प्रस्तावना:
भारत का राष्ट्रपति संविधान द्वारा प्रदत्त सर्वोच्च पद है। राष्ट्रपति राष्ट्र का संवैधानिक प्रमुख तथा कार्यपालिका का प्रमुख होता है, जो मंत्रिपरिषद् की सलाह पर अपने कार्य करता है। राष्ट्रपति न केवल कार्यपालिका का संचालन करता है, बल्कि विधायिका, न्यायपालिका और आपातकालीन स्थितियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उसके अधिकार और कर्तव्यों का विस्तार भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से किया गया है।
- कार्यपालिका संबंधी अधिकार
- राष्ट्रपति भारत सरकार का औपचारिक प्रमुख होता है तथा समस्त कार्यपालिका अधिकार उसी में निहित होते हैं।
- प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- राज्यों के राज्योंपाल नियुक्त करने का अधिकार भी राष्ट्रपति को प्राप्त है।
- उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
- विदेशी देशों में भारत के राजदूत तथा उच्चायुक्त भी राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
- विधायिका संबंधी अधिकार
- राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को बुलाने और स्थगित करने का कार्य करता है।
- संसद को भंग करने का अधिकार भी राष्ट्रपति के पास है।
- संसद द्वारा पारित विधेयकों को राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही कानून का रूप मिलता है।
- यदि संसद सत्र में न हो और तुरंत कानून की आवश्यकता पड़ जाए, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है।
- न्यायिक अधिकार
- अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति दया याचिकाएँ सुनने और माफी, दंड-परिवर्तन, दंड-स्थगन अथवा दंड-मुक्ति जैसे अधिकारों का प्रयोग कर सकता है।
- यह विशेष रूप से उन मामलों में लागू होता है जहाँ दंड मृत्यु-दंड से संबंधित हो।
- आपातकालीन अधिकार
- राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करने का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है, जब देश की सुरक्षा को आंतरिक या बाहरी खतरे से संकट हो।
- राज्यों में संवैधानिक संकट की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।
- वित्तीय आपातकाल की स्थिति में भी राष्ट्रपति विशेष अधिकारों का प्रयोग कर सकता है।
- राष्ट्र की एकता और अखंडता का प्रतीक
- राष्ट्रपति देश की एकता और अखंडता का प्रतीक माना जाता है।
- वह देश का विधिक तथा औपचारिक प्रतिनिधित्व करता है और भारत की लोकतांत्रिक परंपरा का संरक्षक है।
निष्कर्ष:
भारतीय राष्ट्रपति का पद अत्यंत गरिमामय और महत्वपूर्ण है। यद्यपि वह व्यावहारिक रूप से मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है, फिर भी उसकी भूमिका संवैधानिक व्यवस्था को बनाए रखने और राष्ट्र की एकता को संरक्षित करने में केंद्रीय मानी जाती है। कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और आपातकालीन शक्तियों के माध्यम से राष्ट्रपति भारतीय लोकतंत्र का रक्षा कवच बना रहता है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर (MCQs)
प्रश्न 1: भारत सरकार का औपचारिक प्रमुख और सभी कार्यपालिका शक्तियों का स्रोत कौन है?
(a) प्रधानमंत्री
(b) राष्ट्रपति
(c) लोकसभा अध्यक्ष
(d) मुख्य न्यायाधीश
उत्तर: (b) राष्ट्रपति
व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुसार कार्यपालिका शक्तियों का प्रयोग राष्ट्रपति के नाम पर किया जाता है। प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् निर्णय तो लेते हैं, परंतु सभी कार्य राष्ट्रपति के नाम पर संपन्न होते हैं। इस प्रकार राष्ट्रपति भारत सरकार का औपचारिक प्रमुख और कार्यपालिका शक्तियों का श्रोत माना जाता है।
प्रश्न 2: संसद द्वारा पारित विधेयक को कानून का रूप किसकी स्वीकृति से प्राप्त होता है?
(a) प्रधानमंत्री
(b) संसद अध्यक्ष
(c) राष्ट्रपति
(d) सर्वोच्च न्यायालय
उत्तर: (c) राष्ट्रपति
व्याख्या: भारतीय संविधान में यह प्रावधान है कि जब तक संसद द्वारा पारित किसी विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त नहीं होती, तब तक वह विधेयक कानून नहीं बन सकता। यही कारण है कि विधायी प्रक्रिया में राष्ट्रपति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आवश्यकता हो तो राष्ट्रपति संसद सत्र न होने पर अध्यादेश भी जारी कर सकते हैं।
प्रश्न 3: अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति के पास कौन-सा विशेष अधिकार है?
(a) संसद भंग करने का अधिकार
(b) अध्यादेश जारी करने का अधिकार
(c) दया याचिका स्वीकारने और क्षमा करने का अधिकार
(d) राज्योंपाल नियुक्त करने का अधिकार
उत्तर: (c) दया याचिका स्वीकारने और क्षमा करने का अधिकार
व्याख्या: अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि वह मृत्यु-दंड की सजा पाए व्यक्ति को क्षमा, दंड-परिवर्तन, दंड-स्थगन या दंड-मुक्ति प्रदान कर सके। यह न्यायिक अधिकार होने के बावजूद राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका को मानवीय दृष्टि से भी परिभाषित करता है और यह अंतिम न्याय का अवसर माना जाता है।
प्रश्न 4: भारत में राष्ट्रपति को किस परिस्थिति में विशेष रूप से आपातकालीन शक्तियाँ मिलती हैं?
(a) राष्ट्रपति के इस्तीफे की स्थिति में
(b) मौलिक अधिकार निलंबित हो जाने पर
(c) राष्ट्रीय, राज्य और वित्तीय संकट की स्थिति में
(d) संविधान संशोधन के समय
उत्तर: (c) राष्ट्रीय, राज्य और वित्तीय संकट की स्थिति में
व्याख्या: संविधान में प्रावधान है कि राष्ट्रपति तीन प्रकार के आपातकाल लागू कर सकते हैं—राष्ट्रीय आपातकाल (अनु. 352), राज्य आपातकाल (अनु. 356) और वित्तीय आपातकाल (अनु. 360)। इन परिस्थितियों में राष्ट्रपति के पास असाधारण अधिकार आ जाते हैं, जिससे केंद्र की शक्तियाँ और अधिक सशक्त हो जाती हैं, ताकि देश की सुरक्षा और स्थिरता बनी रहे।
प्रश्न 5: भारत का राष्ट्रपति किस रूप में राष्ट्र की एकता और अखंडता का प्रतीक माना जाता है?
(a) विधायिका का प्रमुख
(b) न्यायपालिका का संरक्षक
(c) राष्ट्र का औपचारिक प्रतिनिधि और संवैधानिक प्रमुख
(d) केवल कार्यपालिका का प्रमुख
उत्तर: (c) राष्ट्र का औपचारिक प्रतिनिधि और संवैधानिक प्रमुख
व्याख्या: राष्ट्रपति राष्ट्र का संवैधानिक प्रमुख होते हुए न केवल प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा है, बल्कि वह भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक भी माना जाता है। वह देश का औपचारिक प्रतिनिधि होता है और लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करता है। इस तरह उसकी भूमिका केवल कार्यपालिका तक सीमित न होकर पूरे राष्ट्र की एकजुटता और संविधान की मर्यादा से जुड़ी है।