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भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची का महत्व

प्रस्तावना:

भारतीय संविधान ने देश की शासन-व्यवस्था को संघीय ढांचे में स्थापित किया है। संघीय व्यवस्था की मूल आधारशिला शक्तियों का बँटवारा है, जिससे न केवल केंद्र और राज्यों के बीच दायित्व स्पष्ट हो सकें बल्कि टकराव की संभावना भी न्यूनतम रहे। संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) इसी उद्देश्य से बनाई गई है। इसमें यह निर्धारित किया गया है कि कौन-सा विषय केंद्र के अधिकार क्षेत्र में होगा, कौन-सा राज्य के और किन विषयों पर दोनों मिलकर कानून बना सकते हैं। यह व्यवस्था भारतीय संघीय ढांचे की आत्मा कही जाती है।

  1. संघ सूची (Union List)
  • संघ सूची में प्रारंभ में 97 विषय थे (अब संशोधनों के कारण इनमें परिवर्तन हुआ है)।
  • इन विषयों पर केवल संसद को कानून बनाने का अधिकार है।
  • इसमें ऐसे विषय शामिल हैं जो राष्ट्रीय महत्व के हैं और जिनका पूरे देश पर समान रूप से लागू होना जरूरी है।
  • प्रमुख विषय: रक्षा, विदेश नीति, रेल मार्ग, डाक-तार, परमाणु ऊर्जा, मुद्रा, बैंकिंग प्रणाली, नागरिकता, सीमा शुल्क आदि।
  • इस सूची की अधिकता से स्पष्ट होता है कि संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता को प्राथमिकता दी।
  1. राज्य सूची (State List)
  • इस सूची में प्रारंभिक रूप से 66 विषय शामिल थे।
  • इन विषयों पर राज्य विधानसभाएँ कानून बनाती हैं।
  • इसमें ऐसे विषय आते हैं जो स्थानीय महत्व के होते हैं और जिनका समाधान संबंधित राज्यों द्वारा ही बेहतर ढंग से किया जा सकता है।
  • प्रमुख विषय: पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि, जल आपूर्ति, बाजार-मंडी, स्थानीय निकाय, भूमि व्यवस्था आदि।
  1. समवर्ती सूची (Concurrent List)
  • इस सूची में प्रारंभ में 47 विषय थे।
  • इस पर केंद्र और राज्य दोनों ही कानून बना सकते हैं।
  • किन्तु यदि केंद्र और राज्य के कानून में टकराव हो जाए तो केंद्र का कानून प्रभावी रहेगा।
  • प्रमुख विषय: शिक्षा, वन, आपराधिक कानून, विवाह एवं तलाक, श्रमिक संघ, अनुबंध, पर्यावरण संरक्षण आदि।
  • यह सूची राष्ट्रीय और स्थानीय हितों के बीच सहयोग का संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
  1. शक्तियों का बँटवारा और संघीय व्यवस्था
  • सातवीं अनुसूची यह सुनिश्चित करती है कि न तो केंद्र पूर्ण रूप से सब पर हावी हो और न ही राज्यों को असीमित स्वतंत्रता मिले।
  • फिर भी संघ सूची की लंबाई और अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित रहना यह दिखाता है कि भारत की संघीय व्यवस्था एकात्मक प्रवृत्ति लिए हुए है।
  • आपातकाल की स्थिति में तो केंद्र राज्य सूची के विषयों पर भी कानून बना सकता है, जिससे उसकी स्थिति और सशक्त हो जाती है।

निष्कर्ष:

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के संतुलन की रीढ़ है। यह जहाँ संघीय ढांचे को सुरक्षित करती है, वहीं केंद्र को अधिक महत्व देकर एकात्मक प्रवृत्ति भी सुनिश्चित करती है। इसके माध्यम से यह स्पष्ट हो जाता है कि भारतीय संघवाद “सशक्त केंद्र और सक्षम राज्य” की परिकल्पना पर आधारित है। अतः सातवीं अनुसूची भारतीय संविधान का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ है, जो शासन-प्रणाली को दिशा और स्थिरता प्रदान करती है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर (MCQs)

प्रश्न 1: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) मौलिक अधिकारों की परिभाषा करना
(b) केंद्र और राज्यों में न्यायपालिका का गठन
(c) केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बँटवारा करना
(d) राष्ट्रपति की शक्तियों का निर्धारण करना

उत्तर: (c) केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बँटवारा करना
व्याख्या: सातवीं अनुसूची का मूल उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच विधायी अधिकारों का स्पष्ट बँटवारा करना है। इसमें संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची शामिल हैं। इस बँटवारे से संघीय ढाँचे का स्वरूप मजबूत होता है और टकराव की संभावना कम हो जाती है। इसलिए सातवीं अनुसूची भारतीय संघीय संरचना की आत्मा कही जाती है।

प्रश्न 2: संघ सूची (Union List) में प्रारंभ में कितने विषय थे और इन विषयों पर किसका अधिकार है?
(a) 66 विषय – राज्य विधानमंडल
(b) 47 विषय – केंद्र और राज्य दोनों
(c) 97 विषय – केवल संसद
(d) 250 विषय – राष्ट्रपति

उत्तर: (c) 97 विषय – केवल संसद
व्याख्या: संघ सूची में प्रारंभिक रूप से 97 विषय थे (अब इनमें कुल परिवर्तन हुआ है)। इन विषयों पर केवल संसद ही कानून बना सकती है, क्योंकि ये राष्ट्रीय महत्व के विषय हैं जैसे रक्षा, विदेश नीति, रेलमार्ग, मुद्रा, बैंकिंग आदि। इस सूची की लंबाई और महत्व से स्पष्ट होता है कि संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता दी।

प्रश्न 3: राज्य सूची (State List) के अंतर्गत कौन-से विषय आते हैं?
(a) रक्षा, विदेश नीति और मुद्रा
(b) शिक्षा, विवाह और पर्यावरण
(c) पुलिस, स्वास्थ्य और कृषि
(d) अनुबंध, आपराधिक कानून और वन

उत्तर: (c) पुलिस, स्वास्थ्य और कृषि
व्याख्या: राज्य सूची स्थानीय महत्व के विषयों से संबंधित है ताकि राज्यों को अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार शासन करने का अधिकार मिले। इसमें पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि, बाजार, स्थानीय निकाय, जल आपूर्ति और भूमि व्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं। यह राज्यों की स्वायत्तता को सुनिश्चित करती है, हालाँकि आपातकाल की स्थिति में केंद्र यहां भी कानून बना सकता है।

प्रश्न 4: यदि समवर्ती सूची में बने राज्य और केंद्र के कानूनों में टकराव हो तो कौन-सा कानून प्रभावी रहेगा?
(a) राज्य का कानून
(b) केंद्र का कानून
(c) दोनों ही कानून लागू रहेंगे
(d) राष्ट्रपति का अध्यादेश

उत्तर: (b) केंद्र का कानून
व्याख्या: समवर्ती सूची में शिक्षा, विवाह, वन, अनुबंध और श्रम जैसे विषय आते हैं। इन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। किंतु यदि दोनों में टकराव होता है तो संविधान के अनुसार केंद्र का कानून प्रभावी माना जाएगा। यह केंद्र की प्रमुखता और भारतीय संघीय ढाँचे के एकात्मक झुकाव को स्पष्ट करता है।

प्रश्न 5: भारतीय संघीय व्यवस्था में एकात्मक प्रवृत्ति क्यों मानी जाती है?
(a) राज्य सूची में कम विषय होने के कारण
(b) अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास होने और संघ सूची की लंबाई के कारण
(c) क्योंकि राज्यपाल के पास अधिक शक्तियाँ होती हैं
(d) न्यायपालिका केंद्र को मान्यता देती है

उत्तर: (b) अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास होने और संघ सूची की लंबाई के कारण
व्याख्या: सातवीं अनुसूची में संघ सूची की संख्या राज्य सूची से अधिक है और अवशिष्ट (Residuary) विषयों का अधिकार भी केवल संसद को दिया गया है। इसके अलावा आपातकाल में केंद्र राज्य सूची पर भी कानून बना सकता है। इन कारणों से भारत की संघीय संरचना में स्पष्ट रूप से एकात्मक झुकाव है, जिससे केंद्र की स्थिति मजबूत एवं राज्यों की नियंत्रित होती है।

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