प्रस्तावना:
भारत की स्वतंत्रता की गाथा में उत्तराखंड का योगदान अद्वितीय और प्रेरणादायी है। यह पर्वतीय प्रदेश न केवल अपनी भौगोलिक विशेषताओं और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ के वीर सैनिकों और क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम की धारा को नई दिशा दी। यहाँ के लोग देशभक्ति, साहस और बलिदान के प्रतीक रहे, जिन्होंने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपना योगदान दिया।
सैनिक परंपरा और गढ़वाल- कुमाऊँ रेजीमेंट: उत्तराखंड के सैनिकों ने ब्रिटिश भारतीय सेना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊँ रेजीमेंट जैसी इकाइयों में सेवा करने वाले सैनिकों ने न केवल विदेशी युद्धों में बहादुरी दिखाई, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर कई मौकों पर अपने असंतोष को प्रकट किया। प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध में इन सैनिकों की वीरता ने भारतीय सैनिकों की क्षमता को उजागर किया।
क्रांतिकारी गतिविधियाँ और स्वतंत्रता संग्राम: उत्तराखंड के युवाओं ने भूमिगत क्रांतिकारी आंदोलनों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे गुप्त सभाओं, पत्र-पत्रिकाओं और जनजागरण के माध्यम से स्वतंत्रता की चेतना फैलाने में लगे रहे। टिहरी राज्य में प्रजा मंडल आंदोलन इस बात का प्रमाण है कि यहाँ के लोग सामंती और औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष कर रहे थे।
टिहरी राज्य और जनांदोलन: टिहरी गढ़वाल के किसानों, मजदूरों और बुद्धिजीवियों ने स्वतंत्रता संग्राम के समानांतर लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए भी आवाज़ उठाई। यहाँ का प्रजामंडल आंदोलन ब्रिटिश साम्राज्यवाद और राजशाही के खिलाफ एक संगठित राजनीतिक आंदोलन था। श्रीदेव सुमन जैसे बलिदानी नेता ने टिहरी रियासत की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए प्राणों की आहुति दी। उनका बलिदान स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखंड की एक अमर गाथा है।
राष्ट्रीय आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी: महात्मा गांधी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलनों—असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन—में उत्तराखंड के स्वतंत्रता सेनानी सक्रिय रहे। गाँव-गाँव में ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज़ बुलंद की गई। महिलाएँ भी इस आंदोलन में पीछे नहीं रहीं और उन्होंने विदेशी वस्त्र बहिष्कार और आंदोलनकारी गतिविधियों में सक्रियता दिखाई।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड के सैनिकों और क्रांतिकारियों ने अपने साहस, त्याग और बलिदान से भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा दी। गढ़वाल और कुमाऊँ की धरती ने ऐसे वीरों को जन्म दिया जिन्होंने ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी और स्वतंत्रता की लौ को प्रज्वलित रखा। उत्तराखंड के इन बलिदानों के बिना भारत की स्वतंत्रता की यात्रा अधूरी होती। इस प्रकार, स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखंड का योगदान भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है।