उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और नवीन हिमालयी संरचना इसे प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील बनाती है।
- आपदा प्रबंधन का अग्रणी राज्य: उत्तराखंड भारत का प्रथम राज्य है जिसने आपदा प्रबंधन मंत्रालय का गठन किया। राज्य का प्रबंधन ढांचा मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलियाई मॉडल पर आधारित है।
- संवैधानिक ढांचा: भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत राज्य स्तर पर प्राधिकरण का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है, जो आपदा न्यूनीकरण और राहत कार्यों की निगरानी करता है।
- SDRF का गठन: NDRF की तर्ज पर उत्तराखंड में 9 अक्टूबर, 2013 को राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) का गठन किया गया, जो विशेष रूप से पर्वतीय आपदाओं के लिए प्रशिक्षित है।
- संवेदनशीलता जोन: भूगर्भीय दृष्टि से उत्तराखंड जोन-4 और जोन-5 में स्थित है। इसमें चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे जिले भूकंप की दृष्टि से अतिसंवेदनशील हैं।
- सर्वाधिक प्रचलित आपदा: उत्तराखंड में भूस्खलन (Landslide) सबसे अधिक बार आने वाली आपदा है, जबकि राज्य को सबसे अधिक संभावित खतरा भूकंप से है।
- ऐतिहासिक भूकंप: राज्य के इतिहास में सितंबर 1803 का बद्रीनाथ (चमोली) भूकंप सबसे विनाशकारी माना जाता है, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 9.0 आंकी गई थी।
- आधुनिक भूकंपीय घटनाएँ: 1991 का उत्तरकाशी भूकंप (6.6 तीव्रता) और 1999 का चमोली भूकंप (6.8 तीव्रता) आधुनिक काल की सबसे दुखद भूगर्भीय घटनाएँ रही हैं।
- केदारनाथ आपदा (2013): 16-17 जून, 2013 को आई यह आपदा राज्य की सबसे भीषण त्रासदी थी। इसका मुख्य कारण बादल फटना और चौराबाड़ी ग्लेशियर झील का टूटना था।
- ऑपरेशन सूर्याहोप: केदारनाथ त्रासदी के दौरान भारतीय सेना ने दुनिया का सबसे बड़ा नागरिक राहत अभियान चलाया, जिसे ‘ऑपरेशन सूर्याहोप‘ नाम दिया गया।
- ऋषिगंगा/धौलीगंगा बाढ़ (2021): 7 फरवरी, 2021 को नीति घाटी में ग्लेशियर टूटने से आई अचानक बाढ़ ने ऋषिगंगा और तपोवन विष्णुगाड परियोजनाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
- भूस्खलन की प्रमुख घटनाएँ: 1880 का नैनीताल भूस्खलन शहर के इतिहास का सबसे बड़ा हादसा था। वहीं, 1998 का मालपा भूस्खलन अपनी भयावहता और कैलाश मानसरोवर यात्रियों की मृत्यु के कारण चर्चा में रहा।
- हिमस्खलन (Avalanche): ऊँचाई वाले क्षेत्रों में हिमस्खलन एक बड़ी चुनौती है। अक्टूबर 2022 में उत्तरकाशी के ‘द्रौपदी का डांडा’ में हुए हिमस्खलन ने 29 पर्वतारोहियों की जान ले ली थी।
- वनाग्नि (Forest Fire): ग्रीष्म ऋतु में चीड़ के वनों में लगने वाली आग राज्य की पारिस्थितिकी के लिए बड़ा खतरा है। यह न केवल वन्यजीवों को नष्ट करती है, बल्कि जल स्रोतों को भी सुखा देती है।
- बादल फटना (Cloudburst): मानसूनी सीजन में कम समय में अत्यधिक वर्षा होने से पहाड़ी नालों में अचानक बाढ़ (Flash Flood) आ जाती है, जो गाँवों और सड़कों को बहा ले जाती है।
- तकनीकी निगरानी: मौसम की सटीक जानकारी के लिए सुरकंडा (टिहरी) और मुक्तेश्वर (नैनीताल) में डॉप्लर रडार स्थापित किए गए हैं, जो भारी वर्षा और बादल फटने का पूर्वानुमान देते हैं।
- भूकंपमापी केंद्र: राज्य में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी के लिए देहरादून, टिहरी और गरुड़ गंगा (चमोली) में अत्याधुनिक भूकंपमापी स्टेशन बनाए गए हैं।
- डिजिटल पहल: जनता को सचेत करने के लिए ‘सचेत‘ पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं, जो रीयल-टाइम आपदा अलर्ट प्रदान करते हैं।
- आपातकालीन संपर्क: राज्य ने आपदा सहायता के लिए केंद्रीकृत हेल्पलाइन नंबर 1070 और जनपद स्तर के लिए 1077 जारी किए हैं।
- जागरूकता अभियान: ‘आपदा प्रबंधन’ पत्रिका और भूकंप जागरूकता हेतु “डांडी-कांठी की गोद मां” जैसी फिल्मों के माध्यम से जन-सामान्य को प्रशिक्षित किया जाता है।
- निष्कर्ष: उत्तराखंड की भौगोलिक बनावट इसे प्राकृतिक आपदाओं का ‘हॉटस्पॉट’ बनाती है। सतत विकास, पारिस्थितिक संतुलन और त्वरित आपदा प्रबंधन ही इस ‘देवभूमि’ को सुरक्षित रख सकते हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन के प्रशासनिक ढांचे के बारे में कौन सा कथन सही है?
- उत्तराखंड भारत का पहला राज्य है जिसने आपदा प्रबंधन मंत्रालय का गठन किया।
- यहाँ का आपदा प्रबंधन मॉडल मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलियाई मॉडल पर आधारित है।
- राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के गठन के संदर्भ में क्या सत्य है?
- इसका गठन 9 अक्टूबर, 2013 को किया गया था।
- इसका गठन केंद्र के NDRF की तर्ज पर किया गया है।
- यह बल विशेष रूप से पर्वतीय आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. उत्तराखंड की भूगर्भीय संवेदनशीलता के संबंध में सही तथ्यों को चुनें:
- भूगर्भीय दृष्टि से उत्तराखंड भूकंप के जोन-4 और जोन-5 में स्थित है।
- चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ भूकंप की दृष्टि से अतिसंवेदनशील जिले हैं।
- राज्य में भूस्खलन सबसे अधिक बार आने वाली प्राकृतिक आपदा है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. 16-17 जून, 2013 की ‘केदारनाथ आपदा‘ के मुख्य कारण क्या थे?
- बादल फटने की घटना।
- चौराबाड़ी ग्लेशियर झील का टूटना।
- मंदाकिनी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. केदारनाथ त्रासदी के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन सूर्याहोप‘ की क्या विशेषताएँ थीं?
- यह भारतीय सेना द्वारा चलाया गया दुनिया का सबसे बड़ा नागरिक राहत अभियान था।
- इसका उद्देश्य फंसे हुए तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को बचाना था।
- इसे 2013 की भीषण त्रासदी के बाद शुरू किया गया था।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. राज्य में तकनीकी निगरानी और पूर्वानुमान के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
- सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए सुरकंडा और मुक्तेश्वर में डॉप्लर रडार स्थापित हैं।
- भूकंपीय निगरानी के लिए देहरादून, टिहरी और गरुड़ गंगा में स्टेशन बनाए गए हैं।
- जनता को अलर्ट भेजने के लिए ‘सचेत’ पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7. फरवरी 2021 की ऋषिगंगा/धौलीगंगा बाढ़ के संबंध में कौन से तथ्य सही हैं?
- यह आपदा नीति घाटी में ग्लेशियर टूटने के कारण आई थी।
- इसने ऋषिगंगा और तपोवन विष्णुगाड परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुँचाया।
- यह घटना चमोली जिले के अंतर्गत घटित हुई थी।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. उत्तराखंड में वनाग्नि (Forest Fire) के प्रमुख प्रभाव क्या हैं?
- यह ग्रीष्म ऋतु में मुख्य रूप से चीड़ (Pine) के वनों को प्रभावित करती है।
- इससे न केवल वन्यजीव नष्ट होते हैं बल्कि जल स्रोत भी सूख जाते हैं।
- यह राज्य के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. जन-जागरूकता और सहायता के लिए राज्य सरकार की कौन सी पहलें सक्रिय हैं?
- आपदा सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1070 (राज्य) और 1077 (जनपद) कार्यरत हैं।
- भूकंप जागरूकता हेतु “डांडी-कांठी की गोद मां” जैसी फिल्मों का उपयोग किया जाता है।
- ‘आपदा प्रबंधन’ पत्रिका के माध्यम से लोगों को शिक्षित किया जाता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10. राज्य की ऐतिहासिक आपदाओं के संदर्भ में क्या सत्य है?
- 1803 का बद्रीनाथ भूकंप राज्य का सबसे विनाशकारी भूकंप (9.0 तीव्रता) माना जाता है।
- 1880 का नैनीताल भूस्खलन शहर के इतिहास का सबसे बड़ा हादसा था।
- 1998 का मालपा भूस्खलन कैलाश मानसरोवर यात्रियों की मृत्यु के कारण चर्चा में रहा।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी