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उत्तराखंड के वनों के प्रकार: विशेषताएँ एवं वर्गीकरण

उत्तराखंड की भौगोलिक विविधता और ऊँचाई में भारी अंतर के कारण यहाँ के वनों में अद्भुत विविधता पाई जाती है। राज्य के पारिस्थितिकी तंत्र में वनों का स्थान सर्वोपरि है।

उत्तराखंड के वनों के प्रकार: प्रमुख विशेषताएँ एवं वर्गीकरण

  1. वनाच्छादित भूभाग: 17वीं वन रिपोर्ट (2021) के अनुसार, उत्तराखंड का लगभग 45.44% भूभाग वनों से ढका हुआ है, जो राज्य की समृद्ध प्राकृतिक संपदा को दर्शाता है।
  2. राष्ट्रीय वन नीति का मानक: पर्वतीय राज्यों के लिए निर्धारित मानक के अनुसार, यहाँ के 60% भूभाग पर वन होना अनिवार्य है, जिसकी प्राप्ति के लिए राज्य निरंतर प्रयासरत है।
  3. वितरण के कारक: राज्य में वनों का वितरण मुख्य रूप से ऊँचाई (Altitude), वर्षा की मात्रा और मिट्टी की संरचना पर निर्भर करता है।
  4. उत्तराखंड का वरदान (बांज): बांज (Oak) के वृक्ष को ‘उत्तराखंड का वरदान’ और ‘शिव की जटा’ कहा जाता है क्योंकि यह जल संरक्षण और मृदा की नमी बनाए रखने में सर्वोत्तम है।
  5. उपोष्ण कटिबंधीय वन: ये वन 750 से 1200 मीटर की ऊँचाई पर शिवालिक और दून घाटियों में पाए जाते हैं। यहाँ साल (Sal) सबसे प्रमुख वृक्ष प्रजाति है।
  6. विविध वनस्पतियाँ: उपोष्ण वनों में साल के अतिरिक्त हल्दू, बाँस, खैर और शीशम जैसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्ष प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
  7. उष्ण कटिबंधीय शुष्क वन: 1500 मीटर से कम ऊँचाई वाले कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ये वन पाए जाते हैं। यहाँ ढाक (पलाश), जामुन और बेल जैसे वृक्ष प्रमुख हैं।
  8. मानसूनी वन (आर्द्र पतझड़): इन्हें उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पतझड़ वन भी कहते हैं। ये वन शुष्क मौसम में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं और इनमें सागौन व अर्जुन के वृक्ष मिलते हैं।
  9. कोणधारी वन (Coniferous): 900 से 1800 मीटर की ऊँचाई पर पाए जाने वाले इन वनों में चीड़ (Pine) प्रमुख वृक्ष है। इनकी पत्तियाँ सुई की तरह नुकीली होती हैं।
  10. लीसा और पिरूल: चीड़ के वृक्षों से ‘लीसा’ (राल) प्राप्त होता है, जो कई उद्योगों का आधार है। वहीं इसकी सूखी पत्तियाँ ‘पिरूल’ वनाग्नि का मुख्य कारण बनती हैं।
  11. पर्वतीय शीतोष्ण वन: 1800 से 2700 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इन वनों में बांज (Oak) की विभिन्न प्रजातियाँ जैसे सफेद बांज, मोरू और खरसू पाई जाती हैं।
  12. देवदार और बुरांश: शीतोष्ण वनों में देवदार के ऊँचे वृक्ष और उत्तराखंड का राजकीय वृक्ष बुरांश भी मिलता है, जो वसंत ऋतु में लाल फूलों से लद जाता है।
  13. उप-अल्पाइन वन: 2700 मीटर से अधिक ऊँचाई पर वृक्षों का आकार छोटा होने लगता है। यहाँ सिल्वर फर और भोजपत्र (बर्च) जैसे वृक्ष प्रमुखता से मिलते हैं।
  14. भोजपत्र का ऐतिहासिक महत्व: प्राचीन काल में भोजपत्र की छाल का उपयोग लिखने के लिए कागज़ के स्थान पर किया जाता था। यह उच्च हिमालयी क्षेत्रों का विशिष्ट वृक्ष है।
  15. अल्पाइन झाड़ियाँ: 3000 से 3600 मीटर की ऊँचाई पर विलो और जूनिपर की झाड़ियाँ पाई जाती हैं, जो अत्यधिक शीत सहन करने में सक्षम होती हैं।
  16. बुग्याल (चरागाह): 3600 मीटर से ऊपर ऊँचे वृक्ष समाप्त हो जाते हैं और मखमली घास के मैदान शुरू होते हैं, जिन्हें बुग्याल या पयार कहा जाता है।
  17. जैव-विविधता और औषधियाँ: बुग्याल क्षेत्र दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों (जैसे कीड़ा जड़ी) के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं और गर्मियों में पशुचारण का मुख्य केंद्र होते हैं।
  18. वन विकास निगम: वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन और दोहन के लिए 1 अप्रैल 2001 को ‘उत्तराखंड वन विकास निगम’ की स्थापना की गई थी।
  19. पारिस्थितिक अनुक्रम: राज्य में वनों का क्रम नीचे से ऊपर की ओर इस प्रकार है: साल → चीड़ → बांज/देवदार → भोजपत्र → अल्पाइन झाड़ियाँ → बुग्याल।

निष्कर्ष:

उत्तराखंड के वन न केवल नदियों के जल-स्तंभ हैं, बल्कि वे वैश्विक कार्बन सिंक (Carbon Sink) के रूप में कार्य कर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी सहायक हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी

  • उत्तराखंड के वनाच्छादित भूभाग और मानकों के संदर्भ में क्या सत्य है?
  1. 17वीं वन रिपोर्ट (2021) के अनुसार, राज्य का लगभग 45.44% भाग वनों से ढका है।
  2. पर्वतीय राज्यों के लिए राष्ट्रीय वन नीति का मानक 60% वन क्षेत्र अनिवार्य मानता है।
  3. राज्य में वनों का वितरण ऊँचाई, वर्षा और मिट्टी की संरचना पर निर्भर करता है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • बांज (Oak) के वृक्ष के बारे में कौन सा कथन सही है?
  1. इसे ‘उत्तराखंड का वरदान’ और ‘शिव की जटा’ कहा जाता है।
  2. यह जल संरक्षण और मृदा की नमी बनाए रखने में सर्वोत्तम वृक्ष है।
  3. यह पर्वतीय शीतोष्ण वनों (1800-2700 मी.) की मुख्य प्रजाति है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • उपोष्ण कटिबंधीय वनों (Sub-tropical Forests) की क्या विशेषताएँ हैं?
  1. ये वन 750 से 1200 मीटर की ऊँचाई पर शिवालिक और दून घाटियों में मिलते हैं।
  2. साल (Sal) इन वनों की सबसे प्रमुख वृक्ष प्रजाति है।
  3. यहाँ हल्दू, बाँस, खैर और शीशम जैसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्ष मिलते हैं।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • कोणधारी वनों (Coniferous Forests) और चीड़ के वृक्षों के संबंध में क्या सही है?
  1. ये वन 900 से 1800 मीटर की ऊँचाई पर पाए जाते हैं।
  2. चीड़ (Pine) इन वनों का मुख्य वृक्ष है जिसकी पत्तियां सुई की तरह नुकीली होती हैं।
  3. चीड़ से ‘लीसा’ प्राप्त होता है, जबकि इसकी सूखी पत्तियां ‘पिरूल’ वनाग्नि का कारण बनती हैं।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • पर्वतीय शीतोष्ण वनों में पाई जाने वाली प्रमुख वनस्पतियाँ कौन सी हैं?
  1. यहाँ बांज की विभिन्न प्रजातियाँ जैसे सफेद बांज, मोरू और खरसू पाई जाती हैं।
  2. देवदार के ऊँचे वृक्ष इस क्षेत्र की मुख्य विशेषता हैं।
  3. उत्तराखंड का राजकीय वृक्ष ‘बुरांश’ इसी श्रेणी के वनों में मिलता है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • उप-अल्पाइन वनों और भोजपत्रके ऐतिहासिक महत्व के बारे में क्या सत्य है?
  1. ये वन 2700 मीटर से अधिक ऊँचाई पर पाए जाते हैं जहाँ वृक्षों का आकार छोटा होता है।
  2. यहाँ सिल्वर फर और भोजपत्र (बर्च) जैसे वृक्ष प्रमुखता से मिलते हैं।
  3. प्राचीन काल में भोजपत्र की छाल का उपयोग लिखने के लिए कागज़ के रूप में किया जाता था।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • अल्पाइन झाड़ियों और बुग्यालों (चरागाहों) के संदर्भ में सही तथ्य चुनें:
  1. 3000 से 3600 मीटर की ऊँचाई पर विलो और जूनिपर की झाड़ियाँ पाई जाती हैं।
  2. 3600 मीटर से ऊपर मखमली घास के मैदान पाए जाते हैं जिन्हें बुग्याल या पयार कहते हैं।
  3. बुग्याल क्षेत्र दुर्लभ औषधियों (जैसे कीड़ा जड़ी) और ग्रीष्मकालीन पशुचारण के केंद्र हैं।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • उत्तराखंड में वनों के पारिस्थितिक अनुक्रम‘ (नीचे से ऊपर की ओर) का सही क्रम क्या है?
  1. साल → चीड़ → बांज/देवदार
  2. भोजपत्र → अल्पाइन झाड़ियाँ
  3. अल्पाइन झाड़ियाँ → बुग्याल
  4. उपरोक्त सभी (यह पूरा एक क्रमिक प्रवाह है)

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • उत्तराखंड वन विकास निगम के बारे में कौन सा कथन सही है?
  1. इसकी स्थापना 1 अप्रैल 2001 को की गई थी।
  2. इसका उद्देश्य वनों का वैज्ञानिक प्रबंधन और दोहन करना है।
  3. यह राज्य की वन संपदा के संरक्षण और आर्थिक उपयोग के बीच संतुलन बनाता है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • पर्यावरण की दृष्टि से उत्तराखंड के वनों का क्या महत्व है?
  1. ये न केवल नदियों के जल-स्तंभ हैं बल्कि वैश्विक ‘कार्बन सिंक’ के रूप में कार्य करते हैं।
  2. ये जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक हैं।
  3. ये राज्य की जैव-विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

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