संविधान के लगभग 250 से अधिक अनुच्छेदों की प्रेरणा इसी अधिनियम से मिली।

प्रश्न 2: “संसदीय शासन प्रणाली” और “कानून का शासन (Rule of Law)” भारतीय संविधान ने किस देश से ग्रहण किए?
A) कनाडा
B) सोवियत संघ
C) ब्रिटेन
D) अमेरिका

सही उत्तर: C) ब्रिटेन

स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान ने ब्रिटिश संविधान से संसदीय शासन प्रणाली, कानून का शासन, संसद सर्वोच्चता की परंपरा, मंत्रिमंडल की सामूहिक उत्तरदायित्व व्यवस्था और एकल नागरिकता अपनाई। ब्रिटेन ने लिखित संविधान के बजाय परंपराओं पर आधारित संसदीय लोकतंत्र विकसित किया। संविधान निर्माताओं ने इसे भारतीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया ताकि भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत और स्थिर बनाया जा सके।

प्रश्न 3: न्यायिक पुनर्वीक्षण (Judicial Review) और मौलिक अधिकार भारतीय संविधान ने किस संविधान से लिए?
A) रूस (सोवियत संघ)
B) फ्रांस
C) अमेरिका
D) आयरलैंड

सही उत्तर: C) अमेरिका

स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान ने अमेरिकी संविधान से मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनर्वीक्षण, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया का विचार ग्रहण किया। इन प्रावधानों का उद्देश्य नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और शासन के अंगों में संतुलन बनाए रखना था। अमेरिका में व्यक्तिगत अधिकार अत्यंत महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। इसी आधार पर भारत में मौलिक अधिकारों और मजबूत न्यायपालिका की व्यवस्था की गई।

प्रश्न 4: भारतीय संविधान में नीति निर्देशक तत्त्व (Directive Principles of State Policy) किस देश के संविधान से प्रेरित हैं?
A) आयरलैंड
B) कनाडा
C) फ्रांस
D) ब्रिटेन

सही उत्तर: A) आयरलैंड

स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान ने आयरलैंड के संविधान से नीति निर्देशक तत्त्व, राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति और उच्च सदन के चुनाव संबंधी अवधारणाएँ अपनाईं। नीति निर्देशक तत्त्व भारतीय शासन को सामाजिक और आर्थिक न्याय की दिशा में कार्य करने के लिए मार्गदर्शन देते हैं। यद्यपि ये न्यायिक रूप से लागू नहीं होते, लेकिन ये प्रशासन और नीति निर्माण की बुनियाद बनते हैं और लोकतंत्र को लोक-कल्याणकारी स्वरूप प्रदान करते हैं।

प्रश्न 5: भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों तथा समाजवादी न्याय का विचार किस देश से अपनाया गया?
A) ब्रिटेन
B) सोवियत संघ (USSR)
C) फ्रांस
D) कनाडा

सही उत्तर: B) सोवियत संघ (USSR)

स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान ने सोवियत संघ (USSR) से मौलिक कर्तव्यों और समाजवादी न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) की अवधारणा ग्रहण की। 1976 में 42वें संशोधन के दौरान संविधान में नागरिकों के मौलिक कर्तव्य जोड़े गए। इसका उद्देश्य नागरिकों को राष्ट्र और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का बोध कराना था। साथ ही, समाजवादी आदर्श संविधान के मूल उद्देश्यों में सम्मिलित किए गए।

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