उत्तराखंड का इतिहास जन-संघर्षों की एक गौरवशाली गाथा है, जहाँ आम नागरिकों ने पर्यावरण की रक्षा से लेकर अपने राजनैतिक व सामाजिक अधिकारों के लिए विश्वप्रसिद्ध आंदोलनों का नेतृत्व किया।
- कुली बेगार आंदोलन (1921): यह ब्रिटिश शासन की मुफ्त श्रम और सामान ढोने की शोषणकारी प्रथा के विरुद्ध था। 13-14 जनवरी 1921 को बागेश्वर में सरयू तट पर 40 हजार लोगों ने बेगार रजिस्टर नदी में बहाकर इसे समाप्त किया।
- रक्तहीन क्रांति: महात्मा गांधी ने कुली बेगार आंदोलन की सफलता और अहिंसक स्वरूप को देखते हुए इसे ‘रक्तहीन क्रांति’ की संज्ञा दी थी।
- चिपको आंदोलन (1970 के दशक): चमोली जिले से शुरू हुआ यह पर्यावरण आंदोलन पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हुआ। ग्रामीण महिलाओं ने पेड़ों से चिपककर उनकी कटाई का विरोध किया।
- गौरा देवी और सुंदरलाल बहुगुणा: गौरा देवी ने 1974 में रेणी गाँव में महिलाओं का नेतृत्व किया, जबकि सुंदरलाल बहुगुणा ने “हिमालय बचाओ, देश बचाओ” के नारे के साथ इसे वैश्विक मंच पर पहुँचाया।
- चंडी प्रसाद भट्ट: इन्हें चिपको आंदोलन का जनक माना जाता है, जिन्हें 1982 में प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- मैती आंदोलन (1994): कल्याण सिंह रावत द्वारा शुरू किया गया यह अनूठा आंदोलन पर्यावरण को विवाह की रस्म से जोड़ता है, जिसमें दुल्हन विदाई के समय मायके में एक यादगार पौधा लगाती है।
- टिहरी प्रजामंडल (1939): श्रीदेव सुमन और साथियों ने टिहरी रियासत की राजशाही के विरुद्ध लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए देहरादून में प्रजामंडल की स्थापना की।
- श्रीदेव सुमन की शहादत: राजशाही के दमन के खिलाफ 84 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल के बाद 25 जुलाई 1944 को श्रीदेव सुमन शहीद हो गए, जो राज्य के लिए बलिदान का प्रतीक बने।
- तिलाड़ी कांड (1930): इसे ‘उत्तराखंड का जलियांवाला बाग’ कहा जाता है। वन अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे किसानों पर दीवान चक्रधर जुयाल ने गोली चलवाई थी।
- डोला-पालकी आंदोलन: जयानंद भारती के नेतृत्व में दलित शिल्पकारों को सामाजिक समानता दिलाने हेतु यह आंदोलन चला, ताकि उन्हें विवाह में पालकी के उपयोग का अधिकार मिल सके।
- पानी राखो आंदोलन: पौड़ी गढ़वाल के उप्रेखाल में सच्चिदानंद भारती ने पारंपरिक ‘चाल-खाल’ (तालाबों) के माध्यम से जल संरक्षण का सफल मॉडल प्रस्तुत किया।
- रक्षा सूत्र आंदोलन (1994): सुरेश भाई के नेतृत्व में वनों की रक्षा के लिए पेड़ों पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उन्हें कटने से बचाने का संकल्प लिया गया।
- नशा नहीं रोजगार दो: 1980 के दशक में युवाओं ने बेरोजगारी और नशे की बढ़ती समस्या के खिलाफ मुखर होकर यह सामाजिक और आर्थिक आंदोलन चलाया।
- पृथक राज्य की प्रथम मांग: अलग राज्य की मांग औपचारिक रूप से 1938 में श्रीनगर अधिवेशन में पंडित गोविंद बल्लभ पंत द्वारा उठाई गई थी।
- उत्तराखंड क्रांति दल (1979): डॉ. देवी दत्त पंत के नेतृत्व में UKD की स्थापना हुई, जिसने पृथक राज्य आंदोलन को एक संगठित राजनैतिक दिशा प्रदान की।
- खटीमा और मसूरी कांड (1994): सितंबर 1994 में राज्य आंदोलनकारियों पर हुई पुलिस फायरिंग ने इस आंदोलन को और उग्र और निर्णायक बना दिया।
- रामपुर तिराहा कांड (2 अक्टूबर 1994): दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर में हुई पुलिस बर्बरता को भारतीय लोकतंत्र का ‘काला अध्याय’ माना जाता है, जिसमें कई लोग शहीद हुए।
- गैरसैंण राजधानी संकल्प: 1992 में उत्तराखंड क्रांति दल ने गैरसैंण को प्रस्तावित राज्य की राजधानी घोषित कर इसे जन-आकांक्षाओं का केंद्र बनाया।
- राज्य का गठन: इन लंबे संघर्षों के परिणामस्वरूप 9 नवंबर, 2000 को भारत के 27वें राज्य के रूप में ‘उत्तरांचल’ (अब उत्तराखंड) का जन्म हुआ।
- निष्कर्ष: उत्तराखंड के ये आंदोलन न केवल राज्य की अस्मिता की रक्षा के गवाह हैं, बल्कि ये सतत विकास, पर्यावरण चेतना और सामाजिक न्याय के वैश्विक मार्गदर्शक भी हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. कुली बेगार आंदोलन (1921) के ऐतिहासिक महत्व के संदर्भ में कौन से तथ्य सही हैं?
- यह 13-14 जनवरी 1921 को बागेश्वर में सरयू नदी के तट पर हुआ था।
- इसमें लगभग 40 हजार लोगों ने बेगार रजिस्टर नदी में बहाकर इस शोषणकारी प्रथा को समाप्त किया।
- महात्मा गांधी ने इसकी सफलता और अहिंसक स्वरूप को देखते हुए इसे ‘रक्तहीन क्रांति’ कहा।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. चिपको आंदोलन और उससे जुड़ी विभूतियों के बारे में क्या सत्य है?
- गौरा देवी ने 1974 में रेणी गाँव में वनों को बचाने हेतु महिलाओं का नेतृत्व किया।
- सुंदरलाल बहुगुणा ने “हिमालय बचाओ, देश बचाओ” के नारे के साथ इसे वैश्विक स्तर पर पहुँचाया।
- चंडी प्रसाद भट्ट को इस आंदोलन का जनक माना जाता है, जिन्हें 1982 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. उत्तराखंड के तिलाड़ी कांड (1930) के विषय में कौन से विकल्प सही हैं?
- इसे ‘उत्तराखंड का जलियांवाला बाग’ की संज्ञा दी जाती है।
- यह वन अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे किसानों पर दीवान चक्रधर जुयाल द्वारा गोली चलवाने की घटना थी।
- यह आंदोलन टिहरी रियासत की वन नीतियों के विरोध में उपजा था।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. टिहरी प्रजामंडल और श्रीदेव सुमन की शहादत के संदर्भ में क्या सही है?
- 1939 में देहरादून में टिहरी रियासत की राजशाही के विरुद्ध प्रजामंडल की स्थापना की गई थी।
- श्रीदेव सुमन राजशाही के दमन के खिलाफ 84 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल पर बैठे थे।
- 25 जुलाई 1944 को श्रीदेव सुमन शहीद हुए, जो राज्य के लिए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक बने।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. उत्तराखंड के सामाजिक एवं जल संरक्षण आंदोलनों के बारे में कौन से तथ्य सत्य हैं?
- जयानंद भारती ने दलित शिल्पकारों को समानता दिलाने हेतु ‘डोला-पालकी आंदोलन’ का नेतृत्व किया।
- सच्चिदानंद भारती ने ‘पानी राखो आंदोलन’ के माध्यम से जल संरक्षण का ‘चाल-खाल’ मॉडल प्रस्तुत किया।
- इन आंदोलनों ने पहाड़ी समाज में गहरे सुधार और संसाधन प्रबंधन की नींव रखी।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. मैती आंदोलन (1994) और रक्षा सूत्र आंदोलन की विशेषताओं के बारे में क्या सही है?
- कल्याण सिंह रावत द्वारा शुरू किया गया ‘मैती आंदोलन’ विवाह की रस्म को वृक्षारोपण से जोड़ता है।
- सुरेश भाई के नेतृत्व में ‘रक्षा सूत्र आंदोलन’ में पेड़ों पर राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया गया।
- ये दोनों आंदोलन पर्यावरण संरक्षण के लिए स्थानीय और सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश देते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7. पृथक राज्य आंदोलन के राजनैतिक घटनाक्रम के बारे में कौन सी जानकारी सही है?
- पृथक राज्य की औपचारिक मांग 1938 के श्रीनगर अधिवेशन में उठी थी।
- 1979 में डॉ. देवी दत्त पंत के नेतृत्व में उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) की स्थापना हुई।
- 1992 में उत्तराखंड क्रांति दल ने गैरसैंण को प्रस्तावित राज्य की राजधानी घोषित किया था।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. राज्य आंदोलन के ‘काले अध्यायों‘ (1994 के कांड) के संदर्भ में क्या सत्य है?
- सितंबर 1994 में खटीमा और मसूरी कांड में पुलिस ने आंदोलनकारियों पर फायरिंग की थी।
- 2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर में ‘रामपुर तिराहा कांड’ हुआ, जिसे लोकतंत्र का काला अध्याय माना जाता है।
- इन घटनाओं ने पृथक राज्य के संकल्प को और अधिक उग्र और निर्णायक बना दिया।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. उत्तराखंड के अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक आंदोलनों के बारे में क्या सही है?
- 1980 के दशक में नशे और बेरोजगारी के खिलाफ ‘नशा नहीं रोजगार दो’ आंदोलन चला।
- वनों की रक्षा के लिए ‘रक्षा सूत्र आंदोलन’ 1994 में भिलंगना घाटी से शुरू हुआ था।
- ग्रामीण प्रशासन और सामाजिक न्याय के लिए भी कई स्थानीय संघर्ष समय-समय पर होते रहे हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10. उत्तराखंड राज्य के गठन और इन आंदोलनों के निष्कर्ष के बारे में क्या सही है?
- इन लंबे संघर्षों के परिणामस्वरूप 9 नवंबर, 2000 को भारत के 27वें राज्य का जन्म हुआ।
- ये आंदोलन सतत विकास और पर्यावरण चेतना के वैश्विक मार्गदर्शक बने हैं।
- आंदोलनों ने राज्य की अस्मिता, पर्यावरण और सामाजिक न्याय की रक्षा की है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी