उत्तराखंड के ग्लेशियर (हिमनद) राज्य की पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के स्तंभ हैं। हिमालय की गोद में स्थित ये हिमनद उत्तर भारत की बारहमासी नदियों के उद्गम का मुख्य स्रोत हैं।
- शब्दावली और महत्व: उत्तराखंड में ग्लेशियरों को स्थानीय भाषा में ‘बमक‘ कहा जाता है। ये हिमनद मीठे पानी के विशाल भंडार हैं, जो गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों को निरंतर जल प्रदान करते हैं।
- राज्य का सबसे बड़ा ग्लेशियर: उत्तरकाशी जनपद में स्थित गंगोत्री ग्लेशियर उत्तराखंड का सबसे बड़ा हिमनद है। इसकी लंबाई लगभग 30 किमी और चौड़ाई 2 किमी है।
- गंगा का उद्गम: गंगोत्री ग्लेशियर के निचले सिरे को ‘गोमुख‘ कहा जाता है, जहाँ से भागीरथी नदी (गंगा) का उद्गम होता है। यह कई सहायक ग्लेशियरों जैसे रक्तवर्ण और चतुरंगी का समूह है।
- यमुनोत्री ग्लेशियर: यह उत्तरकाशी में बंदरपूँछ पर्वत के उत्तरी ढाल पर स्थित है। लगभग 10 किमी लंबा यह ग्लेशियर यमुना नदी का प्राथमिक स्रोत है।
- बंदरपूँछ ग्लेशियर: 6316 मीटर ऊँचे बंदरपूँछ शिखर के पास स्थित यह हिमनद यमुना के जल प्रवाह में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- कुमाऊँ का सबसे बड़ा ग्लेशियर: पिथौरागढ़ जनपद में स्थित मिलम ग्लेशियर कुमाऊँ क्षेत्र का सबसे बड़ा हिमनद है, जिसकी लंबाई लगभग 16 किमी है।
- गोरी गंगा का स्रोत: मिलम ग्लेशियर ही वह स्थान है जहाँ से गोरी गंगा नदी निकलती है। यह क्षेत्र उच्च हिमालयी दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है।
- पिंडारी ग्लेशियर: बागेश्वर जिले में स्थित यह ग्लेशियर कुमाऊँ का दूसरा सबसे बड़ा हिमनद है। यह नंदा देवी और नंदा कोट शिखरों के बीच 30 किमी की लंबाई में फैला है।
- ट्रेकिंग का केंद्र: पिंडारी ग्लेशियर अपनी सुगम पहुँच के कारण राज्य का एक प्रसिद्ध ट्रेकिंग स्थल है। यहाँ से पिंडर नदी का उद्गम होता है।
- अलकनंदा का उद्गम: चमोली जनपद में स्थित संतोपथ और भागीरथी खड़क ग्लेशियर अलकनंदा नदी के मुख्य स्रोत हैं। संतोपथ ग्लेशियर चौखम्बा पर्वत के निकट स्थित है।
- चमोली के अन्य हिमनद: बद्रीनाथ ग्लेशियर, दूनागिरी, और हिपरा बमक चमोली के प्रमुख हिमनद हैं। बद्रीनाथ ग्लेशियर नर-नारायण पर्वत श्रृंखला के पास स्थित है।
- चौराबाड़ी ग्लेशियर: रुद्रप्रयाग के केदारनाथ मंदिर के ठीक ऊपर स्थित यह ग्लेशियर मंदाकिनी नदी का उद्गम स्थल है।
- गांधी सरोवर का निर्माण: चौराबाड़ी ग्लेशियर के पिघलने से ही गांधी सरोवर (सर्वादी ताल) का निर्माण हुआ था। 2013 की केदारनाथ आपदा का सीधा संबंध इसी ग्लेशियर क्षेत्र में हुई हलचल से था।
- खतलिंग ग्लेशियर: टिहरी जनपद में स्थित यह ग्लेशियर भिलंगना नदी का उद्गम स्रोत है। यह क्षेत्र साहसिक पर्यटकों और ट्रेकर्स के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
- नामिक और पोंटिंग ग्लेशियर: पिथौरागढ़ के ये ग्लेशियर पूर्वी रामगंगा नदी को जल प्रदान करते हैं। नामिक ग्लेशियर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।
- सहायक हिमनद समूह: उत्तरकाशी में कीर्ति बमक, चतुरंगी और रक्तवर्ण जैसे हिमनद मुख्य गंगोत्री ग्लेशियर प्रणाली को मजबूती प्रदान करते हैं।
- कफनी और सुन्दरढूंगा: बागेश्वर में स्थित ये ग्लेशियर पिंडर की सहायक नदियों को जन्म देते हैं। सुन्दरढूंगा ग्लेशियर बागेश्वर और पिथौरागढ़ की सीमा पर स्थित है।
- जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: हाल के वर्षों में ग्लोबल वार्मिंग के कारण इन ग्लेशियरों के पीछे खिसकने (Receding) की दर बढ़ गई है, जो भविष्य के जल संकट की ओर संकेत करती है।
- वैज्ञानिक अनुसंधान: देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी इन ग्लेशियरों के स्वास्थ्य और गतिशीलता पर निरंतर शोध कर रहा है।
- निष्कर्ष: उत्तराखंड के ये हिमनद न केवल नदियों के जीवनदाता हैं, बल्कि राज्य की नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिकी के संतुलन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. उत्तराखंड के ग्लेशियरों के सामान्य परिचय के बारे में क्या सत्य है?
- स्थानीय भाषा में ग्लेशियरों को ‘बमक’ कहा जाता है।
- ये हिमनद उत्तर भारत की बारहमासी नदियों के मुख्य स्रोत हैं।
- ये मीठे पानी के विशाल भंडार हैं जो पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. गंगोत्री ग्लेशियर के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
- यह उत्तराखंड का सबसे बड़ा ग्लेशियर है (लगभग 30 किमी लंबा)।
- इसके निचले सिरे को ‘गोमुख’ कहा जाता है, जहाँ से भागीरथी निकलती है।
- यह रक्तवर्ण और चतुरंगी जैसे सहायक ग्लेशियरों का समूह है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. यमुना नदी के स्रोत ग्लेशियरों के बारे में सही विकल्प चुनें:
- यमुनोत्री ग्लेशियर बंदरपूँछ पर्वत के उत्तरी ढाल पर स्थित है।
- बंदरपूँछ ग्लेशियर (6316 मीटर) यमुना के जल प्रवाह में योगदान देता है।
- यमुनोत्री ग्लेशियर लगभग 10 किमी लंबा है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. कुमाऊँ क्षेत्र के सबसे बड़े हिमनद ‘मिलम ग्लेशियर‘ की क्या विशेषताएँ हैं?
- यह पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है और इसकी लंबाई लगभग 16 किमी है।
- यह कुमाऊँ मंडल का सबसे बड़ा ग्लेशियर है।
- यहाँ से गोरी गंगा नदी का उद्गम होता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. पिंडारी ग्लेशियर के बारे में कौन सा तथ्य सही है?
- यह बागेश्वर जिले में स्थित कुमाऊँ का दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर है।
- यहाँ से पिंडर नदी का उद्गम होता है।
- यह नंदा देवी और नंदा कोट शिखरों के बीच स्थित एक प्रसिद्ध ट्रेकिंग स्थल है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. अलकनंदा नदी के उद्गम स्रोत के रूप में किन ग्लेशियरों को जाना जाता है?
- संतोपथ ग्लेशियर
- भागीरथी खड़क ग्लेशियर
- चौखम्बा पर्वत के निकट स्थित हिमनद
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7. रुद्रप्रयाग स्थित चौराबाड़ी ग्लेशियर के बारे में क्या सत्य है?
- यह केदारनाथ मंदिर के ठीक ऊपर स्थित है।
- यहाँ से मंदाकिनी नदी का उद्गम होता है।
- इसके पिघलने से गांधी सरोवर (सर्वादी ताल) का निर्माण हुआ था।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. टिहरी और पिथौरागढ़ के ग्लेशियरों के संबंध में सही विकल्प चुनें:
- टिहरी में स्थित खतलिंग ग्लेशियर भिलंगना नदी का उद्गम स्रोत है।
- पिथौरागढ़ के नामिक और पोंटिंग ग्लेशियर पूर्वी रामगंगा को जल प्रदान करते हैं।
- खतलिंग ग्लेशियर साहसिक पर्यटकों और ट्रेकर्स के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. चमोली जनपद के अन्य प्रमुख हिमनद कौन से हैं?
- बद्रीनाथ ग्लेशियर (नर-नारायण पर्वत श्रृंखला के पास)
- दूनागिरी ग्लेशियर
- हिपरा बमक
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10. ग्लेशियरों के संरक्षण और वैज्ञानिक शोध के बारे में क्या सही है?
- ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों के पीछे खिसकने (Receding) की दर बढ़ गई है।
- वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (देहरादून) इन पर निरंतर शोध करता है।
- सुंदरढूंगा और कफनी ग्लेशियर पिंडर की सहायक नदियों को जन्म देते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी