Rankers Domain

सुभाषचंद्र बोस और आज़ाद हिन्द फौज की भूमिका

प्रस्तावना:

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक मोड़ देने वाले महान क्रांतिकारी नेता सुभाषचंद्र बोस का योगदान अविस्मरणीय है। बोस महात्मा गांधी की अहिंसात्मक पद्धति से अलग सशस्त्र संघर्ष के पक्षधर थे। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए देशी-विदेशी ताकतों को संगठित करने का साहसिक प्रयास किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनकी आज़ाद हिन्द फौज (INA) ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई प्रेरणा और दिशा प्रदान की।

प्रारंभिक राजनीतिक भूमिका

  • बोस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता थे और दो बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने।
  • जब कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनके विचार भिन्न होते गए, तो उन्होंने 1939 में Forward Bloc की स्थापना की।
  • उनका मानना था कि अंग्रेजों से स्वतंत्रता केवल सशस्त्र संघर्ष द्वारा ही संभव है।

आज़ाद हिन्द फौज (INA) की स्थापना और नेतृत्व

  • द्वितीय विश्व युद्ध के समय बोस जर्मनी से होते हुए जापान पहुँचे, जहाँ भारतीय युद्धबंदी सैनिकों की मदद से उन्होंने आज़ाद हिन्द फौज का पुनर्गठन किया।
  • रासबिहारी बोस द्वारा शुरू की गई इस फौज का वास्तविक नेतृत्व सुभाषचंद्र बोस ने संभाला।
  • उन्होंने “दिल्ली चलो” का नारा देकर स्वतंत्रता संग्राम के सैनिक स्वरूप को जीवंत किया।
  • बोस ने “जय हिन्द” का राष्ट्रीय नारा दिया, जो भारतीय आत्मसम्मान और राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया।

INA की गतिविधियाँ

  • जापान के सहयोग से INA ने पूर्वोत्तर भारत की सीमाओं—इम्फाल और कोहिमा—की ओर बढ़ने का अभियान चलाया।
  • यद्यपि यह सैन्य अभियान अंततः असफल हुआ, लेकिन इसने अंग्रेजों को भारतीयों की बढ़ती देशभक्ति का एहसास कराया।
  • बोस ने स्वतंत्र भारत के लिए अस्थायी आज़ाद हिन्द सरकार की स्थापना भी की, जिसे कुछ देशों ने मान्यता दी।

आज़ाद हिन्द फौज का प्रभाव

  • INA ट्रायल्स (1945-46) – युद्ध के बाद जब ब्रिटिश सरकार ने INA सैनिकों पर मुकदमे चलाए, तो पूरे भारत में उनके समर्थन में जबर्दस्त जन-आंदोलन खड़ा हो गया।
  • इस घटना ने हिंदू-मुस्लिम-सिख एकता को मजबूत किया और भारतीय सेना तथा जनता में राष्ट्रवाद की भावना तीव्र की।
  • नौसैनिक विद्रोह (1946) और सेना में असंतोष पर INA की भावना का गहरा प्रभाव दिखाई दिया।

महत्व और योगदान

  • यद्यपि INA सैन्य दृष्टि से निर्णायक सफलता प्राप्त नहीं कर सकी, फिर भी बोस के साहसिक नेतृत्व ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नई क्रांतिकारी चेतना जगाई।
  • उनका संघर्ष दर्शाता है कि भारत की जनता स्वतंत्रता के लिए किसी भी हद तक बलिदान देने को तैयार थी।
  • बोस के विचारों और INA के बलिदानों ने ब्रिटिश शासन के प्रति भारतीय सेना की निष्ठा को हिला दिया।

निष्कर्ष:

सुभाषचंद्र बोस और आज़ाद हिन्द फौज भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष की उन अमर गाथाओं में आते हैं, जिन्होंने राष्ट्रवाद को क्रांतिकारी ऊर्जा प्रदान की। भले ही INA का सैन्य अभियान सफल न हो सका, परंतु इसके राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव ने ब्रिटिश शासन को गंभीर रूप से कमजोर किया। बोस का “जय हिन्द” और “दिल्ली चलो” आज भी भारतीय स्वतंत्रता की उस ज्वाला का प्रतीक है जिसने अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQS) और उत्तर

प्रश्न 1. सुभाषचंद्र बोस ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर कौन-सा संगठन स्थापित किया था?
(a) हिन्द स्वतंत्रता लीग
(b) इंडियन नेशनल आर्मी
(c) फॉरवर्ड ब्लॉक
(d) क्रांतिकारी दल

उत्तर: (c) फॉरवर्ड ब्लॉक
व्याख्या: 1939 में कांग्रेस की नीतियों से मतभेद होने के कारण सुभाषचंद्र बोस ने फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की। उनका मानना था कि केवल अहिंसात्मक साधनों से स्वतंत्रता नहीं मिल सकती। फॉरवर्ड ब्लॉक का उद्देश्य भारतीय जनता को संगठित कर सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से अंग्रेज शासन को समाप्त करना था। यह संगठन स्वतंत्रता के प्रति बोस की क्रांतिकारी दृष्टि को दर्शाता है।

प्रश्न 2. आज़ाद हिन्द फौज (ina) का नेतृत्व सुभाषचंद्र बोस ने कब संभाला?
(a) 1930 में
(b) 1935 में
(c) 1943 में
(d) 1945 में

उत्तर: (c) 1943 में
व्याख्या: रासबिहारी बोस द्वारा प्रारंभ की गई आज़ाद हिन्द फौज का वास्तविक नेतृत्व सुभाषचंद्र बोस ने 1943 में जापान पहुँचकर संभाला। उन्होंने जर्मनी से एशिया की यात्रा कर भारतीय युद्धबंदियों को संगठित किया और उन्हें स्वतंत्रता संघर्ष हेतु प्रेरित किया। उनके नेतृत्व में फौज ने “दिल्ली चलो” का नारा दिया, जिसने भारत में क्रांतिकारी जोश भर दिया।

प्रश्न 3. सुभाषचंद्र बोस द्वारा दिया गया राष्ट्रीय नारा कौन-सा था?
(a) करो या मरो
(b) वंदे मातरम्
(c) जय हिन्द
(d) स्वराज मेरा अधिकार है

उत्तर: (c) जय हिन्द
व्याख्या: सुभाषचंद्र बोस का दिया “जय हिन्द” नारा भारतीय स्वाभिमान और राष्ट्रवाद का प्रतीक बना। यह नारा उनकी आज़ाद हिन्द फौज की सभाओं और अभियानों में गूँजता था। बाद में यह स्वतंत्र भारत का भी अभिवादन बन गया। बोस का यह नारा स्वतंत्रता के भाव, साहस और एकता की भावना को सशक्त रूप से प्रकट करता है।

प्रश्न 4. आज़ाद हिन्द फौज को सशस्त्र सहयोग किस देश से प्राप्त हुआ था?
(a) जर्मनी
(b) अमेरिका
(c) जापान
(d) रूस

उत्तर: (c) जापान
व्याख्या: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सुभाषचंद्र बोस जापान पहुँचे, जिसने आज़ाद हिन्द फौज को आवश्यक सैन्य सहयोग दिया। जापान ने भारतीय युद्धबंदी सैनिकों को संगठित करने में मदद की और दक्षिण-पूर्व एशिया में बोस की अस्थायी “आज़ाद हिन्द सरकार” को मान्यता दी। जापान के सहयोग से ina ने भारत की उत्तरी-पूर्वी सीमाओं पर सैन्य अभियानों की शुरुआत की।

प्रश्न 5. आज़ाद हिन्द फौज के प्रभाव से भारत में कौन-सी प्रमुख घटना घटी थी?
(a) चंपारण आंदोलन
(b) नौसैनिक विद्रोह (1946)
(c) असहयोग आंदोलन
(d) सविनय अवज्ञा आंदोलन

उत्तर: (b) नौसैनिक विद्रोह (1946)
व्याख्या: 1945-46 में ब्रिटिश सरकार ने ina सैनिकों पर मुकदमे चलाए, जिससे पूरे देश में राष्ट्रवादी लहर फैल गई। भारतीय सिपाहियों ने ina के बलिदानों से प्रेरित होकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ असंतोष जताया। फरवरी 1946 का नौसैनिक विद्रोह इसी भावना का परिणाम था, जिसने ब्रितानी सत्ता की जड़ें कमजोर कर दीं और स्वतंत्रता की प्रक्रिया को तेज किया।

[share_post_button]

Recent Posts