प्रस्तावना:
भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है जिसमें लगभग 470 अनुच्छेद शामिल हैं। यह हमारे देश के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन का मूल आधार है। संविधान न केवल शासन तंत्र को संचालित करने के नियम निर्धारित करता है बल्कि नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्यों को भी परिभाषित करता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित बिंदुओं में समझी जा सकती हैं –
- सर्वभौम, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य राज्यसंविधान ने भारत को एक संप्रभु राष्ट्र घोषित किया है। यहां जनता ही सर्वोच्च शक्ति है। भारत को समाजवादी राज्य बनाकर सामाजिक और आर्थिक समानता की व्यवस्था की गई है, साथ ही धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के द्वारा सभी धर्मों को समान स्थान दिया गया है। लोकतांत्रिक प्रणाली से जनता को शासन में भागीदारी का मौका मिलता है और गणराज्य रूप से राष्ट्रपति का चुनाव जनता के प्रतिनिधियों द्वारा होता है।
- संघीय व्यवस्था जिसमें एकात्मक झुकाव
संविधान केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करता है, जिससे भारतीय शासन-व्यवस्था संघीय स्वरूप की प्रतीत होती है। किंतु आपातकालीन प्रावधानों तथा कुछ विशिष्ट शक्तियों के कारण केंद्र सरकार अधिक सशक्त है। यह “एकात्मक झुकाव वाला संघीय ढाँचा” कहलाता है। - संसदीय शासन प्रणाली
भारतीय संविधान ने ब्रिटेन की तरह संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया है। इसमें वास्तविक कार्यपालिका मंत्रिपरिषद होती है जो संसद के प्रति उत्तरदायी होती है। प्रधानमंत्री का पद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वही सरकार का संचालन करता है। - स्वतंत्र न्यायपालिका एवं न्यायिक पुनर्वीक्षण
संविधान ने न्यायपालिका को विधायिका और कार्यपालिका से स्वतंत्र बनाया है। सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों को न्यायिक पुनर्वीक्षण का अधिकार दिया गया है, जिससे वे असंवैधानिक कानूनों या कार्यों को रद्द कर सकते हैं। यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है। - मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निर्देशक तत्त्व और मौलिक कर्तव्य
भारतीय संविधान ने नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किए हैं जो उन्हें स्वतंत्रता, समानता और न्याय का आश्वासन देते हैं। साथ ही, राज्य के नीति निर्देशक तत्त्व सरकार को लोक-कल्याणकारी नीतियाँ बनाने की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं। 1976 में 42वें संशोधन द्वारा मौलिक कर्तव्यों को भी जोड़ा गया, जिससे नागरिकों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराया जा सके।
निष्कर्ष:
स्पष्ट है कि भारतीय संविधान विश्व की सबसे व्यापक और विशिष्ट संवैधानिक व्यवस्था है। इसमें विभिन्न देशों की संवैधानिक विशेषताओं का समावेश कर एक अनूठा मिश्रण तैयार किया गया है। यह संविधान न केवल शासन की रूपरेखा प्रस्तुत करता है बल्कि नागरिकों को अधिकार देने के साथ-साथ कर्तव्यों की याद भी दिलाता है। यही इसकी मजबूती और स्थायित्व का प्रमुख आधार है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर (MCQs)
प्रश्न 1: भारत को संविधान में किस प्रकार का राज्य घोषित किया गया है?
A) साम्यवादी, गणराज्य, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक
B) सर्वभौम, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य
C) संघीय, समाजवादी, धार्मिक, राजतंत्रीय
D) एकात्मक, धार्मिक, राजतंत्रीय, लोकतांत्रिक
सही उत्तर: B) सर्वभौम, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य
स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान ने प्रस्तावना में भारत को सर्वभौम, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य घोषित किया है। सर्वभौम का अर्थ है कि भारत किसी अन्य शक्ति के अधीन नहीं है, समाजवादी स्वरूप समानता की दिशा में प्रतिबद्धता को दर्शाता है, धर्मनिरपेक्ष स्वरूप सभी धर्मों के लिए समान सम्मान देता है, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को भागीदारी का अवसर मिलता है और गणराज्य स्वरूप में राज्य का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है।
प्रश्न 2: भारतीय संविधान की संघीय व्यवस्था को किस प्रकार की संरचना कहा जाता है?
A) शुद्ध संघीय व्यवस्था
B) शुद्ध एकात्मक व्यवस्था
C) एकात्मक झुकाव वाली संघीय व्यवस्था
D) वैश्विक झुकाव वाली व्यवस्था
सही उत्तर: C) एकात्मक झुकाव वाली संघीय व्यवस्था
स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान ने केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया है, जिससे इसे संघीय स्वरूप मिलता है। किंतु आपातकालीन प्रावधानों, राज्यपाल की भूमिका और अन्य विशेष शक्तियों के कारण केंद्र सरकार अधिक सशक्त है। इसी कारण भारतीय संविधान को “एकात्मक झुकाव वाला संघीय ढाँचा” कहा जाता है। इससे राज्यों की स्वतंत्रता रहती है, लेकिन अंतिम शक्ति केंद्र सरकार के पास होती है।
प्रश्न 3: भारतीय शासन प्रणाली में वास्तविक कार्यपालिका कौन होती है?
A) राष्ट्रपति
B) प्रधानमंत्री
C) मंत्रिपरिषद
D) संसद
सही उत्तर: C) मंत्रिपरिषद
स्पष्टीकरण:
यद्यपि राष्ट्रपति भारत का संवैधानिक प्रमुख होता है, लेकिन वास्तविक कार्यपालिका मंत्रिपरिषद है, जो प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कार्य करती है। यह प्रणाली ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली से प्रेरित है। मंत्रिपरिषद संसद के प्रति उत्तरदायी होती है और प्रधानमंत्री इसमें सबसे महत्वपूर्ण पद है क्योंकि वही सरकार का संचालन करता है और नीतिगत निर्णयों का नेतृत्व करता है।
प्रश्न 4: न्यायपालिका को असंवैधानिक कानून रद्द करने का अधिकार किस प्रावधान से मिला है?
A) मौलिक अधिकार
B) राज्य के नीति निर्देशक तत्त्व
C) न्यायिक पुनर्वीक्षण
D) मौलिक कर्तव्य
सही उत्तर: C) न्यायिक पुनर्वीक्षण
स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों को न्यायिक पुनर्वीक्षण (Judicial Review) का अधिकार प्रदान किया है। इसके अंतर्गत ये न्यायालय असंवैधानिक कानूनों या सरकार के फैसलों को निरस्त कर सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी कानून संविधान की मूल भावना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करे। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनी रहती है और लोकतांत्रिक मूल्य संरक्षित रहते हैं।
प्रश्न 5: भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?
A) 44वाँ संशोधन, 1978
B) 42वाँ संशोधन, 1976
C) 61वाँ संशोधन, 1989
D) 74वाँ संशोधन, 1992
सही उत्तर: B) 42वाँ संशोधन, 1976
स्पष्टीकरण:
भारतीय संविधान में प्रारंभ में मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख नहीं था। 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन द्वारा मौलिक कर्तव्य जोड़े गए। इनका उद्देश्य नागरिकों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग करना था। मौलिक अधिकार जहाँ नागरिकों को अधिकार प्रदान करते हैं, वहीं मौलिक कर्तव्य उन्हें दायित्व का बोध कराते हैं जिससे लोकतंत्र संतुलित और जिम्मेदार बनता है।