उत्तराखंड की विधायी संरचना भारतीय संविधान के लोकतान्त्रिक सिद्धांतों पर आधारित है। यहाँ की विधानसभा न केवल कानून निर्माण का केंद्र है, बल्कि यह राज्य की जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब भी है।
- संवैधानिक आधार: राज्य विधानमंडल का गठन भारतीय संविधान के भाग VI (अनुच्छेद 168 से 212) के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया है, जो इसकी शक्तियों और प्रक्रियाओं को परिभाषित करता है।
- एकसदनीय प्रकृति: उत्तराखंड में एकसदनीय (Unicameral) विधानमंडल है। इसका अर्थ है कि यहाँ केवल एक सदन है, जिसे ‘उत्तराखंड विधानसभा’ कहा जाता है। यहाँ विधान परिषद का अस्तित्व नहीं है।
- सदस्य संख्या: उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 निर्वाचित सदस्य होते हैं। राज्य के गठन के समय यह संख्या अंतरिम रूप से भिन्न थी, जिसे बाद में परिसीमन के माध्यम से स्थिर किया गया।
- मनोनयन का अंत: पूर्व में एंग्लो-इंडियन समुदाय के एक सदस्य को राज्यपाल द्वारा मनोनीत करने का प्रावधान था, जिसे 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा समाप्त कर दिया गया है।
- प्रत्यक्ष निर्वाचन: विधानसभा के सभी 70 सदस्यों का चुनाव राज्य के वयस्क मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन (Direct Election) प्रणाली के माध्यम से किया जाता है।
- निर्वाचन क्षेत्र: चुनाव के उद्देश्य से पूरे उत्तराखंड को 70 क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जहाँ ‘एक व्यक्ति, एक मत’ के सिद्धांत का पालन होता है।
- कार्यकाल: विधानसभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, जो इसकी पहली बैठक की तिथि से गिना जाता है।
- समय से पूर्व विघटन: मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल विधानसभा को 5 वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले भी भंग कर सकते हैं।
- आपातकाल में विस्तार: राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान, संसद कानून बनाकर विधानसभा के कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष के लिए बढ़ा सकती है।
- सदस्यता हेतु योग्यता: विधानसभा सदस्य (MLA) बनने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना और न्यूनतम 25 वर्ष की आयु पूर्ण करना अनिवार्य है।
- अयोग्यता के आधार: यदि कोई सदस्य लाभ का पद धारण करता है, दिवालिया है, या मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित है, तो वह सदस्यता के अयोग्य माना जाता है।
- दल-बदल कानून: संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत यदि कोई सदस्य अपनी पार्टी छोड़ता है या व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है।
- विधानसभा अध्यक्ष (Speaker): सदन की बैठकों का संचालन और अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी ‘अध्यक्ष’ की होती है, जिसे सदस्य अपने बीच से ही चुनते हैं।
- निर्णायक मत (Casting Vote): किसी विषय पर मतदान के दौरान पक्ष और विपक्ष में बराबर मत आने की स्थिति में, अध्यक्ष अपना निर्णायक मत देने का अधिकार रखते हैं।
- विधायी शक्तियाँ: विधानसभा को राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाने का अनन्य अधिकार प्राप्त है।
- वित्तीय नियंत्रण: राज्य का बजट (वार्षिक वित्तीय विवरण) पारित करना विधानसभा का प्रमुख कार्य है। धन विधेयक (Money Bill) केवल इसी सदन में पेश किए जा सकते हैं।
- कार्यपालिका पर नियंत्रण: राज्य की मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है। सदन अविश्वास प्रस्ताव लाकर सरकार को हटा सकता है।
- संसदीय साधन: विधायक प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के माध्यम से जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरते हैं और जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
- चुनावी भूमिका: विधानसभा के निर्वाचित सदस्य भारत के राष्ट्रपति के चुनाव हेतु निर्वाचक मंडल का हिस्सा होते हैं।
- ऐतिहासिक तथ्य: राज्य की पहली अंतरिम विधानसभा का गठन 9 नवंबर, 2000 को 30 विधायकों के साथ हुआ था, जबकि पहली निर्वाचित विधानसभा हेतु चुनाव फरवरी 2002 में संपन्न हुए थे।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. उत्तराखंड विधानमंडल के संगठन और प्रकृति के संदर्भ में कौन से तथ्य सही हैं?
- राज्य विधानमंडल का गठन संविधान के भाग VI (अनुच्छेद 168-212) के तहत किया गया है।
- उत्तराखंड में एकसदनीय (Unicameral) विधानमंडल है, जिसे विधानसभा कहा जाता है।
- यहाँ विधान परिषद का अस्तित्व नहीं है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. विधानसभा की सदस्य संख्या और निर्वाचन प्रक्रिया के बारे में क्या सत्य है?
- उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 निर्वाचित सदस्य होते हैं।
- सदस्यों का चुनाव वयस्क मताधिकार द्वारा ‘प्रत्यक्ष निर्वाचन’ प्रणाली से होता है।
- चुनाव हेतु पूरे राज्य को 70 क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. विधानसभा सदस्यता के मनोनयन और योग्यता से संबंधित सही तथ्य कौन से हैं?
- 104वें संविधान संशोधन (2019) द्वारा एंग्लो-इंडियन सदस्य के मनोनयन को समाप्त कर दिया गया है।
- विधानसभा सदस्य (MLA) बनने हेतु न्यूनतम आयु 25 वर्ष होना अनिवार्य है।
- उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना आवश्यक है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. विधानसभा के कार्यकाल और विघटन के संदर्भ में क्या सही है?
- विधानसभा का सामान्य कार्यकाल अपनी पहली बैठक से 5 वर्ष का होता है।
- मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल विधानसभा को 5 वर्ष से पहले भी भंग कर सकते हैं।
- राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संसद इसके कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष के लिए बढ़ा सकती है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. विधानसभा सदस्यों की अयोग्यता और दल-बदल कानून के बारे में कौन से कथन सत्य हैं?
- लाभ का पद धारण करने या दिवालिया घोषित होने पर सदस्यता समाप्त हो सकती है।
- संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दल-बदल करने पर अयोग्यता का प्रावधान है।
- व्हिप (Whip) का उल्लंघन करने पर भी सदस्य की सदस्यता समाप्त की जा सकती है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) की शक्तियों और भूमिका के विषय में क्या सही है?
- अध्यक्ष का चुनाव विधानसभा के सदस्य अपने बीच से ही करते हैं।
- सदन की बैठकों का संचालन और अनुशासन बनाए रखना अध्यक्ष की जिम्मेदारी है।
- मत बराबर होने की स्थिति में अध्यक्ष को ‘निर्णायक मत’ (Casting Vote) देने का अधिकार है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7. विधानसभा की विधायी और वित्तीय शक्तियों के बारे में कौन सी जानकारी सही है?
- विधानसभा को राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है।
- राज्य का वार्षिक बजट पारित करना विधानसभा का प्रमुख कार्य है।
- धन विधेयक (Money Bill) केवल विधानसभा में ही पेश किए जा सकते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. कार्यपालिका पर नियंत्रण हेतु विधानसभा किन साधनों का उपयोग करती है?
- राज्य की मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है।
- विधानसभा ‘अविश्वास प्रस्ताव’ लाकर सरकार को हटा सकती है।
- विधायक प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के माध्यम से सरकार से जवाब मांगते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. विधानसभा सदस्यों की अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाओं के संदर्भ में क्या सत्य है?
- विधानसभा के निर्वाचित सदस्य भारत के राष्ट्रपति के चुनाव हेतु निर्वाचक मंडल का हिस्सा होते हैं।
- विधायक जनहित के मुद्दों पर कानून निर्माण का केंद्र होते हैं।
- वे राज्य की जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10. उत्तराखंड विधानसभा से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में क्या सही है?
- राज्य की पहली अंतरिम विधानसभा का गठन 9 नवंबर, 2000 को 30 विधायकों के साथ हुआ था।
- पहली निर्वाचित विधानसभा के लिए चुनाव फरवरी 2002 में संपन्न हुए थे।
- राज्य गठन के समय विधायी ढांचा अंतरिम रूप से तैयार किया गया था।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी