प्रस्तावना:
भारतीय संघीय व्यवस्था में राज्यपाल का पद अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। वह राज्य की कार्यपालिका का नाममात्र प्रमुख है तथा संविधान के अनुसार अपने अधिकांश कार्य राज्य की मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है। राज्यपाल न केवल राज्य में शासन की निरंतरता बनाए रखता है, बल्कि वह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक सेतु के रूप में भी कार्य करता है।
- कार्यपालिका से संबंधित अधिकार
- राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और कार्यपालिका शक्तियाँ उसी में निहित होती हैं।
- राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है। मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी वह करता है।
- राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
- राज्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारी भी राज्यपाल की नियुक्ति से पद ग्रहण करते हैं।
- सभी कार्यकारी कार्य राज्यपाल के नाम पर संपन्न किए जाते हैं।
- विधायिका से संबंधित अधिकार
- राज्यपाल राज्य विधानमंडल का अभिन्न अंग है।
- वह विधानसभा को बुला सकता है, स्थगित कर सकता है और आवश्यकता पड़ने पर उसे भंग भी कर सकता है।
- विधानमंडल का पहला सत्र राज्यपाल के अभिभाषण से ही आरंभ होता है।
- विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक तभी कानून बनता है जब उस पर राज्यपाल की सहमति प्राप्त हो।
- राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति हेतु आरक्षित भी कर सकता है।
- न्यायिक अधिकार
- राज्यपाल को उन अपराधों के लिए दया याचिका सुनने तथा दंड क्षमा, दंड परिवर्तित करने अथवा दंड को माफ करने का अधिकार है, जो राज्य के विधायी अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
- यह विशेषकर उन मामलों में महत्वपूर्ण है, जिनमें दंड राज्य के अधीन अपराधों से संबंधित हो।
- विशेष दायित्व
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत यदि किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होता है, तो राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकता है।
- इस रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है।
- कुछ विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष दायित्व भी निभा सकता है।
- केंद्र और राज्य के बीच सेतु
- राज्यपाल केंद्र और राज्य सरकार के बीच सेतु का कार्य करता है।
- वह राज्य में केंद्र की नीतियों को कार्यान्वित करने में सहयोग करता है तथा राज्य की स्थिति और समस्याओं की रिपोर्ट केंद्र को देता है।
निष्कर्ष:
राज्यपाल का पद भारतीय शासन-व्यवस्था में बहुआयामी है। व्यावहारिक रूप से उसकी भूमिका नाममात्र की लगती है, क्योंकि वह मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है, किंतु अनेक परिस्थितियों में उसकी विवेकाधीन शक्तियाँ उसे अत्यंत महत्वपूर्ण बना देती हैं। राज्यपाल न केवल राज्य में शासन और प्रशासन का संवैधानिक प्रमुख होता है, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय स्थापित कर भारतीय संघीय ढांचे को सुदृढ़ भी करता है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर (MCQs)
प्रश्न 1: राज्य का संवैधानिक प्रमुख कौन होता है?
(a) मुख्यमंत्री
(b) राज्यपाल
(c) विधानसभाध्यक्ष
(d) मुख्य न्यायाधीश
उत्तर: (b) राज्यपाल
व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुसार राज्य का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होता है। सभी कार्यपालिका शक्तियाँ उसके नाम पर निहित रहती हैं। हालांकि वह इन शक्तियों का प्रयोग सामान्यतः मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है। राज्यपाल प्रशासन की निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ केंद्र और राज्य के बीच संवाद का भी सेतु होता है।
प्रश्न 2: राज्य में मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति कौन करता है?
(a) राष्ट्रपति
(b) सर्वोच्च न्यायालय
(c) राज्यपाल
(d) विधानसभा
उत्तर: (c) राज्यपाल
व्याख्या: राज्यपाल राज्य में मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है तथा मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी करता है। इसके अलावा महाधिवक्ता तथा राज्य निर्वाचन आयुक्त जैसी महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ भी राज्यपाल करता है। इससे प्रशासनिक ढांचा संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप संचालित होता है।
प्रश्न 3: विधानमंडल का पहला सत्र किसके अभिभाषण से आरंभ होता है?
(a) मुख्यमंत्री
(b) विधानसभाध्यक्ष
(c) राज्यपाल
(d) उपमुख्यमंत्री
उत्तर: (c) राज्यपाल
व्याख्या: संविधान के अनुसार राज्य विधानसभा या विधानपरिषद का पहला सत्र राज्यपाल के अभिभाषण से ही आरंभ होता है। इस अभिभाषण में सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं और आगामी योजनाओं का उल्लेख होता है। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अंग है और राज्यपाल को विधायिका का अभिन्न हिस्सा बनाता है।
प्रश्न 4: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट देकर राष्ट्रपति शासन लागू करा सकता है?
(a) अनुच्छेद 352
(b) अनुच्छेद 356
(c) अनुच्छेद 360
(d) अनुच्छेद 368
उत्तर: (b) अनुच्छेद 356
व्याख्या: अनुच्छेद 356 के तहत यदि किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है, तो राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकता है। इस आधार पर राष्ट्रपति उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं। यही कारण है कि राज्यपाल भारतीय संघीय ढांचे में केंद्र और राज्य के बीच एक संवैधानिक कड़ी के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 5: राज्यपाल की भूमिका केंद्र और राज्य संबंधों में कैसी होती है?
(a) केवल राज्य के प्रति उत्तरदायी
(b) केवल केंद्र के प्रति उत्तरदायी
(c) केंद्र और राज्य के बीच सेतु के रूप में
(d) केवल प्रतीकात्मक
उत्तर: (c) केंद्र और राज्य के बीच सेतु के रूप में
व्याख्या: राज्यपाल दोनों स्तरों की सरकारों को जोड़ने का कार्य करता है। वह राज्यों में केंद्र सरकार की नीतियों को लागू करता है और राज्य की परिस्थितियों, समस्याओं आदि की जानकारी केंद्र को देता है। इस प्रकार राज्यपाल को भारतीय संघीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण सेतु कहा जाता है, जो सहयोग और संतुलन बनाए रखने में सहायक है।