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उत्तराखंड की जलविद्युत एवं सिंचाई परियोजनाएँ

उत्तराखंड की प्रचुर जल संपदा उसे भारत के ‘ऊर्जा प्रदेश’ के रूप में स्थापित करती है। यहाँ की नदियाँ न केवल सिंचाई के माध्यम से कृषि को जीवन देती हैं, बल्कि जलविद्युत के जरिए राज्य के आर्थिक विकास का इंजन भी हैं।

  1. ऊर्जा प्रदेश की संकल्पना: उत्तराखंड को जलविद्युत की अपार क्षमता के कारण ‘भारत का ऊर्जा प्रदेश’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य को केंद्र या अन्य राज्यों की परियोजनाओं से 12% बिजली रॉयल्टी के रूप में निःशुल्क मिलती है।
  2. जलविद्युत का वर्गीकरण: राज्य में 2 से 25 मेगावाट तक की परियोजनाओं को ‘लघु’ और इससे अधिक क्षमता वाली परियोजनाओं को ‘बड़ी’ जलविद्युत परियोजना की श्रेणी में रखा गया है।
  3. टिहरी बाँध (एशिया का सबसे ऊँचा): भागीरथी और भिलंगना के संगम पर स्थित यह बाँध 260.5 मीटर ऊँचा है। इसकी कुल स्थापित क्षमता 2400 मेगावाट है, जो राज्य और राष्ट्र के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।
  4. स्वामी रामतीर्थ सागर: टिहरी बाँध के विशाल जलाशय को आधिकारिक रूप से ‘स्वामी रामतीर्थ सागर’ (स्थानीय नाम: सुमन सागर) कहा जाता है, जो 42 वर्ग किमी में फैला है।
  5. मनेरी भाली परियोजना: उत्तरकाशी में भागीरथी नदी पर स्थित यह परियोजना दो चरणों (तिलोथ और धरासू) में कुल 394 मेगावाट बिजली पैदा करती है।
  6. विष्णुप्रयाग परियोजना: चमोली जनपद में अलकनंदा नदी पर स्थित यह 400 मेगावाट की परियोजना निजी क्षेत्र (जेपी समूह) द्वारा संचालित एक प्रमुख जलविद्युत इकाई है।
  7. लखवाड़-व्यासी परियोजना: यमुना नदी पर देहरादून में स्थित इस बहुउद्देशीय परियोजना से 6 राज्य लाभान्वित होते हैं। इसे 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था।
  8. किशाऊ बाँध: यह टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की एक संयुक्त महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसकी प्रस्तावित क्षमता 660 मेगावाट और ऊँचाई 236 मीटर है।
  9. ग्लोगी जलविद्युत परियोजना (1909): मसूरी के पास स्थित यह उत्तर भारत की पहली और देश की दूसरी जलविद्युत परियोजना थी, जिसने राज्य में बिजली उत्पादन की नींव रखी।
  10. धौलीगंगा परियोजना: पिथौरागढ़ के धारचूला में स्थित यह 280 मेगावाट की परियोजना NHPC द्वारा संचालित है। फरवरी 2021 की आपदा में इसे काफी क्षति पहुँची थी।
  11. श्रीनगर जलविद्युत परियोजना: अलकनंदा नदी पर स्थित 330 मेगावाट की यह परियोजना पौड़ी और टिहरी जनपदों के मध्य विस्तृत है और क्षेत्रीय ऊर्जा मांग को पूरा करती है।
  12. UJVNL की भूमिका: उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (स्थापना: 12 फरवरी 2001) राज्य में जलविद्युत के विकास और प्रबंधन के लिए उत्तरदायी मुख्य नोडल एजेंसी है।
  13. नवीकरणीय ऊर्जा नीति: राज्य ने 29 जनवरी 2008 को अपनी नवीकरणीय ऊर्जा नीति घोषित की, जिसमें सौर और लघु जलविद्युत जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  14. पारंपरिक सिंचाई (गूल): पर्वतीय क्षेत्रों में नदियों से खेतों तक पानी पहुँचाने के लिए बनी पक्की या कच्ची छोटी नहरों को गूल कहा जाता है, जो आज भी सामुदायिक सिंचाई का मुख्य आधार हैं।
  15. नौला और धारा: ये उत्तराखंड के प्राचीन जल प्रबंधन के प्रतीक हैं। ‘नौला’ भूमिगत जल संचयन की बावड़ीनुमा संरचना है, जबकि ‘धारा’ प्राकृतिक जल स्रोत है।
  16. आधुनिक नहर प्रणालियाँ: राज्य के मैदानी जिलों (हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर) में सिंचाई के लिए ऊपरी गंगा नहर और पूर्वी गंगा नहर जैसे आधुनिक तंत्रों का व्यापक उपयोग होता है।
  17. सिंचित क्षेत्रफल: राज्य के कुल बोए गए क्षेत्रफल का लगभग 45-50% भाग ही सिंचित है। ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले शुद्ध सिंचित क्षेत्रफल में अग्रणी हैं।
  18. सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation): बागवानी और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार अब ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीकों पर सब्सिडी प्रदान कर रही है।
  19. पर्यावरणीय चुनौतियाँ: बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के कारण विस्थापन, भूकंपीय संवेदनशीलता और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों के कारण अक्सर इनका विरोध (जैसे सुंदरलाल बहुगुणा द्वारा) होता रहा है।

निष्कर्ष:

उत्तराखंड की नदियाँ ‘श्वेत स्वर्ण’ (White GolD. हैं। यहाँ की सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाएँ आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करती हैं, बशर्ते उन्हें पारिस्थितिक संतुलन के साथ विकसित किया जाए।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी

  • उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेशके रूप में स्थापित करने वाले कारकों के बारे में क्या सत्य है?
  1. राज्य को अन्य परियोजनाओं से 12% बिजली रॉयल्टी के रूप में निःशुल्क मिलती है।
  2. यहाँ जलविद्युत की अपार क्षमता है, जो आर्थिक विकास का मुख्य इंजन है।
  3. 2 से 25 मेगावाट तक की परियोजनाओं को ‘लघु’ जलविद्युत श्रेणी में रखा गया है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • विश्वप्रसिद्ध टिहरी बाँधपरियोजना के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
  1. यह भागीरथी और भिलंगना के संगम पर स्थित एशिया का सबसे ऊँचा (260.5 मीटर) बाँध है।
  2. इसकी कुल स्थापित विद्युत क्षमता 2400 मेगावाट है।
  3. इसके विशाल जलाशय को आधिकारिक रूप से ‘स्वामी रामतीर्थ सागर’ कहा जाता है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • राज्य की ऐतिहासिक और नोडल एजेंसियों के बारे में सही तथ्यों का चयन करें:
  1. ग्लोगी जलविद्युत परियोजना (1909) उत्तर भारत की पहली जलविद्युत परियोजना थी।
  2. उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) की स्थापना 12 फरवरी 2001 को हुई।
  3. राज्य ने 29 जनवरी 2008 को अपनी नवीकरणीय ऊर्जा नीति घोषित की थी।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • यमुना और टोंस नदी पर स्थित परियोजनाओं के बारे में क्या सत्य है?
  1. लखवाड़-व्यासी परियोजना (यमुना नदी) को 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया।
  2. किशाऊ बाँध टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल की संयुक्त परियोजना है।
  3. किशाऊ बाँध की प्रस्तावित क्षमता 660 मेगावाट और ऊँचाई 236 मीटर है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • अलकनंदा और धौलीगंगा नदी की विद्युत परियोजनाओं के संबंध में सही विकल्प चुनें:
  1. विष्णुप्रयाग परियोजना (400 मेगावाट) अलकनंदा नदी पर निजी क्षेत्र द्वारा संचालित है।
  2. श्रीनगर जलविद्युत परियोजना (330 मेगावाट) पौड़ी और टिहरी जनपदों के मध्य स्थित है।
  3. धौलीगंगा परियोजना (280 मेगावाट) पिथौरागढ़ के धारचूला में स्थित है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • उत्तरकाशी जिले की मनेरी भाली परियोजनाके बारे में क्या सही है?
  1. यह परियोजना उत्तरकाशी में भागीरथी नदी पर स्थित है।
  2. इसके दो चरण (तिलोथ और धरासू) क्रियान्वित हैं।
  3. इसकी कुल स्थापित क्षमता लगभग 394 मेगावाट है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • उत्तराखंड के पारंपरिक जल प्रबंधन और सिंचाई पद्धतियों के बारे में क्या सत्य है?
  1. ‘गूल’ पहाड़ों में सिंचाई के लिए बनाई गई छोटी कच्ची या पक्की नहरें हैं।
  2. ‘नौला’ भूमिगत जल संचयन की प्राचीन बावड़ीनुमा संरचना है।
  3. ‘धारा’ उत्तराखंड के प्रसिद्ध प्राकृतिक जल स्रोत हैं।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • राज्य की आधुनिक सिंचाई प्रणालियों और सिंचित क्षेत्र के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
  1. हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में ऊपरी गंगा नहर जैसे आधुनिक तंत्रों का उपयोग होता है।
  2. शुद्ध सिंचित क्षेत्रफल की दृष्टि से ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले अग्रणी हैं।
  3. राज्य के कुल बोए गए क्षेत्रफल का लगभग 45-50% भाग ही सिंचित है।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • सिंचाई और जल संरक्षण हेतु नवीन प्रयासों के बारे में सही तथ्य चुनें:
  1. राज्य सरकार अब ड्रिप और स्प्रिंकलर (सूक्ष्म सिंचाई) तकनीकों पर सब्सिडी प्रदान कर रही है।
  2. नवीकरणीय ऊर्जा नीति में सौर और लघु जलविद्युत पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  3. जल प्रबंधन के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास निरंतर जारी हैं।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

  • बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
  1. भूकंपीय संवेदनशीलता और विस्थापन की समस्या।
  2. पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव।
  3. स्थानीय स्तर पर होने वाले पर्यावरण संरक्षण संबंधी विरोध।
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: D. उपरोक्त सभी

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