उत्तराखंड की जलवायु हिमालय की गोद में स्थित होने और ऊँचाई के भारी अंतर के कारण अत्यंत विविधतापूर्ण है। यहाँ मैदानी इलाकों की उष्णता से लेकर हिमालय के शिखरों की स्थायी बर्फबारी तक का अनुभव एक ही राज्य में किया जा सकता है।
- ऊँचाई का प्रभाव: राज्य की जलवायु निर्धारण में समुद्र तल से ऊँचाई (Altitude) सबसे प्रमुख कारक है। जैसे-जैसे हम मैदानों से पहाड़ों की ओर बढ़ते हैं, तापमान में गिरावट आती जाती है।
- ढाल की दिशा: पर्वतीय ढालों का रुख सूर्य के प्रकाश और वर्षा की मात्रा को प्रभावित करता है। दक्षिणोन्मुखी बाहरी ढालों पर उत्तरी आंतरिक ढालों की तुलना में अधिक वर्षा प्राप्त होती है।
- उपोष्ण जलवायु क्षेत्र (900 मी. तक): यह क्षेत्र राज्य के तराई, भाबर और दून घाटियों में फैला है। यहाँ गर्म ग्रीष्मकाल और हल्की सर्दियाँ होती हैं, जो मैदानी इलाकों के समान हैं।
- गर्म शीतोष्ण क्षेत्र (900-1,800 मी.): इस ऊँचाई पर जलवायु सुखद हो जाती है। यहाँ वनस्पतियों की प्रचुरता है और चीड़ (Pine) के वनों का विस्तार सबसे अधिक मिलता है।
- शीत शीतोष्ण क्षेत्र (1,800-3,000 मी.): यहाँ तापमान वर्षभर कम रहता है और सर्दियाँ काफी कठोर होती हैं। इस पट्टी में मुख्य रूप से कोणधारी (Coniferous) वन पाए जाते हैं।
- अल्पाइन जलवायु (3,000-4,200 मी.): यह जलवायु मुख्य रूप से बुग्यालों (Alpine meadows) में पाई जाती है। यहाँ केवल छोटी घास और झाड़ियाँ ही जीवित रह पाती हैं।
- हिमानी जलवायु (4,200 मी. से ऊपर): यह क्षेत्र ‘स्थायी तुषार’ का है जहाँ वर्षभर बर्फ जमी रहती है। यहाँ की जलवायु अत्यंत बर्फीली है और वनस्पति का अभाव होता है।
- शीत शुष्क जलवायु (ट्रांस हिमालय): 2,500-3,000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित ट्रांस हिमालयी क्षेत्र में वर्षा बहुत कम होती है, जिससे यहाँ की जलवायु लद्दाख की तरह शुष्क और ठंडी रहती है।
- ऋतुओं का विभाजन: भारतीय मौसम विभाग के अनुसार राज्य में मुख्य रूप से तीन ऋतुएँ—ग्रीष्म, वर्षा और शीत—पाई जाती हैं।
- ग्रीष्म ऋतु (रूड़ी/खर्साऊ): मार्च से मध्य जून तक चलने वाली इस ऋतु में मई-जून सबसे गर्म महीने होते हैं। ऊँचाई वाले क्षेत्रों में जाने की परंपरा इसी समय शुरू होती है।
- वर्षा ऋतु (चौमासा/बसग्याल): मध्य जून से अक्टूबर तक चलने वाली इस ऋतु में जुलाई-अगस्त में सर्वाधिक वर्षा होती है।
- वर्षा का वितरण: भूगोलवेत्ताओं के अनुसार, उत्तराखंड में पूर्व (नेपाल सीमा) से पश्चिम (हिमाचल सीमा) की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा में क्रमिक कमी आती है।
- शीत ऋतु (हृयूंद/शीतकला): नवंबर से फरवरी तक रहने वाली इस ऋतु में जनवरी सबसे ठंडा महीना होता है। इस दौरान ऊँचाई वाले पशुपालक ‘घमतापी’ के लिए मैदानों की ओर पलायन करते हैं।
- पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances): शीतकाल में होने वाली वर्षा उत्तर-पश्चिमी चक्रवातों के कारण होती है। यह वर्षा रबी की फसल (जैसे गेहूँ) के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
- जलोढ़ मिट्टी: राज्य के मैदानी भागों और नदी घाटियों में पाई जाने वाली यह मिट्टी सबसे उपजाऊ है और गहन कृषि के लिए उपयुक्त है।
- तराई की दलदली मिट्टी: तराई क्षेत्र में महीन कणों वाली दलदली मिट्टी पाई जाती है, जो जलधारण क्षमता अधिक होने के कारण धान और गन्ने की खेती के लिए सर्वोत्तम है।
- भाबर की मिट्टी: शिवालिक के ठीक नीचे कंकड़-पत्थर और मोटे बालू वाली मिट्टी पाई जाती है। यहाँ छिद्रिलता अधिक होने के कारण नदियाँ धरातल से गायब होकर भूमिगत हो जाती हैं।
- पर्वतीय और भूरी मिट्टी: ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में जैविक पदार्थों (पत्तियों के गलने) से बनी मिट्टी पाई जाती है, जो वनों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- तापमान के चरम: राज्य में जून का महीना सर्वाधिक तापमान वाला और जनवरी का महीना न्यूनतम तापमान वाला होता है।
- निष्कर्ष: उत्तराखंड की जलवायु उपोष्णकटिबंधीय से लेकर आर्कटिक (हिमानी) तक का विस्तृत स्पेक्ट्रम पेश करती है, जो यहाँ के अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र और ‘बुग्याल’ संस्कृति का आधार है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. उत्तराखंड की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक कौन से हैं?
- समुद्र तल से ऊँचाई (Altitude) का भारी अंतर।
- पर्वतीय ढालों की दिशा और सूर्य का प्रकाश।
- हिमालय की उपस्थिति और अक्षांशीय विस्तार।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. 900 मीटर तक की ऊँचाई वाले ‘उपोष्ण जलवायु क्षेत्र‘ के बारे में क्या सत्य है?
- यह क्षेत्र तराई, भाबर और दून घाटियों में फैला है।
- यहाँ गर्म ग्रीष्मकाल और हल्की सर्दियाँ होती हैं।
- यहाँ की जलवायु मैदानी इलाकों के समान होती है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. पर्वतीय क्षेत्रों में ऊँचाई के अनुसार जलवायु के वर्गीकरण के संबंध में सही विकल्प चुनें:
- गर्म शीतोष्ण क्षेत्र (900-1,800 मी.) में चीड़ के वनों की प्रचुरता होती है।
- शीत शीतोष्ण क्षेत्र (1,800-3,000 मी.) में कोणधारी (Coniferous) वन पाए जाते हैं।
- अल्पाइन जलवायु (3,000-4,200 मी.) मुख्य रूप से बुग्यालों में पाई जाती है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. उत्तराखंड की ‘हिमानी जलवायु‘ (4,200 मी. से ऊपर) की क्या विशेषताएँ हैं?
- यह ‘स्थायी तुषार’ का क्षेत्र है जहाँ वर्षभर बर्फ जमी रहती है।
- यहाँ जलवायु अत्यंत बर्फीली होती है।
- यहाँ प्राकृतिक वनस्पतियों का पूर्णतः अभाव होता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. राज्य में वर्षा के वितरण और प्रभाव के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
- वर्षा ऋतु को स्थानीय भाषा में ‘चौमासा’ या ‘बसग्याल’ कहा जाता है।
- पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा में क्रमिक कमी आती है।
- दक्षिणोन्मुखी बाहरी ढालों पर आंतरिक ढालों की तुलना में अधिक वर्षा होती है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. शीत ऋतु (हृयूंद) और पश्चिमी विक्षोभ के बारे में क्या सत्य है?
- नवंबर से फरवरी तक रहने वाली इस ऋतु में जनवरी सबसे ठंडा महीना है।
- शीतकाल में वर्षा उत्तर-पश्चिमी चक्रवातों (पश्चिमी विक्षोभ) के कारण होती है।
- यह वर्षा रबी की फसल (जैसे गेहूँ) के लिए अत्यंत लाभकारी है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7. भाबर क्षेत्र की मिट्टी की क्या विशेषता है?
- यहाँ कंकड़-पत्थर और मोटे बालू वाली मिट्टी पाई जाती है।
- अत्यधिक छिद्रिलता के कारण नदियाँ यहाँ भूमिगत हो जाती हैं।
- यह क्षेत्र शिवालिक श्रेणियों के ठीक नीचे स्थित है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. तराई क्षेत्र की मिट्टी और कृषि के संबंध में सही तथ्य कौन से हैं?
- यहाँ महीन कणों वाली दलदली मिट्टी पाई जाती है।
- यहाँ की मिट्टी में जलधारण क्षमता अधिक होती है।
- यह मिट्टी धान और गन्ने की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. उत्तराखंड की ‘शीत शुष्क जलवायु‘ (ट्रांस हिमालय) के बारे में क्या सही है?
- यह क्षेत्र 2,500-3,000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
- यहाँ वर्षा बहुत कम होती है।
- यहाँ की जलवायु लद्दाख की तरह शुष्क और ठंडी रहती है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10. राज्य के तापमान और ऋतुओं के चक्र के बारे में कौन सा कथन सत्य है?
- ग्रीष्म ऋतु (रूड़ी) में मई-जून सबसे गर्म महीने होते हैं।
- जून का महीना राज्य में सर्वाधिक तापमान वाला होता है।
- ऊँचाई वाले क्षेत्रों में जाने की परंपरा ग्रीष्म ऋतु में शुरू होती है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी