उत्तराखंड की राज्य कार्यपालिका की संरचना भारतीय संविधान के संसदीय ढांचे पर आधारित है, जहाँ राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख और मुख्यमंत्री वास्तविक कार्यकारी प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं।
- संवैधानिक स्थिति: भारतीय संविधान के भाग VI (अनुच्छेद 153 से 167) के तहत राज्य कार्यपालिका का प्रावधान है, जिसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद शामिल होती है।
- राज्यपाल की भूमिका: राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख (Titular Head) होता है। वह न केवल राज्य का प्रथम नागरिक है, बल्कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य करता है।
- नियुक्ति प्रक्रिया: राज्यपाल की नियुक्ति प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। उनका सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, परंतु वे राष्ट्रपति के ‘प्रसादपर्यंत’ पद पर बने रहते हैं।
- पद हेतु योग्यता: राज्यपाल बनने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना और न्यूनतम 35 वर्ष की आयु पूर्ण करना अनिवार्य है।
- कार्यकारी शक्तियाँ: राज्य सरकार के सभी शासन संबंधी कार्य राज्यपाल के नाम पर होते हैं। वे मुख्यमंत्री, अन्य मंत्रियों, महाधिवक्ता और राज्य लोक सेवा आयोग (UKPSC) के अध्यक्ष की नियुक्ति करते हैं।
- विधायी उत्तरदायित्व: राज्यपाल के पास विधानमंडल का सत्र बुलाने (आहूत), सत्रावसान करने और विधानसभा को भंग करने की शक्ति होती है। वे विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर हस्ताक्षर कर उन्हें कानून का रूप देते हैं।
- अध्यादेश शक्ति (अनुच्छेद 213): जब उत्तराखंड विधानसभा सत्र में न हो और तत्काल कानून की आवश्यकता हो, तो राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकते हैं, जिसका प्रभाव अधिनियम जैसा ही होता है।
- न्यायिक एवं वित्तीय कार्य: राज्यपाल राज्य बजट को सदन में रखवाते हैं और उनकी अनुमति के बिना कोई भी ‘धन विधेयक’ विधानसभा में पेश नहीं किया जा सकता। वे राज्य कानूनों के तहत सजा को कम या निलंबित भी कर सकते हैं।
- उत्तराखंड के प्रथम राज्यपाल: राज्य गठन के पश्चात सुरजीत सिंह बरनाला ने उत्तराखंड के प्रथम राज्यपाल के रूप में 9 नवंबर, 2000 को पदभार ग्रहण किया था।
- मुख्यमंत्री की नियुक्ति: राज्यपाल विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं। मुख्यमंत्री राज्य सरकार का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख (Real Executive) होता है।
- मुख्यमंत्री का कार्यकाल: मुख्यमंत्री का पद स्थायी नहीं होता; वे तब तक सत्ता में रहते हैं जब तक उन्हें विधानसभा में बहुमत प्राप्त है। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर उन्हें त्यागपत्र देना पड़ता है।
- मंत्रिपरिषद का गठन: मुख्यमंत्री की सलाह पर ही राज्यपाल अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं। मंत्रियों के विभागों का आवंटन और फेरबदल करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है।
- राज्यपाल और मुख्यमंत्री का संबंध: मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन और विधायी प्रस्तावों की जानकारी राज्यपाल को प्रदान करे।
- मंत्रिपरिषद (Council of Ministers): यह मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कार्य करने वाली राज्य की वास्तविक कार्यकारी संस्था है। अनुच्छेद 163 के अनुसार, यह राज्यपाल को सलाह देने के लिए अनिवार्य है।
- मंत्रियों की श्रेणियाँ: मंत्रिपरिषद में तीन स्तर के मंत्री होते हैं: कैबिनेट मंत्री (महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख), राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्य मंत्री।
- संख्या का सीमांकन (91वां संशोधन): उत्तराखंड की मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की सदस्य संख्या (70) के 15% से अधिक नहीं हो सकती।
- मंत्रियों की अधिकतम संख्या: उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में, मंत्रियों की अधिकतम संख्या 12 (मुख्यमंत्री सहित) निर्धारित है और यह न्यूनतम भी 12 से कम नहीं होनी चाहिए।
- सामूहिक उत्तरदायित्व: मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। यदि सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है, तो पूरे मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना पड़ता है।
- व्यक्तिगत उत्तरदायित्व: मंत्री व्यक्तिगत रूप से राज्यपाल के प्रति उत्तरदायी होते हैं, जिसका अर्थ है कि मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल किसी मंत्री को बर्खास्त कर सकते हैं।
- प्रथम मुख्यमंत्री: उत्तराखंड के प्रथम मुख्यमंत्री (अंतरिम) नित्यानंद स्वामी थे, जिन्होंने राज्य के प्रशासनिक ढांचे की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. राज्य कार्यपालिका की संवैधानिक स्थिति और संरचना के बारे में कौन से तथ्य सही हैं?
- राज्य कार्यपालिका का प्रावधान भारतीय संविधान के भाग VI (अनुच्छेद 153-167) में है।
- इसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद शामिल होते हैं।
- राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख और मुख्यमंत्री वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. राज्यपाल की नियुक्ति और कार्यकाल के संदर्भ में क्या सत्य है?
- राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
- राज्यपाल राष्ट्रपति के ‘प्रसादपर्यंत’ पद पर बने रहते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. राज्यपाल पद हेतु अनिवार्य योग्यताएँ और पद की प्रकृति क्या है?
- व्यक्ति को भारत का नागरिक होना अनिवार्य है।
- राज्यपाल बनने हेतु न्यूनतम आयु 35 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए।
- वह राज्य का प्रथम नागरिक और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. राज्यपाल की कार्यकारी शक्तियों के अंतर्गत कौन से कार्य आते हैं?
- राज्य सरकार के सभी शासन संबंधी कार्य राज्यपाल के नाम पर होते हैं।
- वे मुख्यमंत्री और उनकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं।
- वे महाधिवक्ता और राज्य लोक सेवा आयोग (UKPSC) के अध्यक्ष की नियुक्ति करते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. राज्यपाल की विधायी और अध्यादेश शक्तियों के बारे में क्या सही है?
- वे विधानसभा सत्र बुला सकते हैं (आहूत), सत्रावसान कर सकते हैं और विधानसभा भंग कर सकते हैं।
- अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
- अध्यादेश तब जारी किया जा सकता है जब विधानसभा सत्र में न हो और तत्काल कानून की आवश्यकता हो।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. राज्यपाल के वित्तीय और न्यायिक उत्तरदायित्वों के संदर्भ में क्या सत्य है?
- राज्यपाल राज्य बजट को सदन में रखवाते हैं।
- उनकी अनुमति के बिना कोई भी ‘धन विधेयक’ विधानसभा में पेश नहीं किया जा सकता।
- वे राज्य कानूनों के तहत सजा को कम या निलंबित करने की शक्ति रखते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7. मुख्यमंत्री की नियुक्ति और उनकी भूमिका के बारे में कौन से विकल्प सही हैं?
- राज्यपाल विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं।
- मुख्यमंत्री राज्य सरकार का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख (Real Executive) होता है।
- मंत्रियों के विभागों का आवंटन और फेरबदल करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. उत्तराखंड मंत्रिपरिषद की सदस्य संख्या और श्रेणियों के बारे में क्या सही है?
- मंत्रिपरिषद में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्य मंत्री होते हैं।
- 91वें संशोधन के अनुसार, मंत्रियों की संख्या विधानसभा सदस्यों के 15% से अधिक नहीं हो सकती।
- उत्तराखंड में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की अधिकतम संख्या 12 निर्धारित है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. मंत्रिपरिषद के ‘उत्तरदायित्व‘ के सिद्धांतों के बारे में क्या सत्य है?
- मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
- मंत्री व्यक्तिगत रूप से राज्यपाल के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
- अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरे मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना पड़ता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10. उत्तराखंड की कार्यपालिका के ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में क्या सही है?
- सुरजीत सिंह बरनाला उत्तराखंड के प्रथम राज्यपाल (9 नवंबर, 2000) थे।
- नित्यानंद स्वामी उत्तराखंड के प्रथम (अंतरिम) मुख्यमंत्री थे।
- अनुच्छेद 163 के अनुसार, राज्यपाल को सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का होना अनिवार्य है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी