उत्तराखंड का आधुनिक इतिहास ब्रिटिश शासन के रणनीतिक सुधारों, टिहरी रियासत के राजसी शासन और जन आंदोलनों के संघर्ष का एक संगम है।
- ब्रिटिश सत्ता का उदय: 1814-16 के आंग्ल-नेपाल युद्ध के बाद ‘सुगौली की संधि’ (4 मार्च 1816) के माध्यम से उत्तराखंड में ब्रिटिश शासन की आधिकारिक नींव पड़ी। गोरखाओं को पराजित कर अंग्रेजों ने कुमाऊँ और गढ़वाल के बड़े हिस्से पर अधिकार कर लिया।
- विलियम ट्रेल का प्रशासन: कुमाऊँ के दूसरे कमिश्नर विलियम ट्रेल (1816-1835) को ब्रिटिश शासन का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। उन्होंने 9 पटवारी पद सृजित किए और 1823 में प्रसिद्ध ‘अस्सी साला’ भूमि बंदोबस्त कराया।
- हेनरी रैम्जे का युग: सर हेनरी रैम्जे (1856-1884) को कुमाऊँ का ‘बेताज बादशाह’ कहा जाता है। उनके समय में 1874 में राजस्व पुलिस व्यवस्था लागू हुई और तराई क्षेत्र में नहरों का व्यापक जाल बिछाया गया।
- टिहरी रियासत की स्थापना: ब्रिटिशों ने अलकनंदा के पश्चिमी भाग को राजा सुदर्शन शाह को सौंप दिया, जहाँ 28 दिसंबर 1815 को टिहरी रियासत की स्थापना हुई। सुदर्शन शाह एक महान कला प्रेमी थे, जिन्होंने ‘सभासार’ ग्रंथ की रचना की।
- रियासत का आधुनिकीकरण: राजा प्रताप शाह ने टिहरी में अंग्रेजी शिक्षा की नींव रखी और ‘प्रतापनगर’ बसाया, जबकि कीर्ति शाह ने राज्य में पहली बार बिजली, वेधशाला और कृषि बैंक की सुविधा प्रदान की।
- स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत: चंपावत के कालू सिंह महरा को उत्तराखंड का प्रथम स्वतंत्रता सेनानी माना जाता है, जिन्होंने 1857 की क्रांति के दौरान ‘क्रांतिवीर’ नामक गुप्त संगठन चलाया था।
- राजनीतिक चेतना का विकास: 1871 में ‘अल्मोड़ा अखबार’ का प्रकाशन और 1870 में ‘डिबेटिंग क्लब’ की स्थापना ने बुद्धिजीवियों के बीच राजनीतिक चेतना का बीजारोपण किया।
- कुमाऊँ परिषद: 1916 में स्थापित ‘कुमाऊँ परिषद’ ने राज्य की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया। 1926 में इसका विलय कांग्रेस में हो गया।
- कुली बेगार आंदोलन: 13-14 जनवरी 1921 को बद्रीदत्त पांडे के नेतृत्व में बागेश्वर में सरयू नदी के तट पर हजारों लोगों ने बेगार न करने की शपथ ली और रजिस्टर नदी में बहा दिए। गांधी जी ने इसे ‘रक्तहीन क्रांति’ कहा।
- गांधी जी और उत्तराखंड: 1929 में गांधी जी ने कौसानी प्रवास के दौरान ‘अनासक्ति योग’ टीका लिखी और कौसानी को ‘भारत का स्विट्जरलैंड‘ कहा। उनके आगमन से नमक सत्याग्रह को राज्य में नई गति मिली।
- पेशावर कांड (1930): वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने पेशावर में निहत्थे अफगान स्वतंत्रता सेनानियों पर गोली चलाने से मना कर दिया। इस घटना ने गढ़वाल राइफल्स का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर दिया।
- श्रीदेव सुमन का बलिदान: टिहरी रियासत की निरंकुशता के खिलाफ लड़ते हुए श्रीदेव सुमन ने 84 दिन की ऐतिहासिक भूख हड़ताल की और 25 जुलाई 1944 को शहीद हो गए।
- भारत छोड़ो आंदोलन और सल्ट की घटना: 1942 के आंदोलन के दौरान अल्मोड़ा के सल्ट में पुलिस गोलीबारी में कई लोग शहीद हुए। गांधी जी ने सल्ट को ‘कुमाऊँ का बारदोली‘ की संज्ञा दी।
- डोला-पालकी आंदोलन: जयानंद भारती के नेतृत्व में इस सामाजिक आंदोलन ने दलित शिल्पकारों को विवाह के अवसर पर पालकी में बैठने का मानवीय अधिकार दिलाया।
- रियासत का विलय: 1 अगस्त 1949 को टिहरी रियासत का भारत संघ में विलय हुआ और यह उत्तर प्रदेश का एक जिला बना। राजा मानवेन्द्र शाह इसके अंतिम शासक थे।
- पृथक राज्य की माँग: अलग राज्य की पहली औपचारिक माँग 1938 के श्रीनगर अधिवेशन में उठी। 1979 में उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) का गठन इस आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
- 1994 के काले अध्याय: पृथक राज्य आंदोलन के दौरान 1 सितंबर को खटीमा और 2 सितंबर को मसूरी में पुलिस ने बर्बर गोलीबारी की। 2 अक्टूबर 1994 का मुजफ्फरनगर (रामपुर तिराहा) कांड इस संघर्ष का सबसे दुखद हिस्सा था।
- राज्य का गठन: लंबे संघर्ष और बलिदानों के बाद 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड भारतीय गणतंत्र के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
- प्रशासनिक विकास: ब्रिटिश काल में स्थापित वन पंचायतें (1931) और चाय बागान आज भी राज्य की आर्थिकी और पर्यावरण प्रबंधन के महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं।
- निष्कर्ष: आधुनिक उत्तराखंड का इतिहास केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि यह यहाँ के निवासियों की अटूट जिजीविषा, पर्यावरण प्रेम और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी
प्रश्न 1. उत्तराखंड में ब्रिटिश शासन की स्थापना और प्रारंभिक प्रशासन के संदर्भ में क्या सही है? A. 1816 की सुगौली की संधि के माध्यम से राज्य में ब्रिटिश शासन की आधिकारिक नींव पड़ी।
- विलियम ट्रेल (1816-1835) को ब्रिटिश शासन का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
- विलियम ट्रेल ने 1823 में प्रसिद्ध ‘अस्सी साला’ भूमि बंदोबस्त कराया था।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. ‘कुमाऊँ के बेताज बादशाह‘ हेनरी रैम्जे (1856-1884) के कार्यकाल की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
- उनके समय में 1874 में राज्य में ‘राजस्व पुलिस व्यवस्था’ लागू की गई।
- उन्होंने तराई क्षेत्र में सिंचाई हेतु नहरों का व्यापक जाल बिछाया।
- उनके शासनकाल को कुमाऊँ के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण युग माना जाता है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. टिहरी रियासत की स्थापना और विकास के बारे में कौन से तथ्य सत्य हैं?
- राजा सुदर्शन शाह ने 28 दिसंबर 1815 को टिहरी रियासत की स्थापना की।
- सुदर्शन शाह ने प्रसिद्ध ‘सभासार’ ग्रंथ की रचना की थी।
- राजा कीर्ति शाह ने रियासत में पहली बार बिजली और वेधशाला जैसी सुविधाएँ प्रदान कीं।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. उत्तराखंड में राजनीतिक चेतना के उदय और प्रारंभिक स्वतंत्रता संग्राम के विषय में क्या सही है?
- कालू सिंह महरा को उत्तराखंड का प्रथम स्वतंत्रता सेनानी माना जाता है।
- 1870 में अल्मोड़ा में ‘डिबेटिंग क्लब’ की स्थापना हुई थी।
- 1871 में ‘अल्मोड़ा अखबार’ का प्रकाशन राजनीतिक चेतना का प्रमुख मोड़ था।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. ‘कुली बेगार आंदोलन‘ (1921) के ऐतिहासिक महत्व के संदर्भ में कौन से कथन सत्य हैं?
- इसका नेतृत्व बद्रीदत्त पांडे ने 13-14 जनवरी 1921 को बागेश्वर में किया था।
- हजारों लोगों ने सरयू नदी के तट पर बेगार न करने की शपथ ली और रजिस्टर नदी में बहा दिए।
- महात्मा गांधी ने इस सफल आंदोलन को ‘रक्तहीन क्रांति’ की संज्ञा दी थी।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. महात्मा गांधी और उत्तराखंड के संबंधों के बारे में क्या सही है?
- 1929 के कौसानी प्रवास के दौरान गांधी जी ने ‘अनासक्ति योग’ टीका लिखी।
- गांधी जी ने कौसानी की प्राकृतिक सुंदरता को देखकर उसे ‘भारत का स्विट्जरलैंड’ कहा।
- सल्ट क्षेत्र के बलिदान से प्रभावित होकर गांधी जी ने इसे ‘कुमाऊँ का बारदोली’ कहा।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 7. उत्तराखंड के ऐतिहासिक जन आंदोलनों (पेशावर कांड और डोला-पालकी) के विषय में क्या सत्य है?
- 1930 में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने निहत्थे अफगान सेनानियों पर गोली चलाने से मना कर दिया।
- जयानंद भारती ने दलितों के अधिकारों के लिए ‘डोला-पालकी आंदोलन’ का नेतृत्व किया।
- इन आंदोलनों ने राज्य में सामाजिक समानता और राष्ट्रीय वीरता को नई ऊँचाई दी।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. टिहरी रियासत के संघर्ष और भारत संघ में विलय के बारे में कौन से तथ्य सही हैं?
- श्रीदेव सुमन 84 दिनों की भूख हड़ताल के बाद 25 जुलाई 1944 को शहीद हो गए।
- 1 अगस्त 1949 को टिहरी रियासत का आधिकारिक रूप से भारत संघ में विलय हुआ।
- राजा मानवेन्द्र शाह टिहरी रियासत के अंतिम शासक थे।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन के ‘काले अध्यायों‘ और संघर्ष के बारे में क्या सही है?
- 1994 में खटीमा और मसूरी में पुलिस द्वारा बर्बर गोलीबारी की गई।
- 2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर (रामपुर तिराहा) कांड आंदोलन की सबसे दुखद घटना थी।
- 1979 में उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के गठन ने आंदोलन को राजनीतिक दिशा दी।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी
प्रश्न 10. उत्तराखंड राज्य के गठन और उसके आधुनिक स्तंभों के बारे में क्या सत्य है?
- 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड भारतीय गणतंत्र के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
- ब्रिटिश काल में स्थापित वन पंचायतें (1931) आज भी राज्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- राज्य का इतिहास निवासियों की अटूट जिजीविषा और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है।
- उपरोक्त सभी
उत्तर: D. उपरोक्त सभी