Rankers Domain

उत्तराखंड के स्वतंत्रता संग्राम के नायक बद्रीदत्त पांडे

प्रस्तावना:

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखंड का योगदान अविस्मरणीय है, और इस योगदान को संभव बनाने में अग्रणी भूमिका बद्रीदत्त पांडे ने निभाई। जिन्हें सम्मानपूर्वक ‘कुमाऊँ केसरी’ के नाम से जाना जाता है, वे केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि एक कुशल पत्रकार और दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में ब्रिटिश शोषण के खिलाफ लगातार संघर्ष किया और उत्तराखंड की जनता को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने का अभूतपूर्व कार्य किया।

कुली बेगार आंदोलन का नेतृत्व: बद्रीदत्त पांडे का सबसे महत्वपूर्ण योगदान 1921 के कुली बेगार आंदोलन में था। यह एक अमानवीय प्रथा थी जहाँ ग्रामीणों को ब्रिटिश अधिकारियों के लिए बिना किसी वेतन के जबरन श्रम करना पड़ता था। उन्होंने लोगों को संगठित किया और बागेश्वर में उत्तरायणी मेले के दौरान सभी कुली रजिस्टरों को सरयू नदी में बहा दिया। यह एक ऐतिहासिक और अहिंसक प्रतिरोध था जिसने इस शोषणकारी प्रथा को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। यह उनकी कुशल नेतृत्व क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण था।

शक्तिसमाचार पत्र के माध्यम से जागरण: एक पत्रकार के रूप में, बद्रीदत्त पांडे ने अपने समाचार पत्र ‘शक्ति’ का उपयोग राष्ट्रवादी विचारों को फैलाने और लोगों को जागरूक करने के लिए किया। उन्होंने अपने लेखों में ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों की कड़ी आलोचना की। ‘शक्ति’ ने लोगों को न केवल राष्ट्रीय घटनाओं से अवगत कराया, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में भी शिक्षित किया। यह अखबार उत्तराखंड में राजनीतिक चेतना का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया।

राजनीतिक संघर्ष के साथ-साथ सामाजिक सुधार: बद्रीदत्त पांडे केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं थे; उन्होंने सामाजिक सुधारों पर भी जोर दिया। वे शिक्षा के महत्व को समझते थे और लोगों को सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए प्रेरित करते थे। उनका मानना था कि जब तक समाज आंतरिक रूप से मजबूत और शिक्षित नहीं होगा, तब तक राजनीतिक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं होगा। इस तरह, उन्होंने राजनीतिक आंदोलन और सामाजिक सुधारों को एक साथ जोड़ा।

जन-आंदोलन का निर्माण: बद्रीदत्त पांडे ने कुमाऊँ के आम लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा। उन्होंने गाँव-गाँव जाकर लोगों को एकजुट किया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वे भी इस लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके नेतृत्व में, असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन जैसे बड़े अभियानों में कुमाऊँ की जनता ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बनाकर लोगों को प्रेरणा दी।

राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ाव: बद्रीदत्त पांडे ने उत्तराखंड के स्वतंत्रता आंदोलन को राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्यधारा से जोड़ा। उन्होंने कुमाऊँ परिषद् के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में इसका भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विलय कर दिया। इस कदम ने उत्तराखंड के स्थानीय संघर्षों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और यहाँ के नेताओं को राष्ट्रीय मंच पर काम करने का अवसर मिला।

निष्कर्ष:

संक्षेप में, बद्रीदत्त पांडे का योगदान उत्तराखंड के स्वतंत्रता संग्राम में एक मील का पत्थर है। उन्होंने अपनी पत्रकारिता, नेतृत्व और सामाजिक सुधारों के माध्यम से लोगों में राजनीतिक चेतना जगाई। कुली बेगार आंदोलन का सफल नेतृत्व करके उन्होंने ब्रिटिश शासन को चुनौती दी और यह साबित किया कि अहिंसक प्रतिरोध से भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। उनका कार्य और बलिदान उत्तराखंड की जनता के लिए एक प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

Recent Posts