उत्तराखंड की पर्वत श्रेणियाँ न केवल राज्य का भौगोलिक आधार हैं, बल्कि ये भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र को भी नियंत्रित करती हैं।
- ट्रांस हिमालय (टेथिस हिमालय): यह हिमालय का सबसे उत्तरी और प्राचीनतम भाग है, जिसका निर्माण मुख्य हिमालय से पहले हुआ था। इसे ‘तिब्बती हिमालय’ भी कहा जाता है और यहाँ जैक्सर श्रेणी प्रमुख है।
- भूवैज्ञानिक संरचना: ट्रांस हिमालय मुख्य रूप से अवसादी चट्टानों से बना है। यहाँ से सतलुज और सिंधु जैसी पूर्ववर्ती नदियाँ निकलती हैं।
- वृहत हिमालय (हिमाद्री): यह उत्तराखंड की सबसे ऊँची और दुर्गम पर्वत श्रृंखला है, जो वर्षभर बर्फ से ढकी रहती है। यहाँ की ऊँचाई 4,500 से 7,817 मीटर तक है।
- हिमानी जलवायु: वृहत हिमालय में अत्यधिक ठंडी हिमानी जलवायु पाई जाती है। राज्य के 6 प्रमुख जनपद (उत्तरकाशी, चमोली आदि) इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।
- नंदा देवी शिखर: चमोली जिले में स्थित नंदा देवी (7,817 मीटर) उत्तराखंड की सर्वोच्च चोटी है और पूर्णतः भारत में स्थित दूसरी सबसे ऊँची चोटी है।
- बुग्याल: वृहत हिमालय के निचले ढालों पर मखमली घास के मैदान पाए जाते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में बुग्याल या पयार कहा जाता है।
- लघु या मध्य हिमालय: यह वृहत हिमालय के दक्षिण में स्थित है, जिसकी ऊँचाई 1,200 से 4,500 मीटर के बीच है। यहाँ मसूरी, रानीखेत और बिनसर जैसी प्रसिद्ध श्रेणियाँ हैं।
- दूधातोली श्रृंखला: मध्य हिमालय के अंतर्गत आने वाली दूधातोली श्रेणी को ‘उत्तराखंड का पामीर‘ कहा जाता है, जहाँ से पाँच प्रमुख नदियाँ निकलती हैं।
- शिवालिक श्रेणी (बाह्य हिमालय): यह हिमालय की सबसे दक्षिणवर्ती और नवीनतम श्रेणी है। इसे ‘मैनाक पर्वत’ भी कहा जाता है और इसकी ऊँचाई 700 से 1,200 मीटर के बीच है।
- सर्वाधिक वर्षा: शिवालिक श्रेणी अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण राज्य में सर्वाधिक वर्षा (200-250 सेमी) प्राप्त करती है, जिससे यहाँ सघन वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
- जीवाश्म की उपस्थिति: नवीनतम श्रेणी होने के कारण शिवालिक में जीवाश्म पाए जाते हैं, जबकि मध्य हिमालय में इनका अभाव होता है।
- प्रमुख चोटियों का समूह: राज्य में कामेत (7756 मी.), चौखम्बा (7138 मी.) और त्रिशूल (7120 मी.) जैसी भव्य चोटियाँ साहसिक पर्यटन का केंद्र हैं।
- पवित्र शिखर: रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ शिखर (6,940 मी.) और उत्तरकाशी का बंदरपूँछ शिखर (6,316 मी.) धार्मिक और भौगोलिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं।
- ऐतिहासिक दर्रे (Passes): उत्तराखंड के दर्रे जैसे माणा और नीति ऐतिहासिक रूप से भारत और तिब्बत के बीच व्यापारिक मार्ग रहे हैं।
- लिपुलेख दर्रा: पिथौरागढ़ में स्थित यह दर्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए उपयोग किया जाने वाला सबसे प्रसिद्ध मार्ग है।
- प्लेट टेक्टोनिक्स: हिमालय का निर्माण भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के आपसी टकराव के परिणामस्वरूप हुआ है, जो आज भी एक सक्रिय प्रक्रिया है।
- विभाजन रेखाएँ (भ्रंश): विभिन्न श्रेणियाँ एक-दूसरे से भ्रंश रेखाओं द्वारा अलग होती हैं, जैसे वृहत और लघु हिमालय के बीच मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) स्थित है।
- भूकंपीय संवेदनशीलता: अपनी नवीन भूवैज्ञानिक संरचना और सक्रिय भ्रंश रेखाओं के कारण उत्तराखंड अत्यधिक भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र (Zone IV और V) में आता है।
- नदी तंत्र का स्रोत: ये पर्वत श्रेणियाँ गंगा और यमुना जैसे महान नदी तंत्रों का उद्गम स्थल हैं, जो गंगोत्री और यमुनोत्री हिमनदों के रूप में यहाँ विद्यमान हैं।
- निष्कर्ष: उत्तराखंड की पर्वत श्रेणियाँ राज्य की अस्मिता हैं। ट्रांस हिमालय से लेकर शिवालिक तक की यह श्रृंखला न केवल भारत की सुरक्षा प्रहरी है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और आध्यात्मिक शांति का केंद्र भी है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. ट्रांस हिमालय (टेथिस हिमालय) के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
- यह हिमालय का सबसे उत्तरी और प्राचीनतम भाग है।
- इसे ‘तिब्बती हिमालय’ भी कहा जाता है।
- यहाँ जैक्सर श्रेणी प्रमुख रूप से स्थित है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. वृहत हिमालय (हिमाद्री) की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
- यह उत्तराखंड की सबसे ऊँची और दुर्गम पर्वत श्रृंखला है।
- इसकी ऊँचाई 4,500 से 7,817 मीटर तक है।
- यहाँ अत्यधिक ठंडी हिमानी जलवायु पाई जाती है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. नंदा देवी शिखर के बारे में क्या सत्य है?
- यह चमोली जिले में स्थित है।
- इसकी ऊँचाई 7,817 मीटर है।
- यह पूर्णतः भारत में स्थित दूसरी सबसे ऊँची चोटी है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. उत्तराखंड के ‘बुग्याल‘ या ‘पयार‘ किसे कहा जाता है?
- वृहत हिमालय के निचले ढालों पर स्थित मखमली घास के मैदान।
- उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमरेखा (Snowline) के नीचे पाए जाने वाले प्राकृतिक चरागाह।
- पहाड़ों की चोटियों पर स्थित वे विस्तृत क्षेत्र जो सर्दियों में बर्फ से ढके रहते हैं और गर्मियों में फूलों व घास से लद जाते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. लघु या मध्य हिमालयी क्षेत्र के अंतर्गत क्या आता है?
- इसकी ऊँचाई 1,200 से 4,500 मीटर के बीच है।
- यहाँ मसूरी, रानीखेत और बिनसर जैसी प्रसिद्ध श्रेणियाँ हैं।
- दूधातोली श्रेणी जिसे ‘उत्तराखंड का पामीर’ कहते हैं, इसी का हिस्सा है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. शिवालिक श्रेणी (बाह्य हिमालय) की पहचान क्या है?
- इसे ‘मैनाक पर्वत’ के नाम से भी जाना जाता है।
- यह हिमालय की सबसे दक्षिणवर्ती और नवीनतम श्रेणी है।
- इसकी ऊँचाई 700 से 1,200 मीटर के बीच है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7. शिवालिक श्रेणी में सर्वाधिक वर्षा और जैव विविधता का कारण क्या है?
- यहाँ राज्य की सर्वाधिक वर्षा (200-250 सेमी) होती है।
- यहाँ सघन वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
- नवीनतम श्रेणी होने के कारण यहाँ जीवाश्म पाए जाते हैं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. उत्तराखंड की प्रमुख चोटियों के समूह में कौन शामिल हैं?
- कामेत (7756 मी.)
- चौखम्बा (7138 मी.)
- त्रिशूल (7120 मी.)
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. राज्य के प्रमुख दर्रों (Passes) के महत्व के बारे में क्या सही है?
- माणा और नीति दर्रे ऐतिहासिक रूप से भारत-तिब्बत व्यापार मार्ग रहे हैं।
- लिपुलेख दर्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए प्रसिद्ध है।
- लिपुलेख दर्रा पिथौरागढ़ जिले में स्थित है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10. उत्तराखंड की भूवैज्ञानिक संवेदनशीलता के क्या कारण हैं?
- हिमालय का निर्माण भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव से हुआ है।
- यहाँ मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) जैसी सक्रिय भ्रंश रेखाएं मौजूद हैं।
- राज्य भूकंपीय जोखिम वाले जोन IV और V में आता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी