प्रस्तावना:
भारत का विभाजन 15 अगस्त 1947 को हुआ, जब स्वतंत्रता के साथ-साथ देश दो भागों – भारत और पाकिस्तान – में बँट गया। यह विभाजन भारतीय इतिहास की एक अत्यंत जटिल और दुखद घटना थी, जिसके पीछे राजनीतिक असफलताएँ, सांप्रदायिक तनाव और ब्रिटिश नीतियाँ गहराई तक जिम्मेदार थीं।
विभाजन की परिस्थितियाँ और कारण
ब्रिटिश नीतियाँ – फूट डालो और राज करो
- ब्रिटिश शासनकाल में अलग निर्वाचन क्षेत्र (Separate Electorates) की व्यवस्था (1909 से) ने हिंदू-मुस्लिम साम्प्रदायिकता को संस्थागत रूप दे दिया।
- समय के साथ ब्रिटिश सरकार ने दोनों समुदायों को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने वाली नीतियाँ अपनाईं।
मुस्लिम लीग और पाकिस्तान की माँग
- 1906 में स्थापित मुस्लिम लीग धीरे-धीरे साम्प्रदायिक राजनीति का केंद्र बनी।
- 1940 के लाहौर प्रस्ताव में मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत में स्वतंत्र मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को अलग देश “पाकिस्तान” बनाने की माँग रखी।
- जिन्ना का तर्क था कि हिंदू और मुसलमान दो अलग “कौम” हैं और एक साथ नहीं रह सकते।
कैबिनेट मिशन योजना (1946) की असफलता
- ब्रिटिश सरकार ने भारत को एक साथ स्वतंत्र करने के लिए कैबिनेट मिशन भेजा, जिसने एक संयुक्त भारत का सुझाव दिया।
- कांग्रेस और मुस्लिम लीग इस योजना पर सहमत नहीं हो पाए। मुस्लिम लीग अब केवल विभाजन को ही समाधान मानने लगी।
डायरेक्ट एक्शन डे (1946)
- जिन्ना द्वारा “डायरेक्ट एक्शन डे” (16 अगस्त 1946) का आह्वान साम्प्रदायिक हिंसा का कारण बना।
- बंगाल, बिहार और कई प्रांतों में भयानक दंगे हुए, जिनमें हजारों लोग मारे गए।
- इस घटना ने हिंदू-मुस्लिम एकता की संभावनाओं को समाप्त कर दिया।
माउंटबेटन योजना (1947)
- भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने महसूस किया कि अब विभाजन के बिना समाधान संभव नहीं है।
- जून 1947 में उनकी योजना के तहत भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्र बनने का निर्णय लिया गया।
परिणाम
- भयावह सांप्रदायिक हिंसा – विभाजन के समय पंजाब और बंगाल में व्यापक कत्लेआम और दंगे हुए, जिसमें लाखों लोग मारे गए।
- जनसंख्या का विस्थापन – लगभग डेढ़ करोड़ लोग हिन्दू और मुसलमान अपने नए देशों की ओर पलायन के लिए मजबूर हुए।
- स्वतंत्रता के साथ विभाजन – 14 / 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान स्वतंत्र राष्ट्र बने।
- दीर्घकालिक शत्रुता – भारत-पाकिस्तान के बीच सांप्रदायिक तनाव स्थाई रूप से उत्पन्न हो गया, जो आगे युद्धों और विवादों का कारण बना।
निष्कर्ष:
भारत का विभाजन 1947 में स्वतंत्रता की कीमत के रूप में सामने आया। यह विभाजन ब्रिटिश शासन की औपनिवेशिक नीतियों, मुस्लिम लीग की पाकिस्तान माँग और साम्प्रदायिक हिंसा से उपजा। यद्यपि भारत स्वतंत्र हुआ, लेकिन विभाजन ने लाखों लोगों को विस्थापन और हिंसा का शिकार बनाया। इस प्रकार स्वतंत्रता की खुशी विभाजन के दर्द से गहरे रूप में जुड़ गई, जिसने भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास को स्थाई रूप से प्रभावित किया।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQS) और उत्तर
प्रश्न 1. मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की माँग आधिकारिक रूप से कब रखी थी?
(a) 1916
(b) 1930
(c) 1940
(d) 1946
उत्तर: (c) 1940
व्याख्या: मुस्लिम लीग ने 1940 के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पाकिस्तान की माँग को औपचारिक रूप दिया। इस अधिवेशन में मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग कौमें हैं और एक ही राज्य में साथ नहीं रह सकते। इसी “लाहौर संकल्प” को बाद में पाकिस्तान प्रस्ताव कहा गया, जिसने विभाजन की नींव रखी।
प्रश्न 2. ब्रिटिश शासन की कौन-सी नीति भारत के विभाजन में प्रमुख रूप से जिम्मेदार मानी जाती है?
(a) उद्योगीकरण की नीति
(b) फूट डालो और राज करो नीति
(c) आर्थिक सुधार नीति
(d) शिक्षा विस्तार नीति
उत्तर: (b) फूट डालो और राज करो नीति
व्याख्या: ब्रिटिश सरकार ने 1909 से ही अलग निर्वाचन क्षेत्रों की व्यवस्था लागू कर हिंदू-मुस्लिम एकता को कमजोर किया। “फूट डालो और राज करो” नीति के तहत उसने साम्प्रदायिक विभाजन को प्रोत्साहित किया। धीरे-धीरे दोनों समुदायों के मध्य अविश्वास गहराता गया, जिससे ब्रिटिश शासक अपने राजनीतिक हित सुरक्षित रखते हुए भारत को विभाजन की ओर धकेल पाए।
प्रश्न 3. कैबिनेट मिशन योजना (1946) का उद्देश्य क्या था?
(a) भारत के विभाजन को लागू करना
(b) एक संयुक्त भारत के लिए संविधान बनाना
(c) पाकिस्तान के निर्माण की प्रक्रिया तय करना
(d) साम्प्रदायिक दंगे रोकना
उत्तर: (b) एक संयुक्त भारत के लिए संविधान बनाना
व्याख्या: कैबिनेट मिशन का उद्देश्य भारत को एकजुट रखकर स्वतंत्रता दिलाना था। इसने एक संघीय ढाँचे का प्रस्ताव रखा जिसमें प्रांतों को स्वायत्तता दी जाती, परंतु रक्षा, विदेश, और संचार केंद्र के नियंत्रण में रहते। कांग्रेस और मुस्लिम लीग इस व्यवस्था पर सहमत नहीं हुए। परिणामस्वरूप यह योजना विफल रही और विभाजन की प्रक्रिया तेज हुई।
प्रश्न 4. “डायरेक्ट एक्शन डे” कब आयोजित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप साम्प्रदायिक हिंसा भड़की?
(a) 12 अगस्त 1945
(b) 16 अगस्त 1946
(c) 14 अगस्त 1947
(d) 26 जनवरी 1946
उत्तर: (b) 16 अगस्त 1946
व्याख्या: मुस्लिम लीग द्वारा जिन्ना के नेतृत्व में 16 अगस्त 1946 को “डायरेक्ट एक्शन डे” मनाया गया। इसका उद्देश्य पाकिस्तान की माँग के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन था, लेकिन यह व्यापक सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया। बंगाल, बिहार और अन्य प्रांतों में भयानक दंगे हुए। इस घटना ने हिंदू-मुस्लिम एकता की सभी संभावनाओं को समाप्त कर दिया।
प्रश्न 5. भारत और पाकिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में कब स्थापित किया गया?
(a) 15 जनवरी 1946
(b) 26 जनवरी 1947
(c) 14 और 15 अगस्त 1947
(d) 1 अप्रैल 1948
उत्तर: (c) 14 और 15 अगस्त 1947
व्याख्या: लॉर्ड माउंटबेटन योजना के अंतर्गत भारत का विभाजन किया गया। योजना के अनुसार 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुए। विभाजन के साथ ही भयानक सांप्रदायिक हिंसा और जन-विस्थापन हुआ। लगभग डेढ़ करोड़ लोग सीमापार विस्थापित हुए और लाखों जानें गईं। इस विभाजन ने भारतीय उपमहाद्वीप के सामाजिक ताने-बाने को गहरी चोट पहुँचाई।